बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट

कनगरा के पशुपालकों ने गन्ने से बनाया साइलेज, चारे की कमी से निपटने की कोशिश

कनगरा के पशुपालकों ने गन्ने से बनाया साइलेज, चारे की कमी से निपटने की कोशिश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

धाराशिव तालुका के कनगरा गांव के पशुपालकों ने गन्ने से साइलेज (शुगरकेन साइलेज) बनाने का प्रयोग किया है। जिला पशुपालन उपायुक्त और जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी ने मौके पर जाकर इसे देखा।

धाराशिव, 28 अक्टूबर: सूखे के आसार दिखते ही किसानों के सामने अपने गुजारे के साथ बेजुबान जानवरों के चारे का सवाल भी खड़ा हो जाता है। हरा चारा कम पड़ने लगे तो पशुधन को कैसे पालें, यह पशुपालकों की सबसे बड़ी चिंता होती है। इसी संकट से निपटने के लिए धाराशिव तालुका के कनगरा गांव के प्रयोगशील पशुपालकों ने गन्ने से साइलेज (शुगरकेन साइलेज) बनाने का नया प्रयोग शुरू किया है। मौजूद गन्ने को वैज्ञानिक तरीके से इस्तेमाल करके बनाया गया यह साइलेज आने वाली चारे की कमी के समय पशुधन के लिए काम का विकल्प बन सकता है।

जिले में चारे की संभावित कमी को देखते हुए कृषि और पशुपालन विभाग पशुपालकों तक चारा बनाने की वैकल्पिक तकनीक पहुंचाने पर जोर दे रहे हैं। इसी सिलसिले में जिला पशुपालन उपायुक्त डॉ. दीपक मुळे और जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी सागर खटकाळे ने आज कनगरा गांव के पशुपालकों के खेत का दौरा किया। वहां उन्होंने गन्ने से साइलेज बनाने के प्रयोग को खुद देखा और संबंधित किसानों व पशुपालकों को मार्गदर्शन दिया।

डॉ. दीपक मुळे ने बताया कि गन्ने से वैज्ञानिक तरीके से बना साइलेज जानवरों के लिए पौष्टिक चारे का विकल्प हो सकता है। खासकर गर्मियों में या सूखे के हालात में जब हरे चारे की कमी महसूस होती है, तब सही ढंग से तैयार साइलेज को पशुधन के आहार में शामिल किया जा सकता है।

साइलेज से जानवरों का पाचन सुधरने में मदद मिलती है और दूध उत्पादन में निरंतरता बनाए रखने में भी यह काम आ सकता है। लेकिन गन्ने में शर्करा की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए इससे बना साइलेज संतुलित आहार के हिस्से के तौर पर और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के मार्गदर्शन के मुताबिक ही जानवरों को देना जरूरी है। चारा बनाते समय सही प्रक्रिया, भंडारण और पौष्टिक संतुलन पर ध्यान देने की अहमियत पर भी इस मौके पर जोर दिया गया।

जिले के गन्ना उत्पादक किसानों को सही तकनीक के साथ साइलेज बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि और पशुपालन विभाग के तालमेल से चारा बनाने की आधुनिक तकनीक किसानों तक पहुंचाने की कोशिश चल रही है।

जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी श्री खटकाळे ने कहा कि कृषि विभाग की अलग-अलग योजनाओं और कृषि यांत्रिकीकरण की मदद से चारा प्रक्रिया उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूद कृषि संसाधनों का अच्छा इस्तेमाल करके किसानों को पशुधन के लिए चारा मिल सके, इसके लिए आधुनिक तकनीक अपनाना अहम है। गन्ना उत्पादक किसान सही प्रक्रिया तकनीक से साइलेज बनाने की तरफ मुड़ें तो चारा प्रबंधन के लिए एक और विकल्प मिल सकता है।

कनगरा के पशुपालकों ने मौजूद गन्ने का कम खर्च में इस्तेमाल करके साइलेज कल्चर और वैज्ञानिक प्रक्रिया से अच्छे दर्जे का साइलेज बनाने का प्रयोग किया है। प्रयोग का मौका-मुआयना करते वक्त पशुपालन विभाग के डॉ. दीपक मुळे और कृषि विभाग के सागर खटकाळे ने इन पशुपालकों की खास तारीफ की।

अधिकारियों ने कहा कि सूखे के हालात में सिर्फ पारंपरिक चारे के स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय मौजूद साधनों से वैकल्पिक चारा बनाने के प्रयोग करना जरूरी है। कनगरा के पशुपालकों ने इस दिशा में पहल की है और ऐसे प्रयोगों से दूसरे किसानों को भी रास्ता मिल सकता है।

जिले के कई किसान खेती के साथ दुग्ध व्यवसाय और पशुपालन पर निर्भर हैं। बारिश की अनियमितता से चारा फसलों की पैदावार पर असर पड़े तो पशुधन के लिए साल भर पर्याप्त चारा जुटाना चुनौती बन जाता है। ऐसे में मौजूद चारे का सही नियोजन, प्रक्रिया और भंडारण खास अहमियत रखता है। गन्ने से बना साइलेज सही तरीके से रखा जा सके तो हरे चारे की कमी के दिनों में पशुपालकों को विकल्प मिल सकता है, और चारा प्रक्रिया तकनीक अपनाने से पशुधन के आहार का नियोजन भी बेहतर हो सकता है।

इस दौरे में कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारी, स्थानीय पशु चिकित्सा अधिकारी श्रीमती वाघमारे, कृषि सहायक और आसपास के किसान व पशुपालक बड़ी संख्या में मौजूद थे। अधिकारियों ने मौजूद पशुपालकों से बातचीत करके गन्ने से साइलेज बनाने के प्रयोग पर मार्गदर्शन दिया।

इस मौके पर अपील की गई कि जिले में चारे की संभावित कमी से निपटने के लिए किसान मौजूद चारा संसाधनों का सही इस्तेमाल करें, और गन्ने से साइलेज बनाने की तकनीक वैज्ञानिक तरीके से और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में अपनाएं। सूखे के संकट के बीच किसानों को पशुधन के चारे की फिक्र सता रही है, ऐसे में कनगरा के पशुपालकों का यह प्रयोग उम्मीद जगाने वाला है। जिले के दूसरे पशुपालकों के लिए भी इसके प्रेरणादायी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

#नागपुर#शहर#PT24#Civic#Nagpur

विज्ञापन

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप 'आप' पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे