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किम यो जोंग की चेतावनी: सीमा में दखल दिया तो दक्षिण कोरिया को भुगतना पड़ेगा भयानक अंजाम

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने दक्षिण कोरिया को सीमा की तटबंदी और अंदरूनी मामलों में दखल पर सख्त चेतावनी दी है।

किम यो जोंग की चेतावनी: सीमा में दखल दिया तो दक्षिण कोरिया को भुगतना पड़ेगा भयानक अंजाम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

पूर्व एशिया में हालात एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गए हैं। उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया का पुराना झगड़ा फिर भड़कता दिख रहा है। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की बहन और देश की बेहद असरदार वरिष्ठ अधिकारी किम यो जोंग ने दक्षिण कोरिया को सीधी और सख्त चेतावनी दी है। इससे दोनों देशों के बीच फौजी तनाव बहुत नाजुक दौर में पहुंच गया है।

किम यो जोंग ने कहा कि अगर दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के अंदरूनी कामों में या सीमा की तटबंदी में कोई दखल देने की कोशिश की, तो उसे "भयानक और दर्दनाक" हालात का सामना करना पड़ेगा। इस सख्त रुख की वजह से पूरी दुनिया की नजर अब इस इलाके पर टिक गई है।

किम यो जोंग ने हाल ही में उत्तर कोरिया के बड़े फौजी अफसरों के साथ दोनों देशों को अलग करने वाली हथियारबंद सीमा और सुरक्षा जांच चौकियों का दौरा किया। वहां चल रहे फौजी निर्माण और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया गया। मुआयने के बाद उन्होंने साफ किया कि उत्तर कोरिया जल्द ही अपनी पूरी सीमा पर विशाल लाउडस्पीकर लगाएगा, जिनसे दक्षिण कोरिया के खिलाफ प्रचार और संदेश प्रसारित किए जाएंगे। किम जोंग उन दक्षिण कोरिया को पहले ही अपना "सबसे बड़ा दुश्मन" घोषित कर चुके हैं। अब उनकी बहन की ताजा चेतावनी से प्योंगयांग का आक्रामक इरादा साफ दिख रहा है।

दोनों कोरियाई देशों की सीमा पर इस वक्त हालात बहुत नाजुक हैं। उत्तर कोरिया की फौज सीमा पर तेजी से नई टुकड़ियां तैनात कर रही है और स्थायी तटबंदी व बाड़ खड़ी करने का काम चल रहा है। इसी बीच दक्षिण कोरिया के सैनिक सीमा के कई हिस्सों से चेतावनी वाले लाउडस्पीकर प्रसारण कर रहे हैं। यह भी सामने आया है कि वे उत्तर कोरियाई सैनिकों को रोकने के लिए इशारे के तौर पर हवा में गोलीबारी कर रहे हैं।

इस पर कड़े शब्दों में नाराजगी जताते हुए किम यो जोंग ने कहा कि दक्षिण कोरिया की भड़काने वाली हरकतों और अंदरूनी मामलों में दखल से सीमा पर अस्थिरता पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर सेऊल ने अपने सैनिकों की इन हरकतों पर फौरन रोक नहीं लगाई, तो उत्तर कोरिया की तरफ से बेहद कड़ा और हथियारबंद जवाब दिया जाएगा। उत्तर कोरिया ने साफ किया है कि वह दक्षिण कोरिया के साथ लगी इस सीमा को अब सिर्फ एक अस्थायी लकीर नहीं रहने देगा, बल्कि उसे स्थायी और अभेद्य फौजी सीमा के तौर पर कायम करेगा।

1950 से 1953 के बीच हुई कोरियाई जंग के बाद दोनों देशों में कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं हुआ था। सिर्फ एक युद्धविराम समझौता (Armistice Agreement) हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच डीएमझेड (Demilitarized Zone, DMZ) बनाया गया था। फिर भी हकीकत में इसे दुनिया की सबसे ज्यादा हथियारबंद और पहरे वाली सीमा माना जाता है।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने पद संभालने के बाद से उत्तर कोरिया के साथ पुरानी दुश्मनी घटाने और बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिशें शुरू की थीं। लेकिन किम प्रशासन की ताजा कार्रवाइयों और धमकियों से शांति कायम करने की इन तमाम कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। पिछले कुछ महीनों में उत्तर कोरिया ने अपनी तरफ हजारों नई बारूदी सुरंगें बिछाई हैं, बाड़ लगाई है और सड़कें बंद की हैं। इससे दोनों देशों के रिश्ते एक बार फिर जंग की दहलीज पर आ पहुंचे हैं।

सीमा पर इस टकराव की असली चिंगारी पिछले महीने भड़की, जब सीमा के पास एक रहस्यमय बारूदी सुरंग धमाके में दक्षिण कोरिया के दो सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गए। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने फौरन जांच कर प्योंगयांग पर आरोप लगाया कि उत्तर कोरिया के सैनिकों ने गैरकानूनी तरीके से सीमा पार करके या समझौते का उल्लंघन करके वहां नई बारूदी सुरंगें बिछाई थीं।

उत्तर कोरिया ने ये सारे आरोप खारिज कर दिए हैं और इसे दक्षिण कोरिया की साजिश बताया है। लेकिन दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को आधिकारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि यह धमाका उत्तर कोरिया की बारूदी सुरंगों से ही हुआ और इससे 1953 के युद्धविराम समझौते का सीधा उल्लंघन हुआ है। इसलिए सेऊल अब पूरा मामला संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद (UN Security Council) में ले जाएगा। दक्षिण कोरिया संयुक्त राष्ट्र को चिट्ठी भेजकर उत्तर कोरिया की इस हरकत की कड़ी निंदा दर्ज कराएगा, प्योंगयांग से आधिकारिक माफी की मांग करेगा और इलाके में तनाव न बढ़े, इसके लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव की मांग करेगा।

उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता यह तनाव सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं रहा। माना जाता है कि उत्तर कोरिया को रूस और चीन का अप्रत्यक्ष समर्थन है, जबकि दक्षिण कोरिया के पीछे अमेरिका मजबूती से खड़ा है। किम यो जोंग को वॉशिंगटन और सेऊल के मामले में उत्तर कोरिया की प्रमुख नीति तय करने वाली माना जाता है। इसलिए उनकी इस धमकी को अमेरिका के लिए भी अप्रत्यक्ष चुनौती माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों ने आशंका जताई है कि अगर इस सीमा पर अचानक कोई छोटी फौजी झड़प या गलत कदम हो गया, तो वह बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। उत्तर कोरिया के इस आक्रामक रुख से आने वाले दिनों में एशिया-पैसिफिक इलाके की सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा पेचीदा और चिंताजनक होने की बात साफ दिख रही है।

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