कर्जत के सायडोंगर में पेड़ों की कटाई पर भड़के सयाजी शिंदे, पर्यावरण मंत्री पर साधा निशाना
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कर्जत के सायडोंगर में टोरंट प्रोजेक्ट के लिए हुई पेड़ कटाई को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। कर्जत के नागरिक, पर्यावरण प्रेमी और विपक्ष इस मुद्दे पर आक्रामक हैं और महायुति सरकार को घेर रहे हैं। अलग-अलग स्तर पर कटाई का विरोध जारी है। अभिनेता और पर्यावरण प्रेमी सयाजी शिंदे ने भी राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है।
शिंदे ने पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "हजारों पेड़ काटे जा रहे हैं, फिर भी पर्यावरण मंत्री चुप क्यों हैं? मंत्रियों को विभाग देते समय यह देखना जरूरी है कि उन्हें उस विभाग की समझ है या नहीं।"
"विकास के नाम पर हजारों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल रही हो, तो पर्यावरण की रक्षा कौन करेगा?" यह सवाल उठाते हुए शिंदे ने कर्जत की इस कटाई पर तीखी नाराजगी जताई। कर्जत तालुका के पालीतर्फे कोतवाल खलाटी में सायडोंगर इलाके की कटाई देखकर उनका गुस्सा काबू से बाहर हो गया। इस मौके पर कर्जत पर्यावरण बचाव समिति के समन्वयक एड. कैलास मोरे भी मौजूद थे।
शिंदे ने अफसोस जताया कि पेड़ कट जाते हैं, लेकिन उनकी मौत पर कोई शोकसभा नहीं करता। उन्होंने कहा कि ये पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं, इसलिए वे यहां पेड़ों को श्रद्धांजलि देने आए हैं। उन्होंने नागरिकों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की।
शिंदे का दावा है कि सायडोंगर इलाके के पुराने पेड़ों पर करीब 80 तरह के पक्षी रहते थे। पेड़ कटने से इन पक्षियों के ठिकाने का सवाल खड़ा हो गया है। उन्होंने नाराजगी जताई कि पक्षियों के प्रजनन के समय का भी ख्याल नहीं रखा गया।
उन्हें चिंता है कि पेड़ों पर टिकी जैव विविधता खत्म हुई, तो पक्षियों की खाद्य श्रृंखला पर भी असर पड़ सकता है। शिंदे के मुताबिक जंगल काटकर प्रोजेक्ट खड़ा करने से ज्यादा जरूरी पर्यावरण की रक्षा है।
शिंदे ने यह भी पूछा कि सरकार करोड़ों पेड़ लगाने का दावा करती है, तो वे पेड़ आखिर हैं कहां। उनका सवाल था कि जब सूरज की रोशनी और प्रकृति की ऊर्जा मुफ्त में मिल रही है, तब जंगलों को खत्म करके विकास करने की क्या जरूरत है। प्रोजेक्ट से प्रभावित होने के नाते उन्हें खुद चौकीदार की नौकरी करनी पड़ी थी, यह अनुभव बताते हुए उन्होंने रोजगार के वादों पर भी सवाल उठाया।
इस कटाई को लेकर राज्य में माहौल गरमाया हुआ है और महायुति के भीतर भी एकराय नहीं दिखती। शिंदे गुट के महेंद्र थोरवे और राष्ट्रवादी के अजित पवार गुट के सुधाकर घारे के बीच हुए विवाद से यह साफ हुआ।
महेंद्र थोरवे ने प्रोजेक्ट के पक्ष में रुख रखा है। उनका कहना है कि इससे स्थानीय लोगों के रोजगार का सवाल हल होगा। दूसरी तरफ राष्ट्रवादी के सुधाकर घारे ने पेड़ कटाई और प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए प्रोजेक्ट के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। ऐसे में शिंदे के सीधे राज्य सरकार और पर्यावरण मंत्री पर निशाना साधने से चर्चा और तेज हो गई है।
आखिर में शिंदे ने नागरिकों से भावुक अपील की कि राज्य में सूखे के हालात हैं और पेड़ कटाई का विरोध भी करना है, इसलिए इस साल दिवाली न मनाएं। सायडोंगर की पेड़ कटाई का मुद्दा अब पर्यावरण की बहस के साथ-साथ स्थानीय आंदोलन का भी विषय बन गया है।


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