मीरा भायंदर के मनपा स्कूलों में जूते की खरीद पर 35 लाख के घोटाले का आरोप
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आरटीआई कार्यकर्ता कृष्णा गुप्ता का आरोप है कि 160 रुपये का जूता 500 रुपये में खरीदा गया।
मीरा भायंदर महानगरपालिका के स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों के स्कूली सामान की खरीद में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। बच्चों के लिए खरीदे गए जूतों में करीब 35 लाख रुपये का बड़ा गैरव्यवहार होने का गंभीर आरोप लगाया गया है। पानी की बोतलों के बंटवारे में हुई गड़बड़ी का मामला अभी ताजा ही था कि यह नया मामला आ गया।
इस मामले की सीधे एंटी करप्शन विभाग से गहराई से जांच कराने की मांग हो रही है। इसी वजह से महापालिका के गलियारों में हड़कंप मच गया है।
महापालिका के कुल 32 स्कूल हैं और इनमें करीब नौ हजार बच्चे पढ़ते हैं। ये बच्चे ज्यादातर आम और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, इसलिए महापालिका उन्हें मुफ्त शैक्षणिक सामान देती है। इस साल शिक्षण विभाग ने स्कूल बैग, जूते और मोजे खरीदने के लिए 2 करोड़ 43 लाख 60 हजार रुपये का टेंडर निकाला था। यह ठेका 'मे. नवकार युनिफॉर्म' नाम की संस्था को दिया गया।
आरटीआई कार्यकर्ता कृष्णा गुप्ता ने इस खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनकी शिकायत के मुताबिक महापालिका ने ठेकेदार को हर जोड़ी जूते के लिए 500 रुपये दिए। जबकि यही जूते मूल निर्माता कंपनी 'सोनॅक्सो फुटवेअर्स प्रा. लि.' से सीधे खरीदे जाएं तो सिर्फ 160 रुपये प्रति जोड़ी में मिल जाते हैं। यानी एक जोड़ी पर 340 रुपये का फर्क है।
कुल 10,275 बच्चों के जूतों का हिसाब लगाएं तो गुप्ता के दावे के मुताबिक 34 लाख 93 हजार 500 रुपये का गैरव्यवहार हुआ है। उन्होंने यह दावा बिल और कागजात के सबूत के साथ किया है।
गुप्ता का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों ने मिलीभगत करके पालिका की तिजोरी पर हाथ साफ किया और यह बड़ा घोटाला हुआ है। उन्होंने महापालिका आयुक्त को लिखित पत्र देकर मांग की है कि दोषियों पर भ्रष्टाचार प्रतिबंधक कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
शिक्षण विभाग के अतिरिक्त आयुक्त सचिन बांगर ने साफ कहा कि पूरे मामले की जांच टेंडर कमेटी से कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर इसमें कोई गड़बड़ी सामने आती है तो आयुक्त के आदेश के मुताबिक आगे कड़ा फैसला लिया जाएगा।
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