ब्राझील में कल दूसरे दौर का मतदान, आखिरी बहस में लुला और बोल्सोनारो आमने-सामने
ब्राझील के राष्ट्रपति चुनाव का दूसरा दौर रविवार, 25 अक्टूबर को होगा। शुक्रवार की आखिरी टीवी बहस में महंगाई और भ्रष्टाचार पर दोनों उम्मीदवारों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।
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ब्राझील के राष्ट्रपति चुनाव की लड़ाई अब आखिरी मोड़ पर पहुंच गई है। मौजूदा राष्ट्रपति लुईझ इनासिओ लुला दा सिल्वा और दक्षिणपंथी सोच वाले उम्मीदवार फ्लाविओ बोल्सोनारो के बीच दूसरे दौर का मतदान रविवार, 25 अक्टूबर को होने जा रहा है।
इससे ठीक पहले शुक्रवार को दोनों नेता आखिरी टीवी बहस में आमने-सामने आए। यहां दोनों ने एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाए। बहस के केंद्र में महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और देश में बढ़ता क्राइम जैसे मुद्दे रहे। पहले दौर के नतीजे बेहद करीबी रहे थे, इसलिए अब पूरी दुनिया की नजर इस पर है कि ब्राझील की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।
पहले दौर की वोटिंग 4 अक्टूबर को हुई थी। उसमें फ्लाविओ बोल्सोनारो ने 47 फीसदी वोट लेकर बढ़त बनाई थी। मौजूदा राष्ट्रपति लुला दा सिल्वा को करीब 45 फीसदी वोट मिले। लेकिन किसी भी उम्मीदवार को 50 फीसदी से ज्यादा वोट नहीं मिले, इसलिए चुनाव दूसरे दौर में चला गया। रविवार को होने वाली वोटिंग में करीब 16 करोड़ मतदाता अपना वोट डालेंगे।
आखिरी बहस में लुला ने अपनी सरकार की सामाजिक योजनाओं का बचाव किया। उन्होंने गरीबी घटाने की कोशिशों की बात की और न्यूनतम वेतन में की गई बढ़ोतरी का जिक्र किया। साथ ही जरूरतमंद लोगों के लिए चलाई गई योजनाओं को भी गिनाया।
दूसरी तरफ बोल्सोनारो ने अनाज और खाने-पीने की चीजों के बढ़ते दामों और टैक्स व्यवस्था को लेकर लुला सरकार को निशाने पर लिया।
दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप भी लगाए। बहस के दौरान बात निजी हमलों तक पहुंच गई। बोल्सोनारो ने लुला को लेकर एक आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके लिए उन्होंने बाद में माफी मांगी।
इस चुनाव का असर सिर्फ ब्राझील तक सीमित नहीं रहेगा। तस्वीर यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थन बोल्सोनारो के राजनीतिक गुट को है। अगर बोल्सोनारो जीतते हैं तो वॉशिंगटन के साथ ब्राझील के रिश्ते और करीबी हो सकते हैं।
वहीं लुला दोबारा सत्ता में आते हैं तो चीन समेत दूसरे देशों के साथ मौजूदा रिश्ते बनाए रखने पर जोर रह सकता है। यानी रविवार का नतीजा ब्राझील की विदेश नीति की दिशा भी तय कर सकता है। आर्थिक स्थिरता, महंगाई पर काबू और क्राइम पर लगाम की उम्मीद रखने वाले मतदाता किसे चुनते हैं, यही देखना अहम होगा।
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