जिगाव के बाकी काम के लिए 35 हजार करोड़ दें, जाधव ने जल शक्ति मंत्री पाटील से मांगा
केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटील को चिट्ठी लिखकर जिगाव प्रोजेक्ट के बचे हुए कामों के लिए 35 हजार करोड़ रुपये की फौरन मंजूरी मांगी है।
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केंद्रीय राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटील से मांग की है कि जिगाव प्रोजेक्ट के बचे हुए कामों के लिए प्रस्तावित 35 हजार करोड़ रुपये के फंड को फौरन मंजूरी दी जाए। यह मांग उन्होंने लिखित पत्र के जरिए की। जाधव ने यह पत्र 14 अक्टूबर को पाटील को भेजा।
बुलढाणा और अकोला जिले की खेती की जमीन को सिंचाई के दायरे में लाने के लिहाज से जिगाव प्रोजेक्ट को बहुत अहम माना जा रहा है। प्रोजेक्ट पूरा होने पर बुलढाणा जिले के छह तालुका, यानी शेगांव, जलगांव जामोद, संग्रामपुर, नांदुरा, मलकापुर और खामगांव, और अकोला जिले के बालापुर और तेल्हारा, इन दो तालुकों के कुल 287 गांवों की 1 लाख 16 हजार 770 हेक्टेयर खेती की जमीन सिंचाई के तहत आएगी।
पत्र में बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट की जल संचय क्षमता 26.01 टीएमसी है। पहले चरण का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अब दूसरे चरण के बचे हुए कामों को पूरा करने के लिए बड़े फंड की जरूरत है।
बचे हुए कामों को रफ्तार देने के लिए केंद्रीय जल आयोग की ई-पैम्स यानी इलेक्ट्रॉनिक प्रोजेक्ट मूल्यांकन प्रबंधन प्रणाली के जरिए प्रस्ताव पेश किया गया था। जाधव ने पत्र में लिखा है कि इस सिलसिले में हुई बैठक में वे खुद मौजूद थे। बैठक में आगे की दिशा तय की गई और बचे हुए कामों के लिए 35 हजार करोड़ रुपये के फंड की मांग केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष से की गई। उन्होंने यह भी लिखा कि इसके लिए जरूरी कागजात की पूर्ति भी कर दी गई है।
जाधव ने पत्र में मौजूदा हालात का भी जिक्र किया है। उनके मुताबिक बारिश न होने की वजह से बुलढाणा और अकोला जिलों में सूखे जैसी स्थिति बन गई है, और राज्य सरकार ने भी सूखा घोषित कर दिया है। ऐसे में किसानों को सिंचाई की पक्की सुविधा देना जरूरी है।
उनका कहना है कि जिगाव प्रोजेक्ट पूरा होने पर दोनों जिलों के बड़े इलाके को सिंचाई का फायदा मिलेगा। इससे खेती की पैदावार बढ़ाने में और आगे आने वाले सूखे का सामना करने में मदद हो सकती है। इसीलिए जाधव ने मांग की कि केंद्र सरकार बचे हुए कामों के लिए जरूरी 35 हजार करोड़ रुपये के फंड को फौरन मंजूरी दे और प्रोजेक्ट का काम तेजी से पूरा करने में सहयोग करे।