यूक्रेन का दावा: ड्रोन हमलों से रूस की 51 फीसदी तेल रिफाइनिंग क्षमता ठप
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय का कहना है कि हालिया ड्रोन और लंबी दूरी के हमलों से रूस की तेल रिफाइनिंग क्षमता का 51 प्रतिशत हिस्सा बंद पड़ा है। इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रूस और यूक्रेन की जंग को साढ़े चार साल से ज्यादा हो चुके हैं। इसी बीच यूक्रेन ने रूस के एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लंबी दूरी के हमले और तेज कर दिए हैं। उधर मध्य पूर्व में ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच जंग चल रही है, और सऊदी अरब और यमन के हूती के बीच एक और लड़ाई शुरू हो गई है।
यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि हाल के ड्रोन और लंबी दूरी के हमलों की वजह से रूस की तेल रिफाइनिंग क्षमता का पूरे 51 प्रतिशत हिस्सा ठप हो गया है। यूक्रेन का कहना है कि इससे रूसी सेना को ईंधन और फौजी सामान पहुंचाने की मॉस्को की क्षमता पर दबाव बढ़ा है। इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
यूक्रेन ने रूस की कई अहम रिफाइनरियों पर हमले किए हैं। यूक्रेन के मुताबिक मॉस्को, यारोस्लाव्हल, उस्त-लुगा, पर्म, सारातोव्ह और सीझरान जैसे इलाकों की एनर्जी सुविधाओं को निशाना बनाया गया। यह भी सामने आया है कि कुछ रिफायनरियों पर जंग शुरू होने के बाद से कई बार हमले हो चुके हैं। बार-बार हो रहे हमलों, इमरजेंसी मरम्मत और मेंटेनेंस में देरी की वजह से रूस के तेल उद्योग पर लंबे समय तक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
इन हमलों से रूस में ईंधन सप्लाई की समस्या गंभीर हो गई है। मिली जानकारी के मुताबिक रूस में डीजल का उत्पादन करीब 30 प्रतिशत घट गया है और कुछ इलाकों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं। हालात संभालने के लिए रूस ने डीजल के निर्यात पर पाबंदियां भी जारी रखी हैं। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी माना है कि इन हमलों का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा है कि देश की GDP पर इसका असर करीब 1 प्रतिशत है।
यूक्रेन के मुताबिक तेल रिफाइनरियों पर हमलों का मकसद सिर्फ रूस की अर्थव्यवस्था को झटका देना नहीं है। मकसद रूसी सेना को मिलने वाले ईंधन की सप्लाई पर भी असर डालना है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि 2026 में यूक्रेन ने लंबी दूरी के ड्रोन का उत्पादन काफी बढ़ाया है।
दूसरी तरफ रूस की ओर से भी यूक्रेन के एनर्जी और औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी हैं। इस तरह जंग अब सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रही। वह एनर्जी और ईंधन के इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच गई है।