मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:46 IST

नेतन्याहू के भाषण के बीच UN में कई देशों के प्रतिनिधि सभागार से बाहर निकले

गाझा और ईरान पर इस्राइल की कार्रवाई को लेकर विरोध के बीच नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दिया, वॉकआउट पर पलटवार करते हुए जाने वालों को मॉरल कावर्ड्स बताया।

गाझा पर हमले, तबाह हो चुके गाझा और ईरान, लेबनॉन पर हुई कार्रवाइयों की वजह से इस्राइल इन दिनों दुनियाभर की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई देशों ने इस पर विरोध जताया है तो कई देश इस्राइल के साथ भी खड़े दिखे हैं। इसी बीच गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा को संबोधित करने के लिए मंच पर पहुंचे।

लेकिन उनका भाषण शुरू होते ही सभागार में मौजूद दर्जनभर देशों के प्रतिनिधियों ने वहां से निकलकर अपना विरोध जता दिया। इस घटना की वजह से नेतन्याहू के भाषण की शुरुआत ही एक बड़े राजनयिक हंगामे के साथ हुई। कहा जा रहा है कि इससे दुनिया की राजनीति में इस्राइल की काफी किरकिरी हुई। हालांकि इस सबसे नेतन्याहू पर कितना असर पड़ता है, यह भी एक अहम सवाल है।

जैसे ही नेतन्याहू भाषण के लिए मंच पर पहुंचे, कई देशों के प्रतिनिधियों ने अपनी-अपनी सीटें छोड़ दीं और सभागार से बाहर निकलने लगे। इससे पहले भी फिलिस्तीनी मिशन ने संयुक्त राष्ट्र के अलग-अलग सदस्य देशों के प्रतिनिधियों से सामूहिक वॉकआउट की अपील की थी।

बेगुनाह लोगों को मारे जाने को लेकर गुस्सा और नेतन्याहू के प्रति विरोध जताते हुए भाषण की शुरुआत में ही सभागार की कई सीटें खाली हो गईं। इस दौरान नेतन्याहू के कुछ समर्थक तालियां बजाते और हल्की-फुल्की नारेबाजी करते भी दिखे। वहीं मौजूद कुछ लोग इस पल को कैमरे में कैद करते भी नजर आए।

शुरुआत में ही प्रतिनिधियों के बाहर जाने से नेतन्याहू को बहुत गुस्सा आया। करीब तीन मिनट तक वे चुपचाप खड़े रहकर यह सब देखते रहे। इसके बाद जा रहे प्रतिनिधियों की तरफ देखते हुए उन्होंने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बाकी बचे प्रतिनिधियों को भी अगर बाहर जाना है तो वे जा सकते हैं। बाहर जाने वालों को उन्होंने मॉरल कावर्ड्स कहा।

इसके बाद उन्होंने इस्राइल की सैन्य कार्रवाइयों का बचाव करते हुए ईरान और गाझा में चल रहे संघर्ष पर अपना पक्ष रखा। इस वॉकआउट से उनका गुस्सा तो साफ बढ़ गया था, लेकिन उन्होंने चेहरे पर ज्यादा नाराजगी नहीं दिखाई। हालांकि जाने वालों से कहे उनके इस वाक्य में उनका गुस्सा साफ झलक गया कि अभी और कोई डरपोक हो तो वह भी तुरंत निकल जाए।

अपने भाषण में नेतन्याहू ने गाझा में इस्राइल द्वारा नरसंहार किए जाने के आरोपों को जैसी उम्मीद थी, उसी तरह सिरे से खारिज कर दिया। इस्राइल पर हो रही अंतरराष्ट्रीय आलोचना का जिक्र करते हुए उन्होंने अपने देश की सैन्य कार्रवाइयों का समर्थन किया। इस दौरान सभागार में मौजूद कुछ प्रतिनिधियों ने नेतन्याहू के भाषण का समर्थन भी किया। इसके उलट उन्होंने ग्रेटर इस्राइल की अपनी परिभाषा या अपेक्षा भी सबके सामने रखी।

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