पंकजा मुंडे की बैठक में मुंबई क्षेत्र के लिए स्वच्छ हवा कार्यक्रम, धूल और मलबे पर सख्ती
पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे की अध्यक्षता वाली बैठक में मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए 'स्वच्छ हवा कृति कार्यक्रम' चलाने का फैसला हुआ। गाइडलाइन 15 से 20 दिन में बनाने की कोशिश होगी।
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बढ़ते वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए मुंबई महानगर क्षेत्र में 'स्वच्छ हवा कार्ययोजना' चलाने का फैसला हुआ है। यह फैसला पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। मंत्री ने सभी संबंधित महानगरपालिकाओं और एजेंसियों को निर्देश दिए कि सड़कों की धूल, निर्माण का मलबा, गाड़ियों का धुआं और उद्योगों का प्रदूषण रोकने के लिए सब मिलकर सख्त कदम उठाएं। इसके लिए गाइडलाइन अगले 15 से 20 दिन में तैयार करने की कोशिश की जाएगी।
बैठक में रखी गई जानकारी का हवाला देते हुए पंकजा मुंडे ने कहा कि सड़कों की धूल और गाड़ियों से दोबारा हवा में उड़ने वाली धूल पर खास ध्यान देना होगा। प्रदूषण में इनका बड़ा हिस्सा है, इसलिए सड़क साफ करने का तरीका बदलना पड़ेगा। सिर्फ झाड़ू से धूल एक तरफ कर देने से प्रदूषण कम नहीं होता। उन्होंने कहा कि वैक्यूम क्लीनिंग मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया जाए। स्प्रिंकलर से पानी का छिड़काव करते समय ट्रीटेड सीवेज के पानी को काम में लेने की संभावना भी देखी जाए।
महानगरपालिकाओं से कहा गया है कि हवा का प्रदूषण घटाने के लिए जरूरी मशीनें जुटा लें। सड़कों की सफाई, धूल पर नियंत्रण और प्रदूषण की नियमित निगरानी के लिए तकनीकी तरीके अपनाए जाएं। मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि स्कूल और कॉलेज के खुले मैदानों में धूल कम करने के लिए कुछ किया जा सकता है या नहीं, इस पर विचार हो।
मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण और पुनर्विकास का काम चल रहा है। इससे निकलने वाले मलबे की ढुलाई और निपटान प्रदूषण नियंत्रण का अहम मुद्दा है। मलबा ढोने वाली गाड़ियों में निर्माण सामग्री पूरी तरह ढकी होनी चाहिए। मंत्री मुंडे ने ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिए कि नियम तोड़ने वाली गाड़ियों से सिर्फ जुर्माना वसूलकर उन्हें न छोड़ा जाए। जरूरी शर्तें पूरी किए बिना उन्हें आगे जाने की इजाजत न दी जाए। ट्रैफिक पुलिस से मौजूदा नियमों पर सख्ती से अमल कराने को भी कहा गया।
पंकजा मुंडे ने कहा कि मलबा डालने के लिए पर्याप्त जगह न होने से कई महानगरपालिकाओं को दिक्कत आ रही है। इसलिए मलबे के संकलन, ढुलाई, प्रोसेसिंग और दोबारा इस्तेमाल के लिए मिलाजुला सिस्टम खड़ा करना जरूरी है। मुंबई और आसपास की महानगरपालिकाएं उपलब्ध जगहों को मिलकर इस्तेमाल करने पर सोचें। मलबे के निपटान की अलग व्यवस्था बनाने के साथ उसे प्रोसेस करके निर्माण में दोबारा इस्तेमाल करने को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने साफ किया कि पनवेल, कल्याण और मुंबई महानगरपालिका समेत संबंधित स्थानीय निकायों के साथ अलग बैठकें होंगी और उनकी दिक्कतें समझी जाएंगी।
उद्योगों के प्रदूषण पर मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल जांच के साथ यह भी देखे कि नियमों का सचमुच पालन हो रहा है या नहीं। बार-बार जांच के बाद भी जो उद्योग नियम न मानें, उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाए। लेकिन उनका कहना था कि हर उद्योग को बंद करना मकसद नहीं है, जरूरी सुधार करवाना अहम है। कुछ औद्योगिक इलाकों में पुरानी मशीनों और उत्पादन के तरीकों से प्रदूषण बढ़ता दिखा है, वहां स्थानीय हालात के हिसाब से अलग उपाय चाहिए। मंडल के दौरे बढ़ाए जाएं और हर दौरे के बाद पक्का किया जाए कि नियम माने गए या नहीं।
बैठक में गाड़ियों की देखभाल, प्रदूषण नियंत्रण पर अमल और ढुलाई के दौरान उड़ने वाली धूल पर भी बात हुई। खासकर निर्माण सामग्री ढोने वाली गाड़ियों पर नियंत्रण के लिए ट्रैफिक पुलिस और बाकी एजेंसियां तालमेल से काम करें। इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल बढ़ाने, सार्वजनिक परिवहन के लिए इलेक्ट्रिक बस उपलब्ध कराने और राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम के तहत मंजूर फंड का सही इस्तेमाल करने की भी समीक्षा की गई।
मंत्री ने शहरों में हरित उपायों की जरूरत पर भी जोर दिया। बढ़ते निर्माण, सीमेंट की सड़कों और खुली जगहों की धूल का असर घटाने के लिए इमारतों की छतों पर बगीचे बनाने, निर्माण के डिजाइन में पर्यावरण के अनुकूल बदलाव करने और खुली जगहों में धूल रोकने के उपाय करने पर तकनीकी अध्ययन का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मुंबई समुद्र किनारे है, इसलिए हवा चलती रहती है, पर प्रदूषण घटाने के लिए सिर्फ कुदरती हालात के भरोसे नहीं रहा जा सकता। सभी महानगरपालिकाएं और विभाग मिलकर कार्ययोजना बनाएं और उस पर असरदार अमल करें, यह अपील भी उन्होंने की।
बैठक में अलग-अलग महानगरपालिकाओं के आयुक्तों ने अपने यहां की दिक्कतें रखीं। मीरा-भायंदर में मलबा डालने की जगह कम है, इसलिए मुंबई या ठाणे की उपलब्ध जगहों के संयुक्त इस्तेमाल की बात उठी। नवी मुंबई में एयरपोर्ट इलाके के निर्माण, औद्योगिक क्षेत्र के पुनर्विकास और राष्ट्रीय महामार्ग के ट्रैफिक की वजह से धूल रोकने में दिक्कत बताई गई। कल्याण-डोंबिवली में रात के वक्त मलबे की अवैध ढुलाई और मैंग्रोव वाले इलाके में मलबा फेंके जाने पर रोक के लिए पुलिस की मदद की बात हुई। सड़कों के किनारे खड़ी लावारिस गाड़ियां हटाने के लिए क्षेत्रीय परिवहन विभाग और पुलिस से तालमेल पर भी चर्चा हुई।
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