थोरवे का दावा: अजित पवार के निधन के बाद तटकरे ने राष्ट्रवादी के विधायकों को फोन किए
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कर्जत के विधायक महेंद्र थोरवे ने सुनील तटकरे से विलय की बैठकों पर सवाल पूछा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अजित पवार के निधन के बाद तटकरे ने विधायकों को फोन किए।
राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर चर्चा में है। सांसद सुनील तटकरे ने अजित पवार के विलय को लेकर एक बयान दिया था। उसके बाद शिंदे गुट के विधायक महेंद्र थोरवे ने उन पर निशाना साधा और कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
तटकरे ने 6 नवंबर को दोनों राष्ट्रवादी पार्टियों के विलय पर अहम बात कही थी। उन्होंने बताया कि अजित पवार जिंदा होते तो 12 फरवरी को दोनों पार्टियों का विलय हो गया होता। तटकरे का यह भी दावा था कि अजित दादा ने उन्हें विलय की प्रक्रिया की जानकारी दी थी। उनके मुताबिक अजित पवार के निधन के बाद यह प्रक्रिया रुक गई। तटकरे ने साफ किया कि फिलहाल विलय को लेकर कोई बातचीत नहीं चल रही है।
कर्जत के विधायक थोरवे ने इसी बयान पर तटकरे से सीधा सवाल पूछा है। थोरवे का दावा है कि अजित पवार के रहते दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय के लिए पूरी 13 बैठकें हुई थीं। उन्होंने पूछा कि खुद को अजित दादा का भरोसेमंद साथी बताने वाले सुनील तटकरे इन बैठकों में शामिल क्यों नहीं थे।
थोरवे ने यह आरोप भी लगाया कि तटकरे के मौजूदा बयानों और उनकी पहले की भूमिका में तालमेल नहीं है।
थोरवे ने अजित पवार के निधन के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम पर भी बड़ा दावा किया। उनका आरोप है कि अजित दादा के निधन के बाद तटकरे ने राष्ट्रवादी के विधायकों को फोन करके उन्हें अपनी तरफ लाने की कोशिश की।
थोरवे के मुताबिक तटकरे उपमुख्यमंत्री का पद और वित्त विभाग चाहते थे। थोरवे का दावा है कि सुनेत्रा पवार की राजनीतिक भूमिका की वजह से तटकरे की यह कोशिश कामयाब नहीं हुई।
ये सारी बातें थोरवे के आरोप और दावे हैं। इन आरोपों पर तटकरे की प्रतिक्रिया क्या आती है, यह अहम होगा।
एक तरफ विलय की बातचीत होने का दावा है, तो दूसरी तरफ इस पर आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं कि उस वक्त असल में किसे क्या जानकारी थी। इसी वजह से दोनों राष्ट्रवादी गुटों के विलय का मुद्दा फिर गरमा गया है।
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