मालदीव ने समुद्र में डुबोए दो रिटायर विमान, बनाया दुनिया का पहला 'प्लेन रेक' टूरिस्ट स्पॉट
मालदीव ने कुडागिरी पिकनिक आइलैंड के पास दो रिटायर डॉर्नियर 228 विमान समुद्र में उतारे हैं। इनसे कृत्रिम प्रवाल भित्ती और पर्यटन केंद्र बनाया जा रहा है।
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दुनिया भर के पर्यटकों की पसंदीदा जगह मालदीव ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। नीले समुद्र और खूबसूरत द्वीपों के लिए मशहूर इस देश ने अब समुद्र की तलहटी में कुछ नया कर दिखाया है। मालदीव की पहली राष्ट्रीय एयरलाइन 'एयर मालदीव' की सेवा में रह चुके दो रिटायर डॉर्नियर 228 (Dornier 228) विमान हिंद महासागर के गहरे पानी में डुबो दिए गए हैं। इसका मुख्य मकसद समुद्र के नीचे एक कृत्रिम प्रवाल भित्ती (Artificial Coral Reef) और पर्यटन केंद्र तैयार करना है।
इस प्रोजेक्ट का नाम 'कुडागिरी धुनियार रेक प्रोजेक्ट' (Kudagiri Dhuniyaar Wreck Project) रखा गया है। यह कुडागिरी पिकनिक आइलैंड के पास की खाड़ी में बनाया गया है। नाम भी खास है। स्थानीय दिवेही भाषा में 'धुनी' का मतलब 'पक्षी' है और डॉर्नियर विमान के नाम से 'यार' शब्द लिया गया, इस तरह 'धुनियार' (Dhuniyaar) नाम तय हुआ। आसमान में उड़ने वाले ये लोहे के 'पक्षी' अब समुद्र की शांत तलहटी में बैठ गए हैं और समुद्री जीवों के लिए नया घर बन रहे हैं।
ये दोनों डॉर्नियर 228 विमान कभी मालदीव की हवाई आवाजाही की रीढ़ माने जाते थे। उन्होंने साल 2000 तक सरकारी एयरलाइन में कामयाब उड़ानें भरी थीं। डॉर्नियर 228 दो इंजन वाला खास विमान है, जो बहुत छोटे रनवे से उड़ान भर सकता है और उतर भी सकता है (STOL)। मालदीव जैसे छोटे-छोटे द्वीपों के देश में, जहां रनवे की लंबाई सीमित होती है, वहां यह 19 सीटों वाला विमान मुसाफिरों की आवाजाही, माल ढुलाई और इमरजेंसी मिशनों के लिए बहुत काम का साबित हुआ था।
सेवा से हटने के बाद ये विमान Hulhule एयरपोर्ट पर खड़े थे। उन्हें कबाड़ में बेचने के बजाय मालदीव सरकार ने समुद्री पर्यावरण की हिफाजत और पर्यटन को नई दिशा देने के लिए उनका दोबारा इस्तेमाल करने का फैसला किया।
इतने बड़े विमान को समुद्र में सुरक्षित तरीके से टिकाना आसान काम नहीं था। यह प्रोजेक्ट मालदीव हाउसिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (HDC), मालदीव मार्केटिंग एंड पब्लिक रिलेशंस कॉर्पोरेशन (MMPRC) और मालदीव ट्रांसपोर्ट एंड कॉन्ट्रैक्टिंग कंपनी (MTCC) ने मिलकर पूरा किया। विमानों को बार्ज की मदद से खाड़ी में लाया गया और बड़ी क्रेन से समुद्र की करीब 12 मीटर (39 फीट) गहराई में धीरे-धीरे उतारा गया।
समुद्र के तेज बहाव में विमान पलट न जाएं या अपनी जगह से न हट जाएं, इसके लिए विमान के बाहरी ढांचे और पंखों पर खास तरह के भारी वजन लगाए गए हैं। पानी में उतारने से पहले विमानों से ईंधन, तेल और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले सारे खतरनाक केमिकल पूरी तरह साफ कर दिए गए थे, ताकि समुद्री पर्यावरण को कोई नुकसान न हो।
संरक्षण टीमों ने कोशिश की है कि इन विमानों के ढांचे पर प्रवाल उगें। अंतरराष्ट्रीय मीडिया के प्रतिनिधियों और समुद्री विशेषज्ञों ने प्रवाल के जीवित टुकड़े खास फ्रेमों से जोड़कर विमान के ढांचे और उसके आसपास सुरक्षित तरीके से लगाए हैं। वक्त के साथ इन विमानों पर प्रवाल का जाल बन जाएगा और तरह-तरह की प्रजातियों की रंगीन मछलियां, कछुए और दूसरे समुद्री जीव यहां अपना ठिकाना बनाएंगे।
यह जगह सिर्फ 12 मीटर की गहराई पर है। इसलिए सिर्फ प्रोफेशनल स्कूबा डाइवर ही नहीं, स्नॉर्कलर और फ्री-डाइवर भी समुद्र की सतह से इन विमानों का नजारा देख सकेंगे। मालदीव के साफ नीले पानी में तैरते हुए तलहटी में पड़ा विमान और उसके चारों ओर घूमती रंगीन मछलियां देखना दुनिया भर के सैलानियों के लिए यादगार अनुभव होगा। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ समुद्री जीवन को फिर से जिंदा करने वाला यह प्रोजेक्ट पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बताया जा रहा है।
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