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11:32 IST

बच्चों के भविष्य के लिए PPF, सुकन्या और NPS वात्सल्य: पैसे कब और कितने निकलेंगे

महंगाई के दौर में बच्चों की पढ़ाई के लिए बचत करने वाले पालकों को तीन सरकारी योजनाओं के पैसे निकालने के नियम पहले से समझ लेने चाहिए।

बच्चों के भविष्य के लिए PPF, सुकन्या और NPS वात्सल्य: पैसे कब और कितने निकलेंगे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

आज की बढ़ती महंगाई में पढ़ाई भी महंगी हो गई है। इसी वजह से कई जागरूक पालक बच्चे के जन्म के बाद ही उसकी पढ़ाई, उच्च शिक्षा या आगे के बड़े खर्चों के लिए बचत शुरू कर देते हैं। आम तौर पर पालक भरोसेमंद विकल्प चुनना पसंद करते हैं। इसके लिए तीन सरकारी योजनाएं सबसे अच्छी मानी जाती हैं। कुछ लोग पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी PPF में पैसे जमा करते हैं, बेटी हो तो सुकन्या समृद्धि योजना चुनते हैं, और कुछ पालक NPS वात्सल्य योजना में निवेश करते हैं।

हर महीने या हर साल थोड़ी-थोड़ी रकम अलग रखी जाती है, ताकि बेटा या बेटी 18 साल का होने तक बड़ा फंड तैयार हो जाए। लेकिन सिर्फ निवेश शुरू कर देना काफी नहीं है। यह समझना भी उतना ही जरूरी है कि योजना से पैसे कब निकल सकते हैं, कितनी रकम निकल सकती है और समय से पहले निकालने के नियम क्या हैं।

मान लीजिए आपका बच्चा अभी 3 साल का है और आपने आज से उसके लिए निवेश शुरू किया। 15 साल बाद बच्चा 18 साल का होगा। क्या तब पढ़ाई या दूसरी जरूरतों के लिए पूरा फंड मिल जाएगा? इसका जवाब इस पर निर्भर है कि आपने कौन-सी योजना चुनी है, क्योंकि तीनों योजनाओं में पैसे निकालने के नियम अलग-अलग हैं।

पहली योजना PPF है, जो लंबे समय की बचत के लिए इस्तेमाल होती है। इसमें खाता खोलने के 15 साल बाद खाता परिपक्व होता है। इसलिए बच्चे की उम्र 3 साल थी तब खाता खोला, तो 15 साल बाद यानी बच्चे के 18 साल का होने पर खाता परिपक्व हो सकता है। उस वक्त नियम के मुताबिक खाते की पूरी रकम निकाली जा सकती है। खाता आगे चलाना हो तो 5 साल के लिए अवधि बढ़ाने का विकल्प भी रहता है। यहां एक बात ध्यान रखनी होगी। बच्चे के 3 साल के होने पर ही खाता खोला हो, तभी 18वें साल में 15 साल पूरे होंगे। खाता देर से खोला, तो बच्चे के 18 साल के होने पर पूरा फंड निकल पाए, यह जरूरी नहीं।

PPF में कुछ हालात में मियाद पूरी होने से पहले भी पैसे निकाले जा सकते हैं। खाता खोलने के बाद 5 वित्तीय वर्ष पूरे होने पर, यानी आम तौर पर 7वें वित्तीय वर्ष से, आंशिक निकासी की सुविधा मिलती है। नियम के मुताबिक तय सीमा में रकम के 50 प्रतिशत तक पैसे निकाले जा सकते हैं और एक साल में सिर्फ एक बार निकासी हो सकती है।

उच्च शिक्षा या गंभीर बीमारी के इलाज जैसे खास कारणों से 5 वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद खाता समय से पहले बंद करने का भी प्रावधान है। लेकिन ऐसे में लागू नियमों के हिसाब से ब्याज में कटौती हो सकती है। इसलिए PPF में निवेश करते समय पैसे निकालने का वक्त और उसकी शर्तें पहले से समझ लेना जरूरी है।

दूसरी योजना सुकन्या समृद्धि है, जो सिर्फ बेटियों के लिए है। इस खाते की मियाद खाता खोलने के 21 साल बाद पूरी होती है। इसलिए बेटी 3 साल की थी तब खाता खोला, तो पूरी रकम मिलने का वक्त आम तौर पर तब आएगा जब वह 24 साल की होगी।

