बुधवार, 14 अक्टूबर 2026

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22:19 IST

बुलढाणा जिले में 337 लाइब्रेरी, 31 सिर्फ नाम की; मोबाइल के दौर में पाठक घटे

बुलढाणा जिले की 337 लाइब्रेरियों में से 306 को अनुदान मिलता है, जबकि 31 सिर्फ नाम के लिए चल रही हैं।

बुलढाणा जिले में 337 लाइब्रेरी, 31 सिर्फ नाम की; मोबाइल के दौर में पाठक घटे तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बुलढाणा जिले की लाइब्रेरियां आज पाठकों का इंतजार कर रही हैं। जिले में कुल 337 लाइब्रेरी हैं, लेकिन इनमें से 31 सिर्फ नाम के लिए चल रहे हैं। जिला लाइब्रेरी अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक बाकी 306 लाइब्रेरी ठीक से काम कर रही हैं और इसीलिए उन्हें सरकारी अनुदान मिलता है।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया, स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल इतना बढ़ गया है कि लोगों की जिंदगी का तरीका ही बदल गया है। एक समय मनोरंजन, जानकारी और ज्ञान का मुख्य ठिकाना रहीं लाइब्रेरियों से आज पाठक मुंह मोड़ रहे हैं। पढ़ने की संस्कृति को संभालकर रखने वाली ये जगहें अब सूनी पड़ती जा रही हैं। अखबार पढ़ने वाले बुजुर्गों से लेकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों तक, कई लोगों ने सुविधा के लिए प्राइवेट लाइब्रेरी चुन ली है। इंटरनेट हर जगह पहुंच गया है, इसलिए घर बैठे और कम समय में मनचाही जानकारी मिल जाती है। नतीजा यह है कि जिले की लगभग सभी लाइब्रेरियां या तो बिना पाठकों के हैं या बहुत कम पाठकों के साथ चल रही हैं, और वीरान दिखती हैं।

सरकार ने विद्यार्थियों, किसानों और पढ़ने का शौक रखने वालों के लिए जगह जगह लाइब्रेरियां शुरू की थीं। मकसद यह था कि जिला, तहसील और गांव के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए तरह तरह की किताबें मिलें और उनका ज्ञान बढ़े। किसानों को आधुनिक तरीके से विकसित हो रही तकनीक की जानकारी मिले। पढ़ने का शौक रखने वालों को कहानी संग्रह, उपन्यास, आत्मकथा, बाल साहित्य और गढ़ किलों पर आधारित किताबें एक ही जगह मिल जाएं। जिन 306 लाइब्रेरियों में पाठकों को सारी सुविधाएं दी जा रही हैं, उन्हीं को सरकार का अनुदान बांटा जाता है।

आज इंटरनेट की पहुंच की वजह से हर हाथ में मोबाइल फोन है। ताजा खबरें, खेल, राजनीति, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम हों या कहानी, उपन्यास और जीवनी, इन्हें पढ़ने के लिए पाठक अब लाइब्रेरी नहीं आता। कुकू एफएम और पॉकेट एफएम जैसी सेवाओं ने भी यह सब सुविधाजनक बना दिया है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों ने प्राइवेट लाइब्रेरी को अपना लिया है। किताबें मन को समृद्ध करती हैं, सोच को परिपक्व बनाती हैं और सही गलत का फर्क समझाती हैं। मगर सोशल मीडिया की वजह से पाठक वर्ग दूर चला गया है और पढ़ने के आंदोलन के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इससे निकलने के लिए लाइब्रेरियों का आधुनिकीकरण करके उन्हें और आकर्षक बनाना और सरकार का नियमित अनुदान देकर पढ़ने की संस्कृति को टिकाए रखना समय की जरूरत बन गया है।

सरकार की तरफ से अ, ब, क और ड वर्ग की लाइब्रेरियों को नियमित अनुदान बांटा जाता है। इसमें अ वर्ग की लाइब्रेरी को 11 लाख 52 हजार रुपये, ब वर्ग को 3 लाख 90 हजार रुपये, क वर्ग को 1 लाख 53 हजार रुपये और ड वर्ग को 48 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है।

इंटरनेट और डिजिटल सुविधाओं की कमी के कारण बीच में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों ने लाइब्रेरियों से दूरी बना ली थी। जिला लाइब्रेरी कार्यालय ने बताया कि अब जिले में 15 से 20 लाइब्रेरियां डिजिटल हो चुकी हैं।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे