गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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इस्राइल चुनाव में किसी को बहुमत नहीं, अरब पार्टियां बन सकती हैं सरकार की चाबी

इस्राइल चुनाव में किसी को बहुमत नहीं, अरब पार्टियां बन सकती हैं सरकार की चाबी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

इस्राइल के आम चुनाव में न नेतन्याहू का गठबंधन और न विपक्ष 61 के आंकड़े तक पहुंचा। अरब पार्टियों को 19 सीटें मिलने का अनुमान है।

इस्राइल में हाल ही में हुए आम चुनाव के नतीजों से देश की राजनीति में हलचल मच गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दक्षिणपंथी गठबंधन हो या विपक्ष, दोनों में से कोई भी इस्राइली संसद (क्नेसेट) में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 के बहुमत तक नहीं पहुंच सका। इस त्रिशंकू हालात में अरब बहुल पार्टियों की भूमिका बहुत अहम हो गई है और वे आने वाली सरकार के 'किंगमेकर' के तौर पर सामने आई हैं।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि विपक्षी पार्टियों के गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं। लेकिन पूरे चुनाव की तस्वीर अरब पार्टियों के दमदार प्रदर्शन ने बदल दी। 'जॉइंट लिस्ट' और 'रा'आम पार्टी' मिलाकर 19 सीटें जीत सकती हैं, ऐसा अनुमान जताया जा रहा है। 120 सदस्यों वाली इस्राइली संसद में अरब पार्टियों का यह अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है।

इस कामयाबी की बड़ी वजह अरब मतदाताओं की भारी भागीदारी रही। इस चुनाव में वोटिंग का प्रतिशत करीब 77.7 फीसदी तक पहुंचा, जो 1999 के बाद सबसे ऊंचा है। कुछ खास अरब बहुल शहरों में तो यह आंकड़ा 85 फीसदी के आसपास रहा।

मौजूदा सरकार और उसकी दक्षिणपंथी नीतियों को लेकर अरब समाज में गहरी नाराजगी थी। संगठित अपराध, रहने के लिए घरों की भारी कमी, सामाजिक भेदभाव और सरकारी फंड की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से यह समुदाय सालों से जूझ रहा है। इसी अनदेखी और बदलाव की चाहत में अरब नागरिक बड़ी तादाद में वोट डालने पहुंचे, जिसका सीधा फायदा अरब पार्टियों को मिला।

अरब पार्टियां नेतन्याहू को सत्ता से दूर रखने में अहम ताकत बन सकती हैं, फिर भी यह रास्ता आसान नहीं है। जॉइंट लिस्ट और रा'आम पार्टी की सियासी रणनीति अलग-अलग है। जॉइंट लिस्ट आम तौर पर यहूदियों की अगुवाई वाली सरकारों में सीधे शामिल होने से बचती रही है। हालांकि नेतन्याहू को हटाने के लिए वह संसद में बाहर से समर्थन देने को तैयार हो सकती है।

दूसरी तरफ मंसूर अब्बास की अगुवाई वाली 'रा'आम पार्टी' इससे पहले गठबंधन सरकार में शामिल होकर ऐतिहासिक कदम उठा चुकी है। अब्बास ने संकेत दिए हैं कि अगर विपक्षी गठबंधन उनकी मांगें मान ले, तो वे सरकार में शामिल होने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन विपक्षी नेताओं के सामने भी अंदरूनी सियासी दिक्कतें हैं। कुछ यहूदी विपक्षी नेता अरब पार्टियों के साथ काम करने के सख्त खिलाफ हैं, जिससे गठबंधन बनाना कांटों भरा ताज जैसा हो गया है।

अब इस्राइल के राष्ट्रपति सभी पार्टियों के नेताओं से बातचीत करके किसी एक प्रमुख नेता को सरकार बनाने के लिए 28 दिन की मोहलत देंगे। अगर वह पहला नेता नाकाम रहा, तो दूसरे नेता को मौका दिया जाएगा। मौजूदा हालात में सरकार बनने के तीन रास्ते हैं। पहला, विपक्ष और अरब पार्टियों को जोड़कर सरकार बनाना। दूसरा, राष्ट्रीय एकता सरकार का गठन। तीसरा, बातचीत नाकाम होने पर दोबारा चुनाव कराना। हालात को देखते हुए इस्राइल की आगे की राजनीति और प्रधानमंत्री पद का भविष्य अरब पार्टियों के रुख पर ही टिका रहेगा।

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