मोतीलाल ओसवाल का नया फंड: एक ही स्कीम में इक्विटी, डेट, सोना, चांदी और REITs
मोतीलाल ओसवाल म्युच्युअल फंड ने नई फंड ऑफर 'मोतीलाल ओसवाल मल्टी ऐसेट-ओम्नीफंडऑफफंड्स' लॉन्च की है। NFO 21 अक्टूबर 2026 से 4 नवंबर 2026 तक खुला रहेगा।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मोतीलाल ओसवाल म्युच्युअल फंड (MOMF) ने अपनी नई फंड ऑफर 'मोतीलाल ओसवाल मल्टी ॲसेट-ओम्नीफंडऑफफंड्स' शुरू करने का ऐलान किया है। यह एक ओपन-एंडेड फंड ऑफ फंड्स स्कीम है। इसमें इक्विटी-केंद्रित स्कीमों, डेट-केंद्रित स्कीमों और गोल्ड व सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में पैसा लगाया जाएगा।
फंड का मकसद है कि निवेशक को एक ही प्रोडक्ट के जरिए अलग-अलग तरह के एसेट में निवेश का मौका मिले। साथ ही बाजार के बदलते हालात के हिसाब से एसेट का बंटवारा सक्रिय तरीके से बदला जाएगा। कंपनी के मुताबिक इस स्कीम में इक्विटी, डेट, सोना, चांदी और REITs, सबका मेल है।
यह फंड मैक्रो पैरामीटर्स, वैल्युएशन और मोमेंटम इंडिकेटर्स पर टिके एसेट एलोकेशन के ढांचे पर चलता है। रणनीति में अलग-अलग मार्केट कैपिटलाइजेशन में पहुंच देने वाली इक्विटी स्कीमों का चुनाव, अंदर की स्कीमों में एक्सपोजर का सक्रिय मैनेजमेंट, कर्ज-केंद्रित स्कीमों में हिस्सा और गोल्ड व सिल्वर ETF में एक्सपोजर शामिल हैं। इसके पीछे का बुनियादी उसूल यह है कि हर एसेट क्लास की खूबियां अलग होती हैं और बाजार के अलग-अलग दौर में उनका प्रदर्शन भी अलग हो सकता है।
इक्विटी बाजार पर व्यापक आर्थिक हालात, कंपनियों की कमाई, वैल्युएशन, लिक्विडिटी और बाजार की भावना का असर पड़ता है। डेट बाजार पर ब्याज दरों का चक्र, महंगाई, नीतिगत फैसले और क्रेडिट स्प्रेड असर डालते हैं। सोने-चांदी के दाम अमेरिकी डॉलर, असली ब्याज दरों, भू-राजनीतिक जोखिम, औद्योगिक मांग और सप्लाई से प्रभावित होते हैं। REITs का प्रदर्शन ब्याज दरों, किराए की आमदनी, प्रॉपर्टी में ऑक्यूपेंसी के स्तर और निवेश की मांग पर निर्भर करता है। इसी वजह से इस रणनीति में बाजार की स्थिति के मुताबिक निवेश का बंटवारा बदला जा सकता है।
स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्युमेंट के मुताबिक एसेट एलोकेशन ऐसा रहेगा: कम से कम 95 फीसदी और ज्यादा से ज्यादा 100 फीसदी MOMF की देसी इक्विटी-आधारित स्कीमों, डेट-आधारित स्कीमों और सभी म्युच्युअल फंडों के गोल्ड व सिल्वर ETF की यूनिट्स में। इसके भीतर, MOMF की सक्रिय इक्विटी-केंद्रित स्कीमों की यूनिट्स और/या ETF या इंडेक्स फंड की यूनिट्स में कम से कम 10 और ज्यादा से ज्यादा 80 फीसदी निवेश होगा। संबंधित श्रेणी की सक्रिय डेट-केंद्रित स्कीमों और/या ETF या इंडेक्स फंड की यूनिट्स में भी 10 से 80 फीसदी, और गोल्ड और/या सिल्वर ETF की यूनिट्स में भी 10 से 80 फीसदी रहेगा। डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में कैश और कैश के बराबर के साधन आएंगे। ज्यादा जानकारी के लिए स्कीम का SID देखना चाहिए।
