कर्जत के सायडोंगर में सयाजी शिंदे ने ग्रामीणों से कहा, प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीन मत दीजिए
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अभिनेता सयाजी शिंदे ने कर्जत के पाली सायडोंगर में ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि हायड्रॉलिक प्रोजेक्ट के लिए जमीन न दें, एकजुट रहें, वे साथ हैं।
अभिनेता और पर्यावरण प्रेमी सयाजी शिंदे ने कर्जत के पाली सायडोंगर के ग्रामीणों से अपील की है कि वहां बन रहे हायड्रॉलिक प्रोजेक्ट के लिए वे अपनी जमीन न दें। उन्होंने भरोसा जताया कि सब साथ रहेंगे तो बाकी वे देख लेंगे। यह बात उन्होंने सायडोंगर के शिव मंदिर में स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत करते हुए कही।
टोरंट प्रोजेक्ट के लिए हुई जंगलतोड़ के खिलाफ सयाजी शिंदे पिछले छह महीने से अपनी नाराजगी जताते आ रहे हैं। अब वे उस जगह पहुंचे हैं, जहां जंगलतोड़ चल रही है, यानी पाली तरफ कोतवाल खलाटी ग्राम पंचायत के सायडोंगर में। पाली कोतवाल खलाटी ग्राम पंचायत की ग्रामसवर्धन समिति ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम में कर्जत पर्यावरण बचाव समिति के एडवोकेट कैलास मोरे, सह्याद्री बचाव समिति के महेश भारती और पूर्व नगराध्यक्ष राजेश लाड मौजूद थे। बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी आए थे।
ग्रामीणों के सामने अपनी बात रखते हुए शिंदे ने अपने गांव की एक याद सुनाई। उन्होंने कहा कि वे खुद भी प्रोजेक्ट से प्रभावित परिवार से हैं। 40 साल पहले उनकी जमीन बांध के लिए ली गई थी। उसके बाद 30 साल तक उन्हें बदले में जमीन मिलने की बात चलती रही। कागज पर जमीन दे दी गई, लेकिन असल में आज तक नहीं मिली। इसी वजह से उन्होंने कहा कि एक छोटे से टुकड़े के लिए अपनी जान का टुकड़ा मत दीजिए।
शिंदे ने कहा कि अभी आपको 20 लाख रुपये मिलेंगे, पर आपकी जमीन करोड़ों की है। जमीन हमारी मां है, तो क्या आप अपनी मां को बेचेंगे, यह सवाल उन्होंने ग्रामीणों से पूछा। उनका कहना था कि बांध के लिए जगह देकर वे खुद झुलस चुके हैं, इसलिए अब ग्रामीणों को सावधान करने आए हैं। उन्होंने कहा कि आप जमीन मत दीजिए, इस प्रोजेक्ट को यहां से कैसे खदेड़ना है, यह हम देखेंगे। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ हैं।
शिव मंदिर में पर्यावरण प्रेमी रोहिदास लोभी स्वच्छता के दूत गाडगेबाबा का रूप धरकर पहुंचे थे। उन्होंने भारूड पेश किया और उसके जरिए जमीन न बेचने की बात कही। "पेड़ और बेलें हमारे सगे हैं, वन के जीव भी हमारे अपने हैं" जैसी कई मिसालें उन्होंने दीं। इस प्रोजेक्ट को यहां से हटाने का अपना संकल्प भी उन्होंने भारूड में सुनाया। भारूड के इस कार्यक्रम में सभी ग्रामीण ताली बजाकर शामिल हुए।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।