धाराशिव में कर्ज और सूखे से परेशान किसान ने दी जान, शव लेकर कलेक्टर दफ्तर पहुंचे परिजन
खानापुर के 34 साल के किसान दयानंद संताराम राठोड की मौत के बाद परिजन और ग्रामीण शव के साथ कलेक्टर दफ्तर में धरने पर बैठे।
धाराशिव तालुका के खानापुर गांव के किसान दयानंद संताराम राठोड ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। वे 34 साल के थे और उनके पास थोड़ी ही जमीन थी। सूखा, लगातार फसल खराब होना और सिर पर बढ़ता कर्ज, इन सबसे वे टूट चुके थे।
इस घटना से गुस्साए रिश्तेदार, गांव वाले और किसान शुक्रवार, 2 अक्टूबर को राठोड का शव सीधे जिलाधिकारी यानी कलेक्टर दफ्तर ले आए और वहीं धरना शुरू कर दिया। "किसानों को न्याय मिलना ही चाहिए" और "आत्महत्या करने वाले परिवार को मदद मिलनी ही चाहिए" जैसे नारों से दफ्तर का पूरा परिसर गूंज उठा।
राठोड खेती के साथ गन्ना कटाई मजदूर के तौर पर भी काम करते थे। इस बार बेमौसम और अनियमित बारिश से खरीफ की फसल को भारी नुकसान हुआ। पिछले साल की अतिवृष्टि से भी खेती का नुकसान हुआ था। हाथ में आई फसल बर्बाद हो गई तो कमाई का सहारा ही टूट गया। ऊपर से गन्ना कटाई की रकम से जुड़ी देनदारी और दोस्तों से लिया हुआ कर्ज बढ़ता गया। खेती से आमदनी नहीं थी और कर्ज का बोझ बढ़ रहा था। इसी दोहरी मार में वे घिरे हुए थे।
रिश्तेदारों के मुताबिक गुरुवार को खेत में फसल की बुरी हालत देखने के बाद उन्होंने रात को अपने घर पर यह कदम उठाया। उनके पीछे पत्नी, 12 साल का बेटा और 10 साल की बेटी हैं। घर का सहारा चले जाने से दोनों बच्चों के सिर से पिता का साया भी उठ गया।
शुक्रवार सुबह बड़ी संख्या में रिश्तेदार, गांव वाले और किसान इकट्ठा हुए। उन्होंने राठोड का शव कलेक्टर दफ्तर के परिसर में रखकर धरना दिया। प्रदर्शन करने वालों की मुख्य मांगें थीं कि मृत किसान के परिवार को अच्छी खासी आर्थिक मदद दी जाए, परिवार के किसी पढ़े-लिखे सदस्य को सरकारी नौकरी मिले, और आत्महत्या का पंचनामा फौरन करके सरकार को रिपोर्ट भेजी जाए।
धरने से दफ्तर के आसपास तनाव का माहौल बन गया। हालात को देखते हुए धाराशिव शहर पुलिस स्टेशन और आनंदनगर पुलिस स्टेशन के अफसर और पुलिसवाले मौके पर पहुंचे।
आंदोलन करने वालों का कहना है कि सूखे और फसल खराब होने से किसानों के घर उजड़ रहे हैं, ऐसे में आत्महत्या करने वाले परिवारों की मदद के लिए प्रशासन को तुरंत कदम उठाने चाहिए। रिश्तेदार और किसान साफ कह चुके हैं कि जब तक प्रशासन से मांगों पर लिखित रिपोर्ट और पक्का आश्वासन नहीं मिलता, वे धरना खत्म नहीं करेंगे। राठोड की मौत से धाराशिव जिले में सूखा, फसल की बर्बादी, बढ़ता कर्ज और आत्महत्या करने वाले किसान परिवारों को मदद का सवाल फिर सामने आ गया है।
मौके पर मौजूद किसानों ने गुस्से और दुख के साथ पूछा, "और कितने किसानों की बलि चाहिए? तब सरकार मदद करेगी?" उनका कहना है कि जिले में सूखे के हालात गंभीर हैं, सरकारी नुमाइंदे और जनप्रतिनिधि सिर्फ मुआयने और पंचनामे में लगे हैं, और कर्ज में डूबे किसानों को अब तक कोई मदद नहीं मिली है।