सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 270 | Poor 18:45 IST

गोंदिया में बारिश की खींच से फसलों को नुकसान, तिरोडा के 20,400 हेक्टेयर में पैदावार प्रभावित

गोंदिया जिले में बारिश लंबे समय तक नहीं हुई। इससे खरीफ की फसलों पर बुरा असर पड़ा है और तिरोडा तालुका में 23,425 किसान प्रभावित हुए हैं।

गोंदिया में बारिश की खींच से फसलों को नुकसान, तिरोडा के 20,400 हेक्टेयर में पैदावार प्रभावित तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

गोंदिया जिले में इस साल बारिश लंबे समय तक रुकी रही, जिसका सीधा असर खरीफ सीजन की फसलों पर पड़ा है। सबसे ज्यादा मार तिरोडा तालुका पर पड़ी है, जहां करीब 20,400 हेक्टेयर रकबे की फसलों को नुकसान पहुंचा है। इस तालुका के 125 गांवों के 23,425 किसान इससे प्रभावित हुए हैं।

तिरोडा तालुका में इस खरीफ सीजन में 31,868.01 हेक्टेयर रकबे में बुआई की गई थी। लेकिन बुआई के बाद बारिश रुक गई और इसका असर फसलों की बढ़त पर साफ दिखा। प्रशासन ने तालुके के सभी 125 गांवों में नुकसान का सर्वे पूरा कर लिया है। अब किसानों को आर्थिक मदद का इंतजार है।

जिले के बाकी तालुकों में भी सर्वे युद्धस्तर पर चल रहा है। गोंदिया, सालेकसा, गोरेगांव, देवरी, आमगांव, सड़क अर्जुनी और अर्जुनी मोरगांव, यानी सात तालुकों में नुकसान वाली फसलों का सर्वे हो रहा है। इस प्रक्रिया में प्रभावित रकबे और किसानों की जानकारी जमा की जा रही है। कृषि अधिकारियों को उम्मीद है कि यह काम अगले चार दिनों में पूरा हो जाएगा। रिपोर्ट तैयार होने के बाद मदद को लेकर आगे की कार्रवाई होने की उम्मीद है।

सरकार ने दिवाली से पहले आपदा से प्रभावित किसानों को पांच हजार रुपये की मदद का ऐलान किया है। बाकी मदद के बारे में सरकार के स्तर पर फैसला लिया जाएगा। किसानों की नजर अब इसी फैसले और अंतिम आंकड़ों पर टिकी है।

गोंदिया को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन इस बार धान उगाने वाले किसान कई मुसीबतों से जूझ रहे हैं। बारिश में लंबा अंतराल आने से फसल की बढ़त रुक गई। कल्ले कम निकले, दाने भरने पर असर पड़ा और जमीन की नमी घट गई। इन वजहों से पैदावार घटने का डर जताया जा रहा है।

इसके ऊपर तना छेदक, भूरा फुदका, माहू और झुलसा जैसे कीड़ों और बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ गया। धान की बढ़त, बालियों की हालत और दाने भरने की प्रक्रिया पर इसका असर पड़ा। फसल बचाने के लिए किसानों को बार-बार दवा का छिड़काव करना पड़ रहा है। बीज, खाद, मजदूरी, पानी और कीटनाशकों पर खर्च पहले ही हो चुका था, ऐसे में यह अतिरिक्त बोझ बन गया है।

नतीजा यह है कि उत्पादन खर्च बढ़ गया है और उम्मीद के मुताबिक आमदनी होगी या नहीं, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है। बुआई, बीज, खाद, मजदूरी और जुताई-गुड़ाई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। फसल कर्ज की वापसी, बढ़ता खर्च और घटती आमदनी ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि घोषित मदद जल्दी मिल जाए।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे