खालापुर में पाताळगंगा नदी के प्रदूषण पर फिर सवाल, सांडपानी की वैज्ञानिक जांच की मांग
महाराष्ट्र राज्य पत्रकार संघ ने पाताळगंगा नदी के प्रदूषण पर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल से अंतिम कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
रसायनी: खालापुर तालुका की पाताळगंगा नदी के प्रदूषण का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। महाराष्ट्र राज्य पत्रकार संघ ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। शिकायतें आ रही हैं कि औद्योगिक इलाके से निकलने वाले सांडपानी का असर नदी और आसपास के पर्यावरण पर पड़ रहा है।
इन शिकायतों को देखते हुए महाराष्ट्र राज्य पत्रकार संघ के कोकण विभागीय अध्यक्ष राकेश खराडे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल को लगातार पत्र लिखते आ रहे हैं और पीछा भी कर रहे हैं। गांव वालों की मांग है कि संबंधित विभाग मौके पर जाकर जांच करें, सांडपानी के नमूने लें, उनकी वैज्ञानिक जांच कराएं और रिपोर्ट जनता के सामने रखें।
खराडे का दावा है कि कुछ उद्योगों के मामले में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की तरफ से जांच, सुनवाई और आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया चलने की बात कही जा रही है, फिर भी अब तक अंतिम कार्रवाई साफ तौर पर सामने नहीं आई है। उन्होंने सवाल उठाया है कि प्रस्तावित कार्रवाई के बाद आगे क्या होगा और अंतिम कार्रवाई कब होगी। ज्यादा जानकारी के लिए उन्होंने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल में आरटीआई दाखिल की है।
मंडल के उपलब्ध कागजात के मुताबिक द बॉम्बे डाइंग एंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड (पॉलिस्टर विभाग), गतिक सिंथेसिस एलएलपी और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एलएबी विभाग) की जांच के दौरान पर्यावरण से जुड़ी शर्तों और नियमों को लेकर कई बातें दर्ज की गई थीं।
कागजात में लिखा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (एलएबी विभाग) की जांच में सांडपानी और बारिश के पानी के लिए अलग संकलन व्यवस्था, सांडपानी प्रक्रिया व्यवस्था और पानी की सतह पर मिली तेल की परत समेत कई चीजें नोट की गईं। गतिक सिंथेसिस एलएलपी के बारे में कागजात के मुताबिक एटीएफडी यंत्रणा चालू नहीं थी, और घातक कचरे के भंडारण तथा धोकादायक कचरा भंडारण इलाके के प्रबंधन को लेकर भी टिप्पणियां दर्ज हुईं।
राकेश खराडे ने सूचना के अधिकार के तहत एमपीसीबी से पूछा है कि प्रदूषण की शिकायतों के बाद इन उद्योगों पर असल में कौन सी कार्रवाई हुई, कितने उद्योगों की जांच हुई, जांच में कौन से नमूने लिए गए और उनकी प्रयोगशाला रिपोर्ट क्या हैं। साथ ही नोटिस और सुनवाई के बाद आगे क्या फैसले हुए और प्रस्तावित कार्रवाई की मौजूदा स्थिति क्या है, यह भी पूछा गया है।
पत्रकार संघ की मांग है कि संबंधित उद्योग की इटीपी यंत्रणा की कार्यक्षमता जांची जाए, सांडपानी के नमूने नियमित लिए जाएं, सीइटीपी की प्रक्रिया व्यवस्था की जांच हो, नदी के पानी की गुणवत्ता नियमित परखी जाए और जांच रिपोर्ट पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जाए।
खराडे का कहना है कि जांच में नियम तोड़ने या पर्यावरण से जुड़ी कमियां मिली हों, तो जनता को पता चलना चाहिए कि उन प्रतिष्ठानों पर आखिर कौन सी अंतिम कार्रवाई हुई। उनके मुताबिक मामला सिर्फ नोटिस, सुनवाई या प्रस्तावित कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। दोष साबित होने पर कानून के हिसाब से ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।