गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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स्थानीय निकाय चुनाव को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, OBC आरक्षण के साथ होंगे बाकी चुनाव

स्थानीय निकाय चुनाव को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी, OBC आरक्षण के साथ होंगे बाकी चुनाव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 टीम

सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर की सुनवाई में कहा कि बाकी 20 जिला परिषदों और 211 पंचायत समितियों के चुनाव OBC आरक्षण के साथ हो सकते हैं।

महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव का रास्ता अब साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आज, 29 अक्टूबर को OBC आरक्षण के मुद्दे पर हुई सुनवाई में आदेश दिया कि ओबीसी आरक्षण के साथ स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव कराए जा सकते हैं।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंग ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक 12 जिला परिषदों के चुनाव हो चुके हैं। लेकिन 20 जिला परिषदों और 211 पंचायत समितियों के चुनाव अब तक नहीं हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि जो चुनाव नहीं हुए हैं, वे कराए जा सकते हैं। इस फैसले के बाद राज्य की 20 जिला परिषदों और 211 पंचायत समितियों के चुनाव का रास्ता खुल गया है।

कोर्ट के आदेश में क्या कहा गया, यह भी सामने आया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को चुनाव कराने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन देने के निर्देश राज्य सरकार को पहले ही दिए जा चुके हैं। कोर्ट के मुताबिक, लंबित चुनावों की अधिसूचना न निकालने को सही नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि चुनाव कराने के लिए जो कुछ जरूरी है, वह चुनाव आयोग और राज्य सरकार करें और इसकी जानकारी कोर्ट को भी दें। कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव उन्हीं शर्तों के हिसाब से कराए जाएं जो उसने तय की हैं।

इंदिरा जयसिंग ने कहा कि OBC को कितने प्रतिशत आरक्षण मिले, यह मुख्य मुद्दा अब तक सुलझा नहीं है। उन्होंने कहा कि मामला अंतिम सुनवाई के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है, तो बाकी चुनाव रोकने की जगह राज्य निर्वाचन आयोग को पहले अपनाई गई प्रक्रिया के हिसाब से उन्हें पूरा करने की इजाजत दी जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि ये चुनाव कोर्ट के मौजूदा आदेशों के मुताबिक कराए जाएं और उसके बाद सुनवाई की तारीख तय की जा सकती है। उनका कहना था कि 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा और उससे जुड़ा मुद्दा इस मामले के अंतिम फैसले के अधीन रखा जा सकता है।

सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को क्यों रोका जाए। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कुछ लोग इस प्रक्रिया पर आपत्ति उठा सकते हैं।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने साफ किया कि कोर्ट पहले ही अंतरिम व्यवस्था के तौर पर चुनाव कराने के आदेश दे चुका है। इसलिए जो चुनाव अब तक बाकी हैं, वे भी कराए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ये चुनाव कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे।

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