गोवंडी-मानखुर्द में चार बेकायदा आरएमसी प्लांट बंद होंगे, प्रदूषण पर एम-ईस्ट वॉर्ड की सख्ती
मुंबई के गोवंडी, शिवाजी नगर, बैगनवाड़ी और मानखुर्द इलाके में चल रहे चार रेडी-मिक्स कंक्रीट प्लांट पर एम-ईस्ट वॉर्ड ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
मुंबई के गोवंडी, शिवाजी नगर, बैगनवाड़ी और मानखुर्द जैसे उत्तर भारतीय और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों के लोगों के लिए राहत की खबर है। प्रदूषण और बिगड़ती सेहत को देखते हुए एम-ईस्ट वॉर्ड ने इस इलाके में चल रहे चार रेडी-मिक्स कंक्रीट यानी आरएमसी प्लांट पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। दावा किया जा रहा है कि ये सभी प्लांट जल्द पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल यानी एमपीसीबी ने दिसंबर 2025 में ही ओम गेहलोत ऑपरेटर, एनसीसी लिमिटेड, रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और कन्स्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को ये प्लांट बंद करने का आदेश दे दिया था। इसके बावजूद ये प्लांट पिछले एक साल से नियमों को ताक पर रखकर बेकायदा तरीके से चल रहे थे। स्थानीय नगरसेवक और स्थायी समिति सदस्य जमीर कुरेशी ने चिंताजनक एक्यूआई और उससे लोगों की सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर महापालिका के सामने अपनी बात रखी थी, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।
साफ एमपीसीबी गाइडलाइन होने के बावजूद यह आरएमसी प्लांट खुलेआम नियमों का उल्लंघन कर रहा था। हवा में प्रदूषण रोकने के लिए प्लांट के चारों तरफ बॉक्स-टाइप कवर, स्प्रिंकलर सिस्टम और गाड़ियों के टायर धोने का इंतजाम होना जरूरी है, लेकिन यहां इनमें से कुछ भी नहीं था। सबसे गंभीर बात यह है कि स्कूलों से कम से कम 200 मीटर की दूरी जरूरी होने के बावजूद यह प्लांट सिर्फ 187.3 मीटर पर बना है। इतना ही नहीं, जहां बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग आते-जाते हैं, ऐसा एक कम्युनिटी हॉल भी यहां से सिर्फ 50 मीटर दूर है। कच्चे माल को रखने के नियमों का भी यहां उल्लंघन हो रहा है। इस लापरवाही से न सिर्फ पर्यावरण के नियम टूट रहे हैं, बल्कि हवा में उड़ती धूल के कणों से आसपास रहने वालों की जान को भी खतरा बना हुआ है। रोज 500 से ज्यादा लोग टीबी, दमा और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं।
देवनार डंपिंग यार्ड और बेलगाम आरएमसी प्लांट यहां रहने वालों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। सीमेंट की खतरनाक धूल और जहरीले कणों की वजह से इलाके में टीबी, दमा, कैंसर और आंखों में जलन जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। हालात इतने खराब हैं कि रोज 500 से ज्यादा लोग इसका शिकार हो रहे हैं। सीमेंट के बारीक कण सांस की नली को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सेहत बिगड़ रही है। नियमों की अनदेखी की वजह से यहां हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात बन गए हैं, यह बात यूएमए की सचिव डॉक्टर जाहिद खान ने बताई है।
66 लोगों की बिगड़ती सेहत को देखते हुए यह मुद्दा महापालिका के सामने रखा गया था। एम-ईस्ट के नगरसेवक नवनाथ बन, बबलू पांचाल, विठ्ठल लोकरे और एआईएमआईएम के बाकी नगरसेवकों ने भी इसका समर्थन किया। जब कंपनियों को बंद करने का नोटिस नहीं भेजा गया, तो इन सभी ने डिवीजनल कमेटी की मीटिंग का बहिष्कार करने का पक्का फैसला ले लिया। इसी के बाद यह खतरनाक आरएमसी प्लांट आखिरकार बंद होने जा रहा है और इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, यह जानकारी एआईएमआईएम के नगरसेवक जमीर मुर्तजा कुरेशी ने दी है।