सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

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जेलेंस्की बोले, मौजूदा युद्धरेखा पर रुकने को तैयार यूक्रेन, 75 फीसदी से ज्यादा इलाका रहेगा कब्जे में

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमिर जेलेंस्की ने कहा है कि वे मौजूदा अग्रिम पंक्ति पर ही युद्ध रोकने को तैयार हैं।

जेलेंस्की बोले, मौजूदा युद्धरेखा पर रुकने को तैयार यूक्रेन, 75 फीसदी से ज्यादा इलाका रहेगा कब्जे में तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

रूस और यूक्रेन के बीच जंग कई साल से चल रही है। अब इसे रोकने के लिए कूटनीतिक हलचल तेज होती दिख रही है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदीमिर जेलेंस्की ने युद्ध खत्म करने की दिशा में एक अहम बात कही है। उनका कहना है कि वे मौजूदा अग्रिम पंक्ति पर ही लड़ाई रोककर हालात जैसे हैं वैसे ही ठहराने को तैयार हैं।

जेलेंस्की ने अमेरिका के फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में यह बात कही। पत्रकार ने उनसे सीधा सवाल पूछा कि क्या वे ऐसा शांति समझौता मानेंगे, जिसमें मौजूदा स्थिति कायम रखकर जंग रोकी जाए और यूक्रेन के 75 फीसदी से ज्यादा इलाके पर उसका अपना नियंत्रण रहे। जेलेंस्की ने इसका जवाब हां में दिया। उन्होंने यह भी कहा कि हालात जैसे हैं वैसे ही रोक देना युद्ध खत्म करने का एक हकीकत भरा रास्ता है।

उन्होंने कहा कि जंग में दोनों देशों का नुकसान हुआ है। देश में सरकारी और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

इस व्यवस्था में यूक्रेन के पास देश के कुल इलाके का कम से कम 75 फीसदी या उससे ज्यादा हिस्सा रहेगा। उनके इस बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में और संभावित शांति समझौते की बातचीत में नई हलचल शुरू हो गई है। दोनों देशों की जनता शांति का इंतजार कर रही है, और जंग पूरी तरह रोकने के लिए अब दोनों देशों पर जनता का दबाव भी दिख रहा है।

रूस और यूक्रेन के बीच शांति कायम करने की कोशिशें अमेरिका की तरफ से जारी हैं। अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने नॉर्वे के ओस्लो में जेलेंस्की से बात की। इसके बाद वे रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिले और शांति प्रस्ताव से जुड़े कागजात उनके सामने रखे। इन बातचीत में युद्धविराम, सुरक्षा गारंटी और जंग के बाद के पुनर्निर्माण जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं।

जेलेंस्की ने जंग रोकने की तैयारी जरूर दिखाई है, लेकिन शांति समझौता हकीकत बनने के लिए रूस का रुख भी उतना ही मायने रखता है। यूक्रेन को ठोस सुरक्षा गारंटी चाहिए कि आगे रूस की तरफ से दोबारा हमला नहीं होगा। जो इलाके यूक्रेन के कब्जे में नहीं हैं, उन पर आखिरी हल अभी तक साफ नहीं हुआ है।

इसलिए मौजूदा युद्धरेखा पर जंग रोकने की तैयारी का मतलब यह नहीं है कि यूक्रेन रूस के कब्जे वाले इलाकों पर अपना कानूनी दावा छोड़ रहा है। अब अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच अगली बातचीत से क्या निकलता है, इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और पूरी दुनिया की नजर है।

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