हालांकि बेटी की उच्च शिक्षा के लिए 18 साल पूरे होने पर या 10वीं पास करने के बाद नियम के मुताबिक खाते की रकम के 50 प्रतिशत तक पैसे निकाले जा सकते हैं। इस सुविधा के लिए दाखिले से जुड़े कागजात या पढ़ाई की फीस का सबूत देना पड़ सकता है। बेटी की शादी के लिए भी निकासी का खास प्रावधान है। शादी की तारीख को बेटी की उम्र कम से कम 18 साल पूरी होनी चाहिए। यह शर्त पूरी हो, तो खाता बंद करके नियम के मुताबिक पूरी रकम निकाली जा सकती है। इसलिए यह मानकर सुकन्या समृद्धि में निवेश नहीं करना चाहिए कि बेटी के 18 साल की होते ही उच्च शिक्षा के लिए पूरा फंड मिल जाएगा। पढ़ाई के लिए लगने वाली रकम, उसकी उपलब्धता और दूसरे आर्थिक स्रोतों की योजना पहले से बना लेनी चाहिए।

तीसरी योजना NPS वात्सल्य है, जो नाबालिग बच्चों के लिए शुरू की गई लंबी अवधि की रिटायरमेंट बचत योजना है। बच्चा 18 साल का होने पर खाते के लिए नए सिरे से KYC की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है और नॉमिनी की जानकारी देनी होती है। इसके बाद खाते की जिम्मेदारी बच्चे के पास चली जाती है और वह आगे के निवेश के फैसले ले सकता है। 18 साल पूरे होने के बाद तीन प्रमुख विकल्प मिलते हैं। पहला, NPS वात्सल्य खाते को 21 साल की उम्र तक चालू रखना। दूसरा, जमा रकम को सामान्य NPS खाते में ट्रांसफर करना। तीसरा, नियमों के मुताबिक पैसे निकालना।

दी गई जानकारी के मुताबिक खाते में जमा रकम 8 लाख रुपये से कम हो, तो पूरी रकम एकमुश्त निकालने का विकल्प मिल सकता है। रकम 8 लाख रुपये या उससे ज्यादा हो, तो ज्यादा से ज्यादा 80 प्रतिशत रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है, जबकि बाकी कम से कम 20 प्रतिशत रकम से एन्युटी यानी नियमित पेंशन देने वाली योजना खरीदनी पड़ती है। फिर भी असल में निकासी करते वक्त उस समय लागू NPS के नियम और शर्तें जांच लेना जरूरी है।

NPS वात्सल्य खाते से 18 साल पूरे होने से पहले भी कुछ खास हालात में पैसे निकाले जा सकते हैं। इसके लिए खाता कम से कम 3 साल पुराना होना चाहिए। पढ़ाई, बीमारी के इलाज या 75 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांगता जैसे कारणों से खुद जमा की गई रकम के 25 प्रतिशत तक पैसे निकल सकते हैं। इस हिसाब में निवेश से मिला रिटर्न शामिल नहीं होता। 18 साल से पहले इस तरह ज्यादा से ज्यादा 2 बार पैसे निकाले जा सकते हैं। इसके बाद 18 से 21 साल की अवधि में 2 बार और निकासी का मौका हो सकता है। इसके लिए संबंधित नियमों की पुष्टि कर लेना जरूरी है।

तो बच्चों के भविष्य के लिए कौन-सी योजना चुनें? PPF, सुकन्या समृद्धि और NPS वात्सल्य, तीनों अलग-अलग जरूरतों के लिए काम की हो सकती हैं। कौन-सी योजना सबसे अच्छी है, यह हर परिवार की आर्थिक हालत और पैसों की जरूरत कब पड़ेगी, इस पर निर्भर करता है। बेटा या बेटी 18 साल का होने पर उच्च शिक्षा के लिए पूरा फंड चाहिए, तो सिर्फ यह देखना काफी नहीं कि योजना में कितना ब्याज मिलता है। उस वक्त असल में कितनी रकम निकल सकेगी, कौन-सी शर्तें लागू होंगी और बाकी खर्च के लिए दूसरा फंड है या नहीं, यह जांचना जरूरी है।

बढ़ती महंगाई की वजह से आज पढ़ाई पर लगने वाला खर्च आगे चलकर काफी बढ़ सकता है। इसलिए नियमित बचत के साथ महंगाई को ध्यान में रखकर आर्थिक लक्ष्य तय करना जरूरी है। हर साल कितनी रकम लगानी है, कितने साल निवेश जारी रखना है और जरूरत पड़ने पर पैसे कब निकल सकेंगे, इसकी योजना पहले ही बना लें। बच्चों के लिए जल्दी निवेश शुरू करना अच्छा फैसला है, लेकिन सही योजना चुनते समय रिटर्न के साथ पैसे निकालने के नियम समझना भी उतना ही जरूरी है। किसी भी योजना में पैसे लगाने से पहले उसके ताजा आधिकारिक नियम, पात्रता और निकासी की शर्तें जांचकर ही फैसला लें।

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