इस्राईल चुनाव में नेतन्याहू और विपक्ष के बीच कांटे की टक्कर, किसी को साफ बहुमत नहीं
इस्राईल के आम चुनाव में किसी भी गुट को साफ बहुमत नहीं मिला है। अरब पार्टियां सरकार बनाने में अहम हो सकती हैं।
इस्राईल में हुए आम चुनाव के बाद देश की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल दिख रही है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की अगुवाई वाले सत्ताधारी गठबंधन को इस बार बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व सेना प्रमुख गादी आयजनकोट के विपक्षी गुट ने नेतन्याहू को कड़ी टक्कर दी है।
चुनाव के शुरुआती नतीजों में किसी भी गुट को साफ बहुमत नहीं मिला है। इसलिए सरकार कौन बनाएगा, यह अभी तय नहीं है। नेतन्याहू ने ऐलान किया है कि वे अरब पार्टी का समर्थन नहीं लेंगे। नेतन्याहू का यह भी कहना है कि इस चुनाव में उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। यानी उन्होंने दावा किया है कि चुनाव पारदर्शी नहीं हुआ। इस सबके बाद इस्राईल का सत्ता संघर्ष किस मोड़ पर जाएगा और उसका दुनिया की राजनीति पर क्या असर होगा, इस पर सभी राजनीतिक विश्लेषकों की नजर टिकी है।
इस्राईल में 27 अक्टूबर को बैलेट पेपर पर वोटिंग हुई। 2023 में हमास के हमले के बाद देश का यह पहला आम चुनाव है। इस चुनाव में विपक्ष ने सुरक्षा नीति, युद्ध और सरकार के फैसलों को लेकर नेतन्याहू को निशाने पर लिया।
गादी आयजनकोट ने बदलाव की अपील करके वोटरों को अपनी तरफ खींचा। शुरुआत में संकेत मिले कि विपक्षी गठबंधन को मामूली बढ़त है। लेकिन मतगणना शुरू होने के बाद तस्वीर बदल गई और नेतन्याहू के गठबंधन ने बढ़त बना ली। यह बढ़त ज्यादा नहीं है। दोनों गुटों के बीच फासला कम होने से कांटे की टक्कर बन गई है।
इस्राईल की संसद यानी नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का बहुमत चाहिए। शुरुआती मतगणना में नेतन्याहू के गठबंधन को 56 और आयजनकोट के विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलती दिख रही थीं। अरब पार्टियों के हिस्से में 16 सीटें आने का अंदाजा लगाया गया है। इसलिए सरकार बनाने में अरब पार्टियों की भूमिका अहम हो सकती है। कौन-सी पार्टी किसे समर्थन देगी, इसी पर सत्ता का गणित टिका रहेगा।
किसी गुट को साफ बहुमत न मिलने से अब अलग-अलग पार्टियों के बीच बातचीत और गठबंधन की जोड़-तोड़ शुरू होने की संभावना है। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग पर सरकार बनाने के लिए सही नेता को मौका देने की जिम्मेदारी होगी। दूसरी तरफ नेतन्याहू ने मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने का इरादा जताया है। विपक्ष ने भी सरकार बनाने का अपना दावा कायम रखा है। इसलिए आने वाले कुछ दिन इस्राईल की राजनीति के लिए बहुत अहम होंगे। अंतिम नतीजे और गठबंधन की बातचीत के बाद देश का अगला नेतृत्व साफ होगा।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।