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03:11 IST

यूक्रेन में सैन्य अभ्यास के दौरान स्टारलिंक की स्पीड घटी, पोलैंड ने मस्क को घेरा

यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक 13 और 14 अक्टूबर की रात स्टारलिंक की स्पीड अचानक गिरा दी गई। पोलैंड के विदेश मंत्री ने इलॉन मस्क पर सीधा सवाल उठाया है।

यूक्रेन में सैन्य अभ्यास के दौरान स्टारलिंक की स्पीड घटी, पोलैंड ने मस्क को घेरा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

अरबपति उद्योगपति इलॉन मस्क और उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक इस वक्त एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद में फंस गई है। कुछ दिन पहले ही भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के मुद्दे पर मस्क ने केंद्र सरकार और रिलायंस ग्रुप पर गंभीर आरोप लगाकर हंगामा खड़ा कर दिया था। अब खुद मस्क और उनकी कंपनी स्पेसएक्स एक नए संकट में हैं।

यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों की जानकारी के मुताबिक, 13 और 14 अक्टूबर की दरम्यानी रात यूक्रेनी सेना एक अहम सैन्य अभ्यास कर रही थी। उसी दौरान स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड अचानक बहुत ज्यादा घटा दी गई। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के तकनीकी सलाहकार सर्गेई बेस्क्रेस्नोव ने इस पर तीखी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि कंपनी ने इस बदलाव के बारे में यूक्रेन को कोई पूर्व सूचना नहीं दी थी।

स्पीड घटने का सबसे बड़ा असर मध्यम दूरी तक हमला करने वाले ड्रोन के कंट्रोल, इंटरसेप्टर सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स की सप्लाई और सीधी निगरानी करने वाले सिस्टम पर पड़ा। जंग के मैदान में संपर्क टूटने से यूक्रेनी सेना को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता था।

इस घटना के बाद सिर्फ यूक्रेन ही नहीं, यूरोप में उसका प्रमुख साथी देश पोलैंड भी काफी सख्त हो गया है। पोलैंड के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने सोशल मीडिया पर सीधे इलॉन मस्क को निशाना बनाया। सिकोरस्की ने पूछा कि क्या मस्क एक बार फिर अपने प्रोडक्ट और तकनीक का राजनीतिकरण कर रहे हैं। उन्होंने यह भी चेताया कि यूरोप के सभी देश और अंतरराष्ट्रीय ग्राहक इन घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

यहां यह जानना जरूरी है कि जंग की शुरुआत से यूक्रेन जो स्टारलिंक इंटरनेट सब्सक्रिप्शन इस्तेमाल कर रहा है, उसका बिल पोलैंड सरकार भरती आ रही है। इसलिए पोलैंड के विदेश मंत्री की चिंता को काफी वाजिब और गंभीर माना जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि अगर किसी देश की पूरी सैन्य संचार व्यवस्था एक विदेशी निजी कंपनी पर टिकी हो, तो आपातकाल और जंग में वह कंपनी कितनी भरोसेमंद रहेगी। अगर सर्विस की शर्तों में अचानक बदलाव करके एक क्लिक पर इंटरनेट बंद या धीमा किया जा सकता है, तो क्या देश की संप्रभुता और सुरक्षा को बड़ा खतरा नहीं है, यह सवाल गुस्से के साथ पूछा जा रहा है।

इस विवाद के बाद इलॉन मस्क की तरफ से भी सफाई आई है। मस्क के दावे के मुताबिक, सैन्य इस्तेमाल के लिए बनाए गए खास सैटेलाइट नेटवर्क स्टारशील्ड पर सीधा अमेरिकी सरकार का कंट्रोल रहता है। मस्क का दावा है कि इंटरनेट की स्पीड घटाने या इस्तेमाल की सीमा तय करने के फैसले अमेरिकी सेना लेती है। इसके लिए उन्होंने सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि ये पाबंदियां किसने, क्यों और किन हालात में लगाईं, इस पर अमेरिकी प्रशासन या पेंटागन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी नहीं हुआ है।

दूसरी तरफ मस्क के समर्थन में भी कुछ दलीलें सामने आ रही हैं। समर्थकों का कहना है कि स्पेसएक्स एक निजी कारोबारी कंपनी है और यूक्रेन की हर सैन्य मांग या आक्रामक नीति मानने के लिए कानूनन बाध्य नहीं है। उनके मुताबिक जंग की शुरुआत के बेहद मुश्किल दौर में, जब रूस ने यूक्रेन के सारे पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क पर हमले करके उन्हें तबाह कर दिया था, तब स्टारलिंक ने ही यूक्रेन को मुफ्त इंटरनेट देकर संपर्क व्यवस्था जिंदा रखी थी। इसलिए अपनी तकनीक का जंग में इस्तेमाल कैसे हो, इस पर सीमा तय करने का हक कंपनी को है, ऐसी दलील भी दी जा रही है।

अब यह मुद्दा सिर्फ मस्क और यूक्रेन तक सीमित नहीं रहा। इससे यूरोपीय यूनियन और दूसरे विकासशील देशों की तकनीकी आत्मनिर्भरता पर भी बड़ा सवालिया निशान लग गया है। जानकारों का अंदाजा है कि यूरोपीय देश अपना अलग सैटेलाइट नेटवर्क बनाने की दिशा में तेजी से कदम उठा सकते हैं। भारत और दूसरे देशों में भी सैटेलाइट इंटरनेट को मंजूरी देते समय सुरक्षा और स्थानीय नियंत्रण के नियम कितने सख्त होने चाहिए, इस पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है।

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