स्किल्स ऑन व्हील्स की चलती-फिरती लैब 900 से ज्यादा स्कूलों तक पहुंची
लेंड अ हैंड इंडिया की मोबाइल स्किल लैब 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों के स्कूलों में बच्चों को काम करके सीखने का मौका दे रही है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
आज के दौर में सिर्फ किताबी जानकारी काफी नहीं है। बच्चों में हाथ से काम करने का हुनर, रचनात्मकता, मुश्किलों का हल निकालने की समझ और काम के प्रति अच्छा नजरिया भी बनना जरूरी है। इसी सोच के साथ लेंड अ हैंड इंडिया संस्था 'स्किल्स ऑन व्हील्स' नाम की अनोखी पहल चला रही है। यह पहल बच्चों को कौशल शिक्षा का सीधा अनुभव दिला रही है।
इस पहल का मकसद साफ है। एक पूरी तरह तैयार मोबाइल स्किल लैब स्कूलों तक जाती है और वहां बच्चों को अलग-अलग पेशेवर हुनर से रूबरू कराती है।
अब तक यह पहल भारत के 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों के 900 से ज्यादा स्कूलों तक पहुंच चुकी है। इसके जरिए छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों समेत कुल 5 लाख से ज्यादा हितधारकों तक कौशल शिक्षा को लेकर जागरूकता पहुंचाई गई है।
देश के कई स्कूलों में बच्चों को अलग-अलग पेशों, उद्योगों, तकनीक और असल काम का स्वरूप जानने के मौके कम ही मिलते हैं। भौगोलिक दूरी, संसाधनों की कमी और कौशल आधारित शिक्षा के लिए जरूरी सुविधाओं का न होना, इन वजहों से बहुत से बच्चे ऐसे तजुर्बों से दूर रह जाते हैं।
इसी खाई को भरने के लिए 'स्किल्स ऑन व्हील्स' का विचार तैयार किया गया। यह चलती-फिरती कौशल प्रयोगशाला जरूरी सामान, औजार और प्रदर्शन की सुविधाओं से लैस है। यह अलग-अलग स्कूलों, शैक्षणिक संस्थाओं और समुदायों तक जाती है। बच्चों को सिर्फ जानकारी देने की जगह यहां खुद करके देखने, सवाल पूछने, प्रयोग करने और नई चीजें सीखने का मौका मिलता है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में व्यावसायिक शिक्षा, अनुभव पर आधारित पढ़ाई और बच्चों के सर्वांगीण विकास को अहमियत दी गई है। बच्चों को छोटी उम्र से ही अलग-अलग पेशों की पहचान हो और पढ़ाई का रिश्ता असल जिंदगी से जुड़े, इस नजरिए से यह पहल अहम भूमिका निभाती है।
लेंड अ हैंड इंडिया संस्था शिक्षा और रोजी-रोटी के बीच की दूरी घटाने के लिए काम करती है। राज्य सरकारों को नीति, तकनीक और प्रबंधन के स्तर पर सहयोग देना संस्था के काम का अहम हिस्सा है।
'स्किल्स ऑन व्हील्स' के जरिए बच्चों को छह बड़े कौशल क्षेत्रों से परिचित कराया जाता है। पहला है खेती और बागवानी, जिसमें खेती, पौधों की देखभाल, खेती से जुड़े काम और टिकाऊ खेती की धारणाओं की जानकारी दी जाती है। दूसरा है मेकाट्रॉनिक्स, जिसमें यांत्रिक और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, उपकरणों और तकनीक वाले कामों की शुरुआती समझ मिलती है। तीसरा है स्वास्थ्य सेवा, जिसमें सेहत से जुड़ी सेवाओं और इस क्षेत्र के अलग-अलग हुनर का परिचय कराया जाता है।
चौथा क्षेत्र फैशन है, जहां फैशन डिजाइन, रचनात्मकता, बनावट और कपड़े बनाने से जुड़े हुनर बताए जाते हैं। पांचवां फाइनेंस है, जिसमें पैसों के लेन-देन, पैसे के प्रबंधन और वित्तीय क्षेत्र की बुनियादी बातें समझाई जाती हैं। छठा क्षेत्र कोडिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का है, जिसमें कंप्यूटर आधारित सोच, तकनीक, कोडिंग और आधुनिक डिजिटल हुनर की शुरुआती जानकारी दी जाती है।
इन क्षेत्रों के प्रदर्शनों से बच्चों को अपनी पसंद, अपनी क्षमता और आगे करियर की संभावनाएं समझने में मदद मिलती है। पारंपरिक पढ़ाई में अक्सर बच्चों को बातें पढ़कर या सुनकर समझनी पड़ती हैं, जबकि कौशल शिक्षा में खुद करने, देखने, प्रयोग और अनुभव को खास अहमियत मिलती है।
कौशल शिक्षा को असरदार ढंग से लागू करने के लिए सिर्फ बच्चों तक पहुंचना काफी नहीं होता। शिक्षकों, स्कूल प्रशासन, अभिभावकों, शिक्षा अधिकारियों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी जरूरी है। इसी नजरिए से यह पहल अलग-अलग हितधारकों में कौशल शिक्षा को लेकर जागरूकता पैदा करने का काम करती है। 5 लाख से ज्यादा हितधारकों तक पहुंचा यह सफर कौशल शिक्षा का संदेश बड़े स्तर पर फैलाने के लिहाज से अहम है।
अब तक 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों के 900 से ज्यादा स्कूलों तक पहुंच चुकी इस पहल के जरिए बच्चों को पेशेवर हुनर से रूबरू कराने और स्कूली पढ़ाई को ज्यादा अनुभव आधारित बनाने की कोशिश की जा रही है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।