रूस से 4.8 मिलियन टन डीजल खरीदेगा अमेरिका, भारत को दी थी 100% टैरिफ की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने की घोषणा की है, जबकि भारत समेत पांच देशों को रूसी तेल पर 100% टैरिफ की धमकी दी गई थी।
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दुनिया भर में समीकरण बदलते दिख रहे हैं। संघर्ष के दौर के बाद अब कौन किस भूमिका में है, यह बड़ा सवाल बन गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से बड़े पैमाने पर डीजल खरीदने की घोषणा की है, और इस ऐलान से पूरी दुनिया में हलचल मच गई है।
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के पहले पांच देशों को धमकी दी है। उसका कहना है कि अगर इन देशों ने रूस से तेल खरीदा तो अमेरिका उन पर 100% टैरिफ लगाएगा। दूसरी तरफ खुद अमेरिका यहां बिल्कुल अलग भूमिका में नजर आ रहा है। अमेरिका ने 'रूस और ईरान पर प्रतिबंध कानून SRIA 2026' को भी मंजूरी दे दी है।
अब सवाल उठता है कि यह कैसा दोहरापन है। एक तरफ वह दूसरे देशों को रूस से तेल खरीदने से रोक रहा है, और दूसरी तरफ वही काम खुद कर रहा है। आखिर दुनिया की राजनीति में चल क्या रहा है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुए करार के मुताबिक अमेरिका रूस से कुल 4.8 मिलियन टन डीजल खरीदेगा। यह अंदाजन 36 मिलियन बैरल के बराबर है। इसमें से 300,000 टन से ज्यादा डीजल की सप्लाई फौरन की जाएगी। अगले महीने यानी नवंबर में 500,000 टन और भेजा जाएगा। उसके बाद 1 मिलियन टन डीजल और भेजा जाएगा। ट्रम्प के मुताबिक, अगर सब कुछ ठीक से निपटा तो रूस 3 मिलियन टन डीजल की सप्लाई कर सकेगा।
तो अमेरिका ऐसा दोहरा रुख क्यों अपना रहा है? नवंबर 2026 में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने हैं और डीजल की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं। फिलहाल ये प्रति गैलन 6.28 डॉलर की ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। प्यू रिसर्च के मुताबिक इस वक्त 84% अमेरिकी मतदाताओं के लिए अर्थव्यवस्था सबसे अहम मुद्दा है।
किसान, ट्रक ड्राइवर और छोटे कारोबारी, यानी अमेरिका का हर आदमी महंगाई को लेकर बड़ी चिंता में है। ये लोग ट्रम्प के वोट बैंक का एक अहम हिस्सा हैं। ऐसे में कहीं न कहीं ट्रम्प प्रशासन चुनाव में अपनी जीत पक्की करने के लिए यह कदम उठा रहा है।
इस रुख से ट्रम्प को आखिर कितना फायदा मिलता है, यह देखना होगा। भारत समेत बाकी देश इसका क्या मतलब निकालते हैं और क्या रुख रखते हैं, यह भी अहम रहेगा।