मोताळा में संभावित पानी किल्लत पर बैठक, विधायक संजय गायकवाड ने दिए नियोजन के निर्देश
मोताळा तहसील कार्यालय में बुधवार को हुई बैठक में विधायक संजय गायकवाड ने अधिकारियों से पीने के पानी का नियोजन करने को कहा।
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आने वाले दिनों में पानी की किल्लत की नौबत आ सकती है। इसी से निपटने और तालुका के लोगों को पीने का पानी ठीक मात्रा में मिलता रहे, इस मकसद से बुधवार को मोताळा तहसील कार्यालय में पानी किल्लत के नियोजन और समीक्षा की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता विधायक संजय गायकवाड ने की। इसमें किल्लत दूर करने के लिए अलग-अलग उपायों पर विस्तार से बात हुई।
यह बैठक महाराष्ट्र शासन की 25 सितंबर और 5 अक्टूबर की सूचनाओं के मुताबिक बुलाई गई थी। बैठक में उपविभागीय अधिकारी, मोताळा की तहसीलदार सरिता पाटील, अलग-अलग विभागों के प्रमुख अधिकारी और कर्मचारी, सरपंच, प्रशासक और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।
मोताळा तालुका के नळगंगा, पलढग, राहेरा और कापूसवाडी जैसे प्रमुख बांधों के साथ बाकी छोटे और मध्यम प्रकल्पों में मौजूद पानी के भंडार का पूरा जायजा लिया गया। इस भंडार को देखते हुए आने वाली गर्मी में और अगले ग्यारह महीनों यानी अक्टूबर 2027 तक लोगों को पीने का पानी मिलता रहे, इस तरह पानी के आरक्षण और बंटवारे का नियोजन करने के निर्देश दिए गए।
मौजूद पानी में से सबसे पहले लोगों के पीने के पानी का आरक्षण तय करने पर जोर रहा। पानी पहुंचाने वाली मुख्य जलवाहिनियों की मरम्मत, बिना इजाजत पानी उठाने पर रोक और बंटवारे में संतुलन रखने पर भी चर्चा हुई। संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई कि संभावित किल्लत वाले गांवों की सूची बनाएं, जरूरत पड़ने पर टैंकर से पानी सप्लाई की मंजूरी लें, कुओं का अधिग्रहण करें और बंद पड़ी नल पानी सप्लाई योजनाओं की मरम्मत समय पर पूरी करें।
शासन निर्णय के प्रावधानों के हिसाब से तालुका स्तर पर पानी किल्लत निवारण और निगरानी समिति बनाकर रखने का फैसला भी इस बैठक में हुआ। राजस्व, ग्रामीण पानी सप्लाई, सिंचाई, महावितरण और पंचायत समिति के अधिकारियों से कहा गया कि वे आपसी तालमेल से काम करें और किल्लत दूर करने के काम बिना देरी पूरे करें।
बैठक के अध्यक्ष विधायक संजय गायकवाड ने संबंधित विभागों को किल्लत दूर करने के जरूरी उपाय तुरंत लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि शासन के 25 सितंबर और 5 अक्टूबर के निर्णय के मुताबिक योजनाबद्ध तरीके से काम हो और ध्यान रखा जाए कि तालुका के किसी भी नागरिक को पानी की किल्लत की आंच न लगे। बैठक में खास जोर इस पर रहा कि प्रशासन अभी से तैयार रहे, मौजूद पानी का बारीकी से नियोजन करे और पानी सप्लाई से जुड़ी समस्याएं समय पर सुलझाए।