डिजिटल एसेट्स में निवेश से पहले जानिए ठगी के 5 खतरे के संकेत, सुमित गुप्ता की सलाह
कॉइनडीसीएक्स के सह-संस्थापक सुमित गुप्ता ने बताया कि डिजिटल एसेट्स में निवेश करने वालों को किन पाँच बातों पर चौकन्ना रहना चाहिए, ताकि एक क्लिक में मेहनत की कमाई न जाए।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
भारत सरकार की 'डिजिटल इंडिया' पहल और बढ़ती टेक्नोलॉजी की वजह से देश का वित्तीय क्षेत्र तेज़ी से बदल रहा है। डिजिटल फाइनेंस के इस दौर में 'डिजिटल एसेट्स' यानी डिजिटल संपत्ति निवेश के एक नए और अहम विकल्प के तौर पर सामने आ रही है। कई नौजवान और नए निवेशक इस क्षेत्र में मौके तलाश रहे हैं।
लेकिन जैसे-जैसे इस क्षेत्र में लोगों की भागीदारी बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के मामले भी चिंता की हद तक बढ़ रहे हैं। इस बारे में कॉइनडीसीएक्स के सह-संस्थापक और लेखक सुमित गुप्ता ने मार्गदर्शन किया है।
आज के ठग और घोटालेबाज़ सिर्फ फर्जी फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं। वे सोशल मीडिया मैसेज, टेलीग्राम ग्रुप, WhatsApp मैसेज, आकर्षक मोबाइल ऐप या हूबहू असली दिखने वाली वेबसाइटों के ज़रिए निवेशकों को अपने जाल में फँसाते हैं। खासकर डिजिटल संपत्ति के क्षेत्र में नए उतरने वाले निवेशकों को किसी भी लालच में न आकर सतर्क रहना बेहद ज़रूरी है। ठगी से बचने के लिए हर निवेशक को ये 5 बड़े खतरे के संकेत पहचानने चाहिए।
पहला संकेत है 'आसान और जल्दी मुनाफे' के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावे। अगर कम या बिना किसी जोखिम के पक्के मुनाफे का, या बहुत थोड़े वक्त में ज़्यादा रिटर्न का वादा किया जा रहा है, तो यह सबसे पहला और सबसे बड़ा खतरे का संकेत है। हमेशा याद रखें कि बाज़ार से जुड़े किसी भी दूसरे निवेश की तरह डिजिटल संपत्ति में भी उतार-चढ़ाव होता है और उसमें जोखिम रहता है। घोटालेबाज़ अक्सर ऐसे मुनाफे का लालच इसलिए देते हैं कि लोग बिना सोचे फौरन पैसे ट्रांसफर कर दें। किसी भी आकर्षक दावे पर आँख मूँदकर भरोसा करने के बजाय यह परखें कि स्कीम क्या है, उसे देने वाली संस्था कौन-सी है और उसकी मान्यता जाँची जा सकती है या नहीं।
दूसरा संकेत है अनजान लोगों से अचानक आए निवेश के ऑफर। WhatsApp, टेलीग्राम, सोशल मीडिया या ईमेल पर किसी अनजान शख्स से सीधे निवेश का ऑफर आए, तो फौरन सतर्क हो जाएँ। लोग खुद को 'निवेश विशेषज्ञ' या किसी नामी कंपनी का 'प्रतिनिधि' बताकर आपका ध्यान खींचते हैं। कई बार स्थापित ब्रांड के नाम या लोगो का गलत इस्तेमाल करके फर्जी प्रोफाइल बनाई जाती हैं। ऐसे अचानक आए मैसेज में दिए नंबर या लिंक पर भरोसा न करें और संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी की पुष्टि करें।
तीसरा संकेत है हूबहू असली दिखने वाली संदिग्ध वेबसाइटें और ऐप्लिकेशन। कोई वेबसाइट या मोबाइल ऐप बहुत प्रोफेशनल और आकर्षक दिखे, तब भी वह आधिकारिक हो, यह ज़रूरी नहीं। अपराधी कानूनी और नामी वित्तीय सेवाओं से मिलते-जुलते फर्जी ऐप और वेबसाइट बना लेते हैं। कुछ फर्जी ऐप शुरू में निवेशक का भरोसा जीतने के लिए आभासी मुनाफा दिखाते हैं और छोटी रकम निकालने की इजाज़त भी देते हैं। जैसे ही यूज़र को भरोसा हो जाता है, उससे बड़ी रकम जमा करवाकर वे गायब हो जाते हैं। इसलिए कोई भी ऐप डाउनलोड करते वक्त सिर्फ 'गूगल प्ले स्टोर' या 'एप्पल ऐप स्टोर' जैसे आधिकारिक स्रोतों का इस्तेमाल करें और वेबसाइट का URL ध्यान से जाँचें।
चौथा संकेत है OTP, पासवर्ड या गोपनीय जानकारी की माँग। पासवर्ड, OTP (वन टाइम पासवर्ड), प्राइवेट की या वॉलेट का ब्योरा माँगा जाना बेहद गंभीर खतरे का संकेत है। घोटालेबाज़ अक्सर 'कस्टमर सपोर्ट प्रतिनिधि' होने का नाटक करते हैं। वे कहते हैं कि आपका खाता ब्लॉक हो गया है और ब्लॉक हटाने या लेन-देन पूरा करने के लिए OTP चाहिए, और इसी बहाने ठग लेते हैं। कोई भी आधिकारिक संस्था या प्लेटफॉर्म आपसे कभी गोपनीय जानकारी नहीं माँगता। इसलिए सामने वाला कितना भी बड़ा दावा करे, अपनी संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
पाँचवाँ संकेत है जल्दबाज़ी में फैसला करवाने के लिए बनाया गया 'दबाव'। आर्थिक ठगी में घोटालेबाज़ों का मुख्य हथियार 'अर्जेंसी' यानी तुरंत फैसले की स्थिति पैदा करना होता है। "अभी निवेश करें वरना मौका हाथ से निकल जाएगा", "पैसे निकालने के लिए अभी अतिरिक्त टैक्स भरें" या "छूट खत्म होने से पहले फैसला लें", इस तरह का दबाव आप पर बनाया जाता है। जब भी कोई शख्स आपको सोचने का वक्त दिए बिना फौरन फैसला लेने पर मजबूर करे, तब ठगी की आशंका सबसे ज़्यादा होती है।