धाराशिव जिला परिषद सूखे से निपटने की तैयारी में, 729 गांवों में पशुओं के लिए पानी की टंकियां
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संभावित सूखे को देखते हुए धाराशिव जिला परिषद किसानों, खेत मजदूरों और पशुपालकों के लिए पानी, चारे और जलस्रोतों की मरम्मत की योजना बना रही है।
धाराशिव जिले में सूखे का संकट गहराने की आशंका है। इसे देखते हुए जिला परिषद प्रशासन किसानों, खेत मजदूरों और पशुपालकों को राहत देने के लिए कई उपायों की योजना बनाएगा। जिला परिषद अध्यक्ष अर्चनाताई राणाजगजितसिंह पाटील ने भरोसा दिलाया है कि मुश्किल वक्त में जिला परिषद इन सबके साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
योजना के मुताबिक जिले के सभी 729 गांवों में पशुधन के लिए पांच-पांच हजार लीटर क्षमता की पानी की टंकियां उपलब्ध कराने की योजना है। गांव-गांव में पशुओं की गिनती की जाएगी और जानवरों को टैग लगाए जाएंगे। पशुओं की संख्या के हिसाब से जरूरी जगहों पर पानी के हौज भी बनवाए जाएंगे, ताकि सूखे के दौरान जानवरों को पीने का पानी मिलता रहे।
सूखे का असर सिर्फ खेती और पीने के पानी तक सीमित नहीं रहता। पशुओं को पालना भी बड़ी समस्या बन जाता है। पानी और चारे की कमी से पशुपालकों पर आर्थिक संकट आ जाता है। इसी को ध्यान में रखकर जिला परिषद के जरिए लंबे समय तक चलने वाले उपायों की योजना बनाई जाएगी।
पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जिले के रिसाव तालाब, स्टोरेज तालाब और कोल्हापुरी बांधों का निरीक्षण किया जाएगा। जहां मरम्मत की जरूरत होगी, वहां जरूरी काम हाथ में लेने की योजना है। इसके अलावा गांवों में मौजूद जलस्रोतों की जांच करके जरूरत के हिसाब से कुएं और बोरवेल अधिग्रहित किए जाएंगे और इसी रास्ते से पानी की सप्लाई का इंतजाम होगा। कोशिश यह रहेगी कि मौजूद पानी का सही इस्तेमाल करके लोगों के साथ पशुधन की भी पानी की जरूरत पूरी की जाए।
सूखे में जानवरों को पानी के साथ पर्याप्त चारा मिलना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए जरूरत के मुताबिक चारे की खेती की योजना बनाकर पशुधन के लिए चारा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। पानी और चारे दोनों का इंतजाम करके पशुधन को बचाने की कोशिश जिला परिषद प्रशासन करेगा।
संभावित सूखे से ग्रामीण परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। यह देखते हुए महिलाओं के स्वरोजगार को भी बढ़ावा दिया जाएगा। समुदाय संसाधन व्यक्तियों (सीआरपी) के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने की योजना है। महिलाओं को प्रोत्साहित करने वाले सीआरपी को एक हजार रुपये का प्रोत्साहन भत्ता दिया जाएगा। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के मौके बनाने की कोशिश की जाएगी।
सूखे की तीव्रता को देखते हुए करीब 11 से 12 महीनों की अवधि के लिए अलग-अलग उपायों की योजना बनाई जाएगी। इसमें पानी की सप्लाई, पशुधन के लिए पानी के हौज, चारे की उपलब्धता, जलस्रोतों की मरम्मत और महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा शामिल है।
अर्चनाताई राणाजगजितसिंह पाटील ने विश्वास जताया कि सूखे के संकट में किसानों, खेत मजदूरों, पशुपालकों और आम नागरिकों को राहत देने के लिए जिला परिषद प्रशासन कोशिश करता रहेगा। पशुधन की रक्षा के साथ ग्रामीण इलाकों के लोगों को जरूरी सुविधाएं देने के लिए योजना बनाकर उपाय किए जाएंगे। प्रस्तावित उपायों का असली फायदा गांव-गांव के किसानों और पशुपालकों तक पहुंचे, इसके लिए इन पर असरदार अमल होना अहम रहेगा।
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