गोवंडी-मानखुर्द के लोगों का आरोप: प्रदूषण हमारे हिस्से में, सुविधाएं अमीर इलाकों को
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एम-ईस्ट वॉर्ड के गोवंडी-मानखुर्द के निवासी कहते हैं कि सरकार और महानगरपालिका उनके साथ सौतेला बर्ताव कर रही हैं।
नगर निगम के एम-ईस्ट वॉर्ड में आने वाला गोवंडी-मानखुर्द इलाका इस वक्त दोहरी मुसीबत झेल रहा है। एक तरफ हवा में भारी प्रदूषण है, दूसरी तरफ प्रशासन की घोर अनदेखी। यहां के निवासियों ने राज्य सरकार और नगर निगम पर सौतेला बर्ताव करने का गंभीर आरोप लगाया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गोवंडी-मानखुर्द को सिर्फ "गरीबों की झोपड़पट्टी" मानकर नजरअंदाज किया जा रहा है। उनके मुताबिक मुंबई के उच्चवर्गीय इलाकों में हवा की क्वालिटी सुधारने के लिए तरह-तरह की तकनीक इस्तेमाल हो रही है और वीआईपी इलाकों को आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि गोवंडी को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है।
निवासियों के अनुसार देवनार डंपिंग यार्ड, बायोमेडिकल वेस्ट प्लांट (एसएमएस एन्वायरो) और तीन रेडी-मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट से निकलने वाले धुएं और हानिकारक कणों ने इस इलाके को बीमारियों का घर बना दिया है।
इस बीच स्थानीय पार्षद जमीर कुरेशी की लगातार कोशिशों के बाद नगर निगम ने एक आरएमसी प्लांट बंद कर दिया है, जिससे थोड़ी राहत मिली है। लेकिन बाकी तीन प्लांट पर अब भी सख्त कार्रवाई की जरूरत बताई जा रही है।
प्रशासन की बेपरवाही का आलम यह है कि नगर निगम कार्यालय के पास और बैंगनवाडी सिग्नल पर मल्हार विवाह स्थल के बगल में तीन गैरकानूनी आरएमसी प्लांट चल रहे हैं। इनसे उड़ने वाली सीमेंट की बारीक धूल खाने-पीने की चीजों में मिलकर लोगों के फेफड़ों तक पहुंचती है। डॉक्टरों के मुताबिक यह जहरीला प्रदूषण इस इलाके में कैंसर, दमा और टीबी जैसी जानलेवा बीमारियों की एक बड़ी वजह है।
नागरिकों की सेहत की सुरक्षा को देखते हुए जोरदार मांग उठ रही है कि ये प्लांट मैरिज हॉल से दूर हटाए जाएं या फिर वह हॉल ही वहां से हटा दिया जाए।
निवासियों का कहना है, "हम आठ साल से सरकार और नगर निगम से गुहार लगा रहे हैं कि दूसरों की तरह हमें भी जीने के लिए साफ हवा और पानी चाहिए। लेकिन हमें सिर्फ आरएमसी प्लांट की सीमेंट की धूल और एसएमएस कंपनी का जहरीला धुआं मिलता है। यह सौतेली मां जैसा बर्ताव है।"
कुल मिलाकर, गोवंडी-मानखुर्द के लोग साफ हवा और पानी जैसी बुनियादी चीजों के लिए सालों से इंतजार कर रहे हैं। उनकी शिकायत है कि बाकी मुंबई को जो सुविधाएं मिलती हैं, वे उन तक नहीं पहुंचतीं, और बचे हुए तीन प्लांट पर कार्रवाई अब भी बाकी है।
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