मांजरसुंबा घाट में प्रोपिलीन टैंकर का हादसा, गैस रिसाव के डर पर पुलिस ने विशेषज्ञों से ली सलाह
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रसायनी के मांजरसुंबा घाट में हादसे का शिकार हुए प्रोपिलीन टैंकर से गैस रिसने का खतरा था। पुलिस अधीक्षक रूपाली दरेकर ने हेल्प फाउंडेशन से सुरक्षा के उपाय पूछे।
रसायनी से खबर है कि मांजरसुंबा घाट के कोलवाडी इलाके में एक भीषण वाहन हादसा हुआ। घायलों की मदद तो करनी ही थी, लेकिन इसके साथ एक और बड़ा खतरा खड़ा हो गया था। हादसे में प्रोपिलीन गैस ढोने वाला टैंकर शामिल था और उससे गैस रिसने की गंभीर आशंका बन गई थी।
इस खतरे की गंभीरता को भांपते हुए हाईवे पुलिस अधीक्षक और छत्रपति संभाजीनगर की पुलिस अधीक्षक रूपाली दरेकर ने तथा पुलिस उपअधीक्षक समीर शेख ने खास सतर्कता दिखाई। उन्होंने फौरन जरूरी कदम उठाए।
प्रोपिलीन बेहद ज्वलनशील और खतरनाक गैस है। इसलिए हादसे का शिकार हुए टैंकर से रिसाव होता, तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। यही बात ध्यान में रखकर पुलिस अधीक्षक रूपाली दरेकर ने खालापुर की हेल्प फाउंडेशन के गुरुनाथ साठेलकर और रसायनी मोहोपाडा के धनंजय गीध से तुरंत संपर्क किया।
उन्होंने इन दोनों से जानना चाहा कि ऐसी खतरनाक गैस ढोने वाले टैंकर का हादसा हो जाए तो कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए। घटनास्थल पर मौजूद लोगों और बचाव दलों की सुरक्षा कैसे पक्की की जाए, और गैस रिसाव की हालत में कौन से रोकथाम के उपाय किए जाएं, इस पर भी उन्होंने विशेषज्ञ सलाह ली।
बातचीत में कई उपायों पर जोर दिया गया। टैंकर से सुरक्षित दूरी बनाए रखी जाए। घटनास्थल पर बेवजह भीड़ न जुटने दी जाए। आसपास के लोगों को खतरे वाले इलाके से दूर रखा जाए। जिन चीजों से आग या चिंगारी पैदा हो सकती है, उन पर काबू रखा जाए। जरूरत पड़ने पर फायर ब्रिगेड और आपदा प्रबंधन तंत्र की मदद ली जाए।
हेल्प फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने हालात की गंभीरता को समझते हुए सुरक्षित तरीके से टैंकर को संभालने और रोकथाम के उपायों के बारे में मार्गदर्शन दिया। पुलिस ने इन सुझावों पर गौर किया और घटनास्थल की स्थिति संभालते समय जरूरी एहतियात बरता।
इस घटना की खास बात यह रही कि हादसे के बाद पैदा हो सकने वाले दूसरे खतरे को पुलिस ने वक्त रहते पहचान लिया। वह सिर्फ हादसे के घायलों की मदद तक सीमित नहीं रही। गैस रिसाव से कहीं बड़ी दुर्घटना न हो जाए, इसे रोकने के लिए विशेषज्ञों की राय ली गई। पुलिस की सतर्कता और हेल्प फाउंडेशन के मार्गदर्शन का तालमेल इसमें अहम साबित हुआ। संकट के समय प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं के बीच ठीक तालमेल हो, तो बड़ी संभावित दुर्घटना का खतरा घटाने में जरूर मदद मिलती है, यह इस घटना से साफ हुआ।


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