गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026

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ब्राजील चुनाव हारे फ्लावियो बोल्सोनारो मियामी पहुंचे, खुद को बताया देश का कानूनी नेता

ब्राजील चुनाव हारे फ्लावियो बोल्सोनारो मियामी पहुंचे, खुद को बताया देश का कानूनी नेता तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

राष्ट्रपति चुनाव में हार के बाद सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो अमेरिका के मियामी पहुंचे और चुनाव में हेराफेरी का आरोप लगाया। सबूत उन्होंने कोई नहीं दिया।

ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। चुनाव हारने वाले उम्मीदवार और पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे, सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो देश छोड़कर अमेरिका के शहर मियामी पहुंच गए हैं। वहां पहुंचते ही उन्होंने सख्त रुख अपनाया और खुद को ब्राजील का "कानूनी नेता" घोषित कर दिया।

फ्लावियो का आरोप है कि देश की सर्वोच्च अदालत और नए चुने गए राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने मिलकर चुनाव में बड़ी हेराफेरी की और उन्हें सत्ता से दूर रखा। ब्राजील के चुनाव आयोग के घोषित आधिकारिक नतीजों के मुताबिक लूला दा सिल्वा करीब 45 लाख वोटों के बड़े अंतर से जीते हैं। इसके बावजूद फ्लावियो बोल्सोनारो ने हार मानने से साफ इनकार कर दिया है।

एक बात और गौर करने लायक है। ब्राजील की सर्वोच्च अदालत ने उनके खिलाफ जांच चल रही होने की वजह से उनका पासपोर्ट जब्त करने का आदेश दिया था। इस आदेश को नजरअंदाज करते हुए वे देश से बाहर निकल गए। उनका कहना है कि इस सफर में अर्जेंटीना के राष्ट्रपति हावियर मिलेई ने उनकी मदद की। अमेरिकी वीजा मंजूर होने पर उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खास शुक्रिया भी अदा किया है।

अमेरिका पहुंचने के बाद फ्लावियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक खुला पत्र डाला, जिससे काफी हंगामा हुआ। इस पत्र के शुरुआती मसौदे में उन्होंने अपने को "ब्राजील का नया चुना हुआ राष्ट्रपति" लिखा था। कुछ ही देर में वह पोस्ट हटा दी गई और नया पत्र डाला गया, जिसमें उन्होंने खुद को "ब्राजील का कानूनी और आधिकारिक नेता" कहा।

अपने संदेश में उन्होंने दावा किया, "मेरे 6 करोड़ समर्थक और पूरे ब्राजील की जनता अच्छी तरह जानती है कि देश का असली नेता कौन है।" लूला सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि वोटों की चोरी और चुनाव में घोटाला करने वाले लोग एक संगठित आपराधिक गिरोह का हिस्सा हैं और उन्होंने देश पर तानाशाही थोप दी है।

हालांकि फ्लावियो ने चुनाव में धोखाधड़ी का दावा किया है, पर इसके लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है। उनका मुख्य ऐतराज यह है कि सर्वोच्च अदालत के जजों ने रविवार को मतदान का समय दो घंटे बढ़ा दिया था और इसका फायदा लूला की पार्टी को मिला। दूसरी तरफ लूला की पार्टी ने आरोप लगाया था कि उत्तर-पूर्वी राज्यों में उसके मतदाताओं को वोट डालने से रोकने की कोशिश हुई। वहीं बोल्सोनारो की पार्टी ने बारिश का हवाला देकर दक्षिणी राज्यों में समय बढ़ाने की मांग की थी।

इंस्पर (Insper) संस्थान के प्रोफेसर पेड्रो बर्गास के विश्लेषण के मुताबिक, बढ़ाए गए इन दो घंटों में पूरे देश में 35,000 से भी कम वोट पड़े। यह कुल हुए मतदान का सिर्फ 0.03 प्रतिशत है, यानी बेहद मामूली। इसलिए समय बढ़ाने से नतीजे पर कोई फर्क नहीं पड़ा। राजनीतिक और कानूनी जानकारों का कहना है कि इन आंकड़ों को देखते हुए फ्लावियो की चुनाव रद्द करने की मांग के अदालत में टिकने की संभावना नाममात्र की है।

फ्लावियो का यह कदम उनके पिता की राह जैसा माना जा रहा है। 2022 के चुनाव में लूला से हारने के बाद पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो भी सत्ता छोड़ने से पहले अमेरिका चले गए थे। बाद में ब्राजील लौटने पर उन पर तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप साबित हुआ और उन्हें 27 साल की जेल की सजा सुनाई गई।

फ्लावियो ने साफ किया है कि वे देश से भागे नहीं हैं, बल्कि अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए बाहर गए हैं। इस घटना से अमेरिका और ब्राजील के कूटनीतिक रिश्तों में तनाव आने की आशंका बन गई है। ब्राजील में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दुर्लभ खनिजों (Critical Minerals) का भंडार है। राष्ट्रपति लूला ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह बोल्सोनारो परिवार को बचाकर ब्राजील की सत्ता में दखल देने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिकी प्रशासन ने इन आरोपों से पूरी तरह इनकार किया है।

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