चंद्रपुर में बारिश औसत से काफी कम, कृषि विभाग की सलाह: रब्बी में कम पानी वाली फसलें लगाएं
चंद्रपुर जिले में इस साल सिर्फ 700 मिलीमीटर बारिश हुई है, इसलिए कृषि विभाग ने किसानों से रब्बी में कम पानी वाली फसलें चुनने को कहा है।
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चंद्रपुर जिले में इस बार बारिश औसत से बहुत कम हुई है, जिससे सूखे जैसे हालात बन गए हैं। जिले में सालाना औसतन 1,143 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए, लेकिन इस साल सिर्फ 700 मिलीमीटर दर्ज हुई है। यह औसत का 61.91 प्रतिशत है। पिछले साल जिले में 1,298 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई थी।
कम बारिश का सीधा असर खेतों की नमी और सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी पर पड़ा है। आने वाले रब्बी सीजन में सिंचाई के लिए पानी मिलने की भी सीमाएं खड़ी हो गई हैं। इसलिए बुवाई से पहले पानी का हिसाब लगाना और सही फसल चुनना खास तौर पर जरूरी हो गया है। कृषि विभाग का कहना है कि किसान पानी की उपलब्धता देखकर अपनी फसल पद्धति में बदलाव करें।
कृषि विभाग ने अपील की है कि चना, कुसुम, रब्बी ज्वार, सूरजमुखी और अलसी जैसी तुलनात्मक रूप से कम पानी में होने वाली फसलों को प्राथमिकता दी जाए। विभाग के मुताबिक सूखे जैसे हालात में ज्यादा पानी मांगने वाली फसलें लगाई गईं तो सिंचाई की दिक्कत तो खड़ी होगी ही, पैदावार पर भी असर पड़ सकता है। किसानों को उपलब्ध पानी, जमीन के प्रकार, खेत की नमी और स्थानीय मौसम को ध्यान में रखकर रब्बी की योजना बनानी चाहिए। कम पानी में टिकने वाली फसलें चुनने से संभावित नुकसान घटाने में मदद मिल सकती है।
खास तौर पर चना और अलसी कम से मध्यम पानी में ली जा सकती हैं। कुसुम और रब्बी ज्वार भी असिंचित हालात के लिए काम की साबित हो सकती हैं। अगर स्थानीय हालात अनुकूल हों तो सूरजमुखी की खेती पर भी विचार किया जा सकता है।
2025-26 के रब्बी सीजन में जिले में कुल 1 लाख 22 हजार 930 हेक्टेयर क्षेत्र में अलग-अलग फसलें लगाई गई थीं। इनमें 94 हजार 565 हेक्टेयर में दलहन, 25 हजार 819 हेक्टेयर में अनाज और 2 हजार 545 हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई थी। इस साल बारिश कम है, इसलिए पिछले सीजन की फसल पद्धति को देखकर हालात के हिसाब से बदलाव करना जरूरी है।
विभाग ने यह भी कहा है कि रब्बी में गेहूं और मक्का जैसी ज्यादा पानी मांगने वाली फसलें लगाते समय किसान उपलब्ध पानी का ध्यान रखें। इनकी जगह कम पानी में होने वाली और स्थानीय हालात के अनुकूल फसलें चुनें। बुवाई से पहले स्थानीय कृषि अधिकारी और कृषि सहायकों से सलाह लें। सही फसल नियोजन, मौजूद नमी का कारगर इस्तेमाल और पानी की बचत से मुश्किल हालात में फसल का संभावित नुकसान घटाया जा सकता है। इसलिए किसान रब्बी सीजन की योजना सोच-समझकर बनाएं।