शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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बाइक बीमा रिन्यू करने से पहले देखें NCB, 50% तक घट सकता है OD प्रीमियम

बाइक बीमा रिन्यू करने से पहले देखें NCB, 50% तक घट सकता है OD प्रीमियम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कारोबार PT24 टीम

नो क्लेम बोनस यानी NCB से बाइक बीमा के ओन डैमेज प्रीमियम पर छूट मिलती है। जानिए यह कैसे तय होता है, बाइक या बीमा कंपनी बदलने पर इसका क्या होता है और क्लेम के बाद क्या होता है।

बाइक का बीमा रिन्यू कराते वक्त हो सकता है कि प्रीमियम पिछले साल जितना न हो। इसकी एक वजह आपका क्लेम-फ्री रिकॉर्ड हो सकता है। शर्तें पूरी होने पर नो क्लेम बोनस (NCB) के तहत ओन डैमेज प्रीमियम पर छूट मिलती है। NCB कैसे गिना जाता है, छूट कहां लगती है और बाइक या बीमा कंपनी बदलने पर उसका क्या होता है, यह जानने से रिन्यूअल का प्रीमियम समझना आसान हो जाता है।

NCB क्लेम-फ्री बीमा रिकॉर्ड पर मिलने वाली छूट है। लगातार जितने साल क्लेम नहीं होता, छूट उतनी बढ़ती है और यह ज्यादा से ज्यादा 50% तक जाती है। ओन डैमेज (OD) पॉलिसी के प्रीमियम पर यह छूट इस तरह है: एक साल क्लेम-फ्री रहने पर 20%, लगातार दो साल पर 25%, लगातार तीन साल पर 35%, लगातार चार साल पर 45% और लगातार पांच साल पर 50%।

एक उदाहरण लें। अगर आपका OD प्रीमियम Rs 5,000 है और आपका NCB 35% बनता है, तो छूट Rs 1,750 की होगी। यह NCB थर्ड-पार्टी प्रीमियम पर लागू नहीं होता।

छूट की रकम OD कवर के लिए लगने वाले प्रीमियम पर टिकी होती है। इसका मतलब यह है कि NCB का प्रतिशत एक जैसा हो, फिर भी दो पॉलिसीधारकों को अलग-अलग छूट मिल सकती है, अगर उनके OD प्रीमियम अलग हैं। जैसे Rs 3,000 के OD प्रीमियम पर 35% NCB से Rs 1,050 की छूट मिलेगी, जबकि Rs 6,000 के OD प्रीमियम पर वही NCB Rs 2,100 की छूट देगा। यानी NCB का प्रतिशत वही रहता है, पर छूट की रुपयों में कीमत OD प्रीमियम के हिसाब से बदलती है।

NCB पॉलिसीधारक से जुड़ा होता है, गाड़ी से नहीं। अगर आप अपनी बाइक बेचकर दूसरी खरीदते हैं, तो जमा हुआ NCB लागू शर्तों के मुताबिक नई गाड़ी पर इस्तेमाल हो सकता है। इसके लिए NCB हक दिखाने वाले कागज लग सकते हैं, जैसे रिन्यूअल नोटिस या पिछली बीमा कंपनी की कन्फर्मेशन।

रिन्यूअल पर बीमा कंपनी बदलने से कमाया हुआ NCB खत्म नहीं होता। लागू शर्तों के मुताबिक आप पात्र NCB नई पॉलिसी में ले जा सकते हैं। नई पॉलिसी लेते वक्त बोनस का सबूत देना पड़ सकता है। कंपनी बदलते समय ये कागज तैयार रखें: आपकी मौजूदा पॉलिसी का दस्तावेज, NCB दिखाने वाला रिन्यूअल नोटिस और मांगे जाने पर NCB सर्टिफिकेट या कोई दूसरा सबूत। रिन्यूअल से पहले ये बातें जांच लेने से नई कंपनी के पास जाने पर भी आपका जमा NCB गिना जाएगा।

NCB क्लेम-फ्री रिकॉर्ड बनाए रखने पर टिका है। अगर क्लेम किया जाता है, तो लागू मोटर बीमा नियमों के तहत अगली पॉलिसी अवधि के लिए NCB जा सकता है। इसलिए रिन्यूअल के कागज देखते वक्त अपनी NCB हिस्ट्री पर ध्यान देना चाहिए। असल नियम हमेशा पॉलिसी के शब्दों से मिलाकर देखें, अंदाजे से न मानें।

कुल मिलाकर, टू-व्हीलर बीमा रिन्यू करने से पहले सिर्फ कुल प्रीमियम न देखें। रिन्यूअल के कागजों में दिखाया NCB प्रतिशत जांचें और देखें कि वह आपके पात्र क्लेम-फ्री रिकॉर्ड से मेल खाता है या नहीं। NCB प्रीमियम का सिर्फ एक हिस्सा है, लेकिन उसे समझने से आपको मिल रही छूट साफ दिखती है। अगर कुछ पिछले रिकॉर्ड से अलग लगे, तो रिन्यूअल पूरा करने से पहले पॉलिसी के कागज जांच लें या बीमा कंपनी से बात करें।

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