डोंबिवली एमआयडीसी में सर्विस रोड पर कचरा जलाने से बढ़ा धुआं, पाइपलाइन के पास खतरा
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
डोंबिवली एमआयडीसी के निवासी इलाके में सर्विस रोड किनारे अवैध कचरा डालने और उसे जलाने के मामले बढ़े हैं। पास से पेट्रोलियम पाइपलाइन और गैस की लाइनें गुजरती हैं।
डोंबिवली एमआयडीसी के निवासी इलाके में सर्विस रोड के किनारे अवैध तरीके से कचरा डालने और जमा कचरे को आग लगाने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इससे लोगों की सेहत के साथ-साथ सुरक्षा का सवाल भी खड़ा हो गया है। कचरे में पड़े प्लास्टिक, थर्माकोल और रबर जैसी चीजें जलने से इलाके में भारी मात्रा में धुआं फैल रहा है और प्रदूषण बढ़ रहा है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि इसी इलाके से मुंबई-मनमाड की उच्च दाब वाली पेट्रोलियम पाइपलाइन और महानगर गैस की लाइनें गुजरती हैं। ऐसे में कचरे में लगने वाली आग आगे चलकर बड़े हादसे की वजह बन सकती है। इसलिए जागरूक नागरिक मांग कर रहे हैं कि प्रशासन फौरन कदम उठाए।
बताया गया है कि निवासी इलाके के कुछ लोग और व्यावसायिक लोग केडीएमसी की कचरा गाड़ी में कचरा डालने के बजाय सड़क किनारे फेंक देते हैं। कुछ तय जगहों पर कचरा फेंकने के स्पॉट ही बन गए हैं। वहां कचरा जमा होने के बाद अज्ञात लोग उसमें आग लगा देते हैं, ऐसा कहा जा रहा है। प्लास्टिक, थर्माकोल और रबर जलने का धुआं आसपास फैलता है। यहां के निवासी पहले से ही औद्योगिक प्रदूषण झेल रहे हैं, इसलिए उनकी सेहत पर असर पड़ने की आशंका है। खासकर बुजुर्गों और छोटे बच्चों को ज्यादा तकलीफ हो रही है।
कचरा सर्विस रोड पर आरएम-23 के सामने, वरिष्ठ नागरिक मंडल के हॉल के पास, श्री गणराज बैंक्वेट हॉल और आईडीबीआई बैंक के सामने फेंका जा रहा है। इसके अलावा श्री रोहिडेश्वर दर्शन सोसायटी (आरएच-85) से लेकर डीएनएस बैंक, सोनारपाडा मुख्य कार्यालय तक के हिस्से में भी यही हाल है। इस सड़क पर लगातार ट्रैफिक चलता रहता है। जानकारी मिली है कि उच्च दाब वाली बिजली लाइनों के नीचे की खाली जमीनों पर कुछ लोग और व्यावसायिक लोग गाड़ियों में कचरा लाकर डालते हैं। कुछ लोग रिक्शा और टेम्पो से कचरा लाकर यहां फेंकते हैं, ऐसा भी कहा गया है।
इसी सर्विस रोड पर वंदेमातरम् उद्यान और शैलगंगा मिलापनगर शहरी वन परियोजना बने हैं। नागरिक उदाहरण देते हैं कि इन दोनों के आसपास साफ-सफाई रखी जाती है। पेट्रोलियम और गैस पाइपलाइन, बिजली लाइनें, लगातार ट्रैफिक और पास की रिहायशी बस्ती को देखें तो यह हिस्सा संवेदनशील बन गया है। इसलिए नागरिकों की मांग है कि प्रशासन यहां कचरा डालने पर रोक, नियमित सफाई, सीसीटीवी से निगरानी और दोषियों पर कार्रवाई जैसे उपाय तुरंत लागू करे।
मांग यह भी है कि केडीएमसी के स्वच्छता निरीक्षक और संबंधित कर्मचारी अवैध रूप से कचरा डालने वालों और कचरे में आग लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें। उच्च दाब वाले इलाके की सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखकर जिम्मेदार लोगों का पता लगाना मुमकिन हो सकता है। साथ ही अगर एमआयडीसी नियम के मुताबिक बिजली लाइनों के नीचे की खाली जमीनों पर बाग-बगीचे विकसित करने और पेड़ लगाने का मौका अलग-अलग संस्थाओं को दे, तो कचरा फेंकने की घटनाओं पर रोक लग सकती है।
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