इजरायल में आज वोटिंग, नेतन्याहू की कुर्सी दांव पर, आइजनकोट से सीधी टक्कर
हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद इजरायल में पहला आम चुनाव हो रहा है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सामने पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की चुनौती है।
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इजरायल में आज, 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं। मिडिल ईस्ट में जंग जैसे हालात हैं, गाजा में लड़ाई चल रही है और ईरान के साथ फौजी तनाव बना हुआ है। इसी माहौल में लोग वोट देने निकले हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए इसे उनके सियासी वजूद का बड़ा इम्तिहान माना जा रहा है।
हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को हमला किया था। उसके बाद देश में यह पहला आम चुनाव है, इसलिए इसकी अहमियत और बढ़ गई है। करीब तीन साल की जंग के बाद दुनिया की नजर इस पर है कि इजरायली जनता नेतन्याहू की लीडरशिप पर फिर भरोसा जताती है या सत्ता बदलने के पक्ष में फैसला देती है।
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के सामने इस बार पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की अगुवाई वाले विपक्षी गुट की बड़ी चुनौती है। नेतन्याहू इजरायल में सबसे लंबे वक्त तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं। लेकिन हमास के हमले को न रोक पाना, गाजा की लंबी खिंचती जंग और ईरान के साथ टकराव की वजह से उनकी लीडरशिप पर सवाल उठे हैं। दूसरी तरफ आइजनकोट ने देश की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव, फौजी नीतियों की समीक्षा और दुनिया में इजरायल की छवि सुधारने का वादा किया है।
वोटरों के सामने कई अहम मुद्दे हैं। गाजा की जंग, हमास के हमले के बाद की सुरक्षा व्यवस्था, ईरान से संघर्ष, लेबनान में फौजी कार्रवाई और फिलिस्तीनी इलाकों के हालात का चुनाव पर बड़ा असर पड़ रहा है। इनके अलावा कुछ धार्मिक समुदायों को फौजी सेवा से मिलने वाली छूट, न्यायपालिका की आजादी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की हालत भी प्रचार में चर्चा का मुद्दा रहे हैं। सात लाख से ज्यादा नागरिक वोट डालने के पात्र हैं और वोटिंग की शुरुआत में ही वोटरों का अच्छा रिस्पॉन्स दिखा है।
इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का बहुमत चाहिए। देश में आनुपातिक प्रतिनिधित्व वाले सिस्टम से चुनाव होता है, इसलिए किसी एक पार्टी को साफ बहुमत मिलना मुश्किल माना जाता है। ऐसे में छोटी पार्टियों की भूमिका फैसलाकुन हो सकती है।
वोटिंग खत्म होने के बाद शुरुआती अनुमान सामने आएंगे, लेकिन आखिरी नतीजे और सरकार बनने की तस्वीर साफ होने में कुछ दिन लग सकते हैं। आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को घोषित होने की उम्मीद है। नेतन्याहू फिर सत्ता में लौटेंगे या इजरायल में नेतृत्व बदलेगा, इसका फैसला इसी चुनाव से होना है।
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