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रविवार, 8 नवंबर 2026

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गोरेगांव-मुलुंड जोड़रोड: संजय गांधी उद्यान के नीचे दूसरी सुरंग की खुदाई शुरू

गोरेगांव-मुलुंड जोड़रोड: संजय गांधी उद्यान के नीचे दूसरी सुरंग की खुदाई शुरू तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

गोरेगांव-मुलुंड जोड़रोड प्रोजेक्ट में 'विहार' मशीन ने 7 नवंबर 2026 से दूसरी सुरंग की खुदाई शुरू कर दी है। पहली मशीन 'तुलशी' 270 मीटर से ज़्यादा खोद चुकी है।

मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों को जोड़ने वाले गोरेगांव-मुलुंड जोड़रोड (GMLR) प्रोजेक्ट का काम तेज़ हो गया है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान (SGNP) के नीचे बन रही जुड़वां सुरंगों में से पहली की खुदाई कर रही टनल बोरिंग मशीन (TBM) 'तुलशी' अब तक 270 मीटर से ज़्यादा खुदाई कर चुकी है। दूसरी मशीन 'विहार' ने शनिवार, 7 नवंबर 2026 से दूसरी सुरंग की खुदाई औपचारिक रूप से शुरू कर दी है।

GMLR बृहन्मुंबई महानगरपालिका क्षेत्र के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों को जोड़ने वाला 12.20 किलोमीटर लंबा बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है। इसे चार चरणों में बनाया जा रहा है। चरण 3 (ब) में गोरेगांव (पूर्व) की दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी से मुलुंड (पश्चिम) के अमर नगर के बीच, राष्ट्रीय उद्यान के नीचे, 5.34 किलोमीटर लंबी जुड़वां सुरंगें बन रही हैं। हर सुरंग में तीन लेन होंगी।

पहली मशीन का नाम 'तुलशी' और दूसरी का नाम 'विहार' रखा गया है। सारी तकनीकी प्रक्रिया और टेस्ट पूरे होने के बाद 'तुलशी' को सोमवार, 17 अगस्त 2026 को चालू किया गया था। तब से यह गोरेगांव से मुलुंड की तरफ 270 मीटर से ज़्यादा खुदाई कर चुकी है। इसकी औसत रफ्तार अभी रोज़ छह मीटर तक पहुंची है। काम की प्रगति के हिसाब से इसे धीरे-धीरे रोज़ 10 मीटर तक बढ़ाने की योजना है।

'विहार' का साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट हाल ही में कामयाबी से पूरा हुआ। इसमें मशीन के मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, हाइड्रॉलिक और कंट्रोल सिस्टम को तय तकनीकी मानकों पर परखा गया। खुदाई के लिए ज़रूरी सभी सिस्टम, उपकरणों और सुरक्षा व्यवस्था की कार्यक्षमता जांची गई। यह भी पक्का किया गया कि मशीन के अलग-अलग हिस्से काम की जगह पर अपेक्षित क्षमता से चल रहे हैं। इसके बाद 'विहार' को खुदाई के लिए तैयार घोषित किया गया।

'विहार' भी 'तुलशी' की तरह सिंगल शील्ड अर्थ प्रेशर बैलेंस (EPB) तकनीक पर चलती है। इसके कटर हेड का व्यास 14.49 मीटर और पूरी मशीन की लंबाई 83 मीटर है। इसमें 22 मीटर का शील्ड हिस्सा और तीन मंज़िला ढांचे वाला 61 मीटर लंबा बैकअप गैन्ट्री हिस्सा शामिल है। इस तकनीक से खुदाई के दौरान सुरंग के आगे की मिट्टी का दबाव काबू में रहता है, जिससे ज़मीन की स्थिरता बनी रहती है और खुदाई सुरक्षित और योजना के मुताबिक हो पाती है।

प्रोजेक्ट की हर भूमिगत सुरंग की कुल लंबाई 6675 मीटर है। इनमें से 5340 मीटर हिस्सा टनल बोरिंग तकनीक से खोदा जाएगा। बाकी 1335 मीटर में बॉक्स सुरंग, प्रवेश और निकास रैंप और शाफ्ट शामिल हैं। दोनों सुरंगों का भीतरी व्यास 13 मीटर है। हर सुरंग में तीन लेन होंगी, यानी कुल छह लेन (3+3) से गाड़ियां गुज़रेंगी। दोनों मशीनें गोरेगांव से खुदाई करते हुए मुलुंड पश्चिम के अमर नगर में बाहर निकलेंगी। इससे पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों के बीच सीधा भूमिगत रास्ता मिलेगा। पूरे प्रोजेक्ट को फरवरी 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।

मुलुंड में सुरंग के आखिरी चरण के लिए ज़रूरी रिट्रीवल शाफ्ट और रैंप के निर्माण में कुल 743 निर्माण प्रभावित हो रहे थे। इनमें से 612 प्रभावित निर्माण अब तक हटाए जा चुके हैं। बाकी 131 को दिसंबर 2026 के आखिर तक या जनवरी 2027 की शुरुआत तक हटाने की योजना है। इन निर्माणों से प्रभावित परिवारों (PAPs) को कांजुरमार्ग की पुनर्वास इमारतों में बसाया जाएगा। इन इमारतों का काम आखिरी चरण में है।

अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त (प्रोजेक्ट) अभिजीत बांगर ने कहा कि 'तुलशी' के साथ अब 'विहार' से भी दूसरी सुरंग की खुदाई शुरू होने से दोनों सुरंगों के काम को साथ-साथ रफ्तार मिलेगी। इससे प्रोजेक्ट को तय समय-सीमा में पूरा करने की दिशा में अहम प्रगति होगी। खुदाई में किसी भी तरह की देरी न हो, इसके लिए ज़रूरी उपाय तुरंत लागू करने के निर्देश संबंधित एजेंसियों को दिए गए हैं। काम की प्रगति, उपलब्ध मशीनरी, तकनीकी पहलुओं और मैनपावर की ज़रूरत की नियमित समीक्षा करके, ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त मैनपावर और तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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