मल्टी-एसेट निवेश में हर एसेट क्लास की बाजार के अलग-अलग हालात में अपनी खासियत होती है। इक्विटी से पूंजी बढ़ने की संभावना मिलती है, जबकि डेट से ब्याज के रूप में आमदनी की गुंजाइश रहती है। सोना और चांदी कीमती धातुओं में निवेश का मौका देते हैं। सोने को मूल्य बचाए रखने का संभावित साधन माना जाता है, जबकि चांदी से औद्योगिक मांग से जुड़े निवेश का मौका मिलता है। REITs के जरिए रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश का रास्ता खुलता है। इन सबको साथ लाकर बदलते बाजार में अलग-अलग खूबियों का फायदा लेने के इरादे से यह रणनीति बनी है।
नई फंड ऑफर (NFO) 21 अक्टूबर 2026 से 4 नवंबर 2026 तक खुली रहेगी। स्कीम का निवेश उद्देश्य है कि अंदर के फंडों की निवेश शैलियों का फायदा लेते हुए, सक्रिय और निष्क्रिय इक्विटी-केंद्रित स्कीमों, सक्रिय और निष्क्रिय डेट-केंद्रित स्कीमों और गोल्ड व सिल्वर ETF के विविध पोर्टफोलियो में पैसा लगाकर लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाई जाए। हालांकि, यह गारंटी नहीं दी जा सकती कि स्कीम का उद्देश्य पूरा होगा।
बेंचमार्क 60 फीसदी Nifty 500 TRI, 5 फीसदी सोने की देसी कीमतें, 5 फीसदी चांदी की देसी कीमतें और 30 फीसदी निफ्टी शॉर्ट ड्यूरेशन डेट इंडेक्स का मिश्रण है। जो निवेशक इक्विटी-केंद्रित स्कीमों, डेट-केंद्रित स्कीमों और गोल्ड व सिल्वर ETF में पैसा लगाकर लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए यह स्कीम उपयुक्त बताई गई है।
NFO के दौरान और उसके बाद की नियमित निवेश अवधि में एकमुश्त (Lumpsum) निवेश कम से कम Rs 500 से शुरू होगा और उसके बाद Rs 1 के गुणकों में। SIP के लिए अलग-अलग फ्रीक्वेंसी के विकल्प उपलब्ध हैं, जिनकी जानकारी SID में है। एक्जिट लोड के बारे में नियम यह है कि अलॉटमेंट की तारीख से 90 दिन के भीतर या 90वें दिन यूनिट्स का रिडेम्पशन करने पर 1 फीसदी एक्जिट लोड लगेगा। 90 दिन के बाद रिडेम्पशन करने पर कोई एक्जिट लोड नहीं लगेगा।
MOMF की स्कीमों में स्विच करने पर एक्जिट लोड लगेगा। स्कीम के अंदर के विकल्प बदलने पर कोई लोड नहीं लगेगा। साफ किया गया है कि एक ही स्कीम के भीतर स्विच करने पर भी कोई एक्जिट लोड नहीं लगेगा। लोड ढांचे के ब्योरे के लिए SID देखने को कहा गया है।
मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के फंड मैनेजर अजय खंडेलवाल ने कहा, "बाजार के हालात लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में सिर्फ एक एसेट क्लास तक सीमित न रहकर अनुशासित निवेश नजरिए से निवेशकों को फायदा हो सकता है। 'मोतीलाल ओसवाल मल्टी ॲसेट-ओम्नीफंडऑफफंड्स' एक ही निवेश समाधान के जरिए इक्विटी, डेट, सोना, चांदी और REITs को शामिल करता है। इस फंड के पीछे सक्रिय एसेट एलोकेशन का ढांचा है।"
उन्होंने आगे कहा, "व्यापक आर्थिक हालात, वैल्युएशन और बाजार की रफ्तार दिखाने वाले इंडिकेटर्स का आकलन करके, बदलते बाजार के मुताबिक निवेश का बंटवारा ढालने और लंबी अवधि में पूंजी बढ़ाने की कोशिश इस फंड की रहेगी। अंदर की स्कीमों की निवेश रणनीतियों का फायदा लेते हुए निवेशकों को अलग-अलग एसेट क्लास में विविध निवेश का मौका देना इसका उद्देश्य है।"
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।