शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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देउळगाव राजा में बालाजी महाराज यात्रा की कुश्ती दंगल, 70 साल पुरानी परंपरा जारी

देउळगाव राजा में बालाजी महाराज यात्रा की कुश्ती दंगल, 70 साल पुरानी परंपरा जारी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
खेल PT24 टीम

श्री बालाजी महाराज संस्थान की सालाना यात्रा के ललितोत्सव पर वैदू समाज ने गांव वालों के साथ मिलकर कुश्ती दंगल कराई।

देउळगाव राजा में श्री बालाजी महाराज संस्थान की सालाना यात्रा के ललितोत्सव के मौके पर पारंपरिक जंगी कुश्ती दंगल हुई। इसका आयोजन वैदू समाज ने गांव वालों के सहयोग से किया। करीब 70 साल से चली आ रही यह परंपरा वैदू समाज आज भी निभा रहा है। दंगल में अलग-अलग जगहों से आए पहलवानों ने हिस्सा लिया। आयोजकों के मुताबिक जीतने वाले पहलवानों को कुल दो से चार लाख रुपये तक के इनाम बांटे गए।

कुश्ती के अखाड़े का उद्घाटन केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, विधायक मनोज कायंदे और पूर्व विधायक डॉ. शशिकांत खेडेकर की मौजूदगी में हुआ। इसके बाद मान्यवरों के हाथों पहलवानों की कुश्तियां लगवाई गईं। अखाड़े की कांटे की टक्कर देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा थी।

प्रतापराव जाधव ने कहा कि शरीर को सेहतमंद और फिट रखने के लिए मैदानी खेल और रोज की कसरत बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि कुश्ती भारत के पारंपरिक खेलों में से एक है और ऐसी स्पर्धाओं से खिलाड़ियों को अपना हुनर दिखाने का मौका मिलता है।

विधायक मनोज कायंदे ने नौजवानों से अपील की कि वे कसरत को पहली जगह दें और ज्यादा से ज्यादा तादाद में राष्ट्रीय स्तर के खेलों में हिस्सा लें। उनके मुताबिक कुश्ती के अखाड़े से गांव में जोश का माहौल बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि व्यायामशाला बनाने के लिए जरूरी मदद करने की कोशिश रहेगी।

पूर्व विधायक डॉ. शशिकांत खेडेकर ने कहा कि कुश्ती दंगल सिर्फ खेल का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि गांव की एकता बनाए रखने वाला आयोजन है। ऐसे आयोजनों से बच्चों को खेल की प्रेरणा मिलती है और उनका भविष्य बनाने में मदद होती है। उन्होंने शुभकामना दी कि वैदू समाज की शुरू की हुई यह परंपरा आगे भी चलती रहे।

दंगल की आखिरी कुश्ती मुख्याधिकारी अरुण मोकल और संदीप नागरे के हाथों लगवाई गई। यह मुकाबला वाशिम के पहलवान विजय वारा और गंगापूर के पहलवान विशाल मागे के बीच हुआ और काफी कांटे का रहा। पूरे एक घंटे चली इस कुश्ती में दोनों पहलवानों ने जोरदार टक्कर दी। आखिर में पंचों की मध्यस्थता से दोनों पहलवानों को बराबर इनाम देने का फैसला हुआ। दर्शकों ने इस मुकाबले का पूरे जोश के साथ मजा लिया।

इस दंगल की एक और खासियत महिला पहलवानों की हिस्सेदारी रही। छत्रपती संभाजीनगर, पैठण और कन्नड से आई महिला पहलवानों ने अखाड़े में उतरकर अपना हुनर दिखाया। महिला कुश्तीपटुओं के आने से मौजूद लोगों में खास उत्साह दिखा।

70 साल की परंपरा निभाते हुए वैदू समाज ने गांव वालों के साथ जो दंगल कराई, उससे पारंपरिक खेलों को बढ़ावा मिला। कांटे की कुश्तियों, महिला पहलवानों की हिस्सेदारी और लोगों की मौजूदगी से यात्रा के ललितोत्सव में खास रंग आ गया।

पुलिस प्रशासन ने भी खास सहयोग किया। उपनिरीक्षक नितीन मिड, गवई साहब और उनकी पूरी टीम ने अखाड़े में खास ध्यान देकर मदद की और कार्यक्रम कामयाबी से पूरा हुआ।

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