चंद्रपुर में आशा वर्कर्स की 31 हजार रुपये दिवाली बोनस की मांग, 2 नवंबर से धरने की चेतावनी
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चंद्रपुर महानगरपालिका के राष्ट्रीय शहरी आरोग्य अभियान की आशा वर्कर और ग्रुप प्रवर्तक सानुग्रह अनुदान न मिलने से नाराज हैं। एटक के नेतृत्व में उन्होंने महानगरपालिका दफ्तर पर प्रदर्शन किया।
चंद्रपुर महानगरपालिका के राष्ट्रीय शहरी आरोग्य अभियान में काम करने वाली आशा वर्कर और समूह प्रवर्तक दिवाली बोनस को लेकर आक्रामक हो गई हैं। दिवाली का त्योहार निकलने को है, फिर भी अनुग्रह राशि नहीं मिली। इसी नाराजगी में मंगलवार को एटक के नेतृत्व में सैकड़ों आशा वर्कर महानगरपालिका दफ्तर पहुंचीं और 31 हजार रुपये दिवाली बोनस देने की मांग रखी।
प्रदर्शन के दौरान "बोनस हमारे हक का, किसी के बाप का नहीं" जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। आंदोलनकारियों ने मंगलवार को ही महापौर संगीता खांडेकर, उपमहापौर प्रशांत दानव, आयुक्त अकुनूरी नरेश और स्थायी समिति सभापति मनस्वी गिहें को अपना निवेदन सौंपा।
एटक के राज्य उपाध्यक्ष विनोद झोडगे पाटील ने चेतावनी दी कि अगले पांच दिनों में बोनस नहीं मिला तो 2 नवंबर से महानगरपालिका दफ्तर के सामने अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रशासन को इसी काम के लिए पांच दिन की मुहलत दी गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि त्योहार के समय कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए प्रशासन तुरंत फैसला ले। उन्होंने यह भी साफ किया कि मांग मंजूर होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
चंद्रपुर महानगरपालिका के राष्ट्रीय शहरी आरोग्य अभियान के तहत करीब 170 आशा वर्कर और समूह प्रवर्तक काम कर रही हैं। संगठन की मुख्य मांग यही है कि इन सभी को दिवाली के मौके पर 31 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाए। मंगलवार (27 तारीख) का आंदोलन इसी मांग को लेकर हुआ था।
बड़ी संख्या में पहुंचीं आशा वर्करों ने नारेबाजी करके प्रशासन का ध्यान खींचा। संगठन का कहना है कि कोरोना महामारी के संकट में आशा वर्कर, समूह प्रवर्तक और आरोग्य अभियान के कर्मचारियों ने लोगों की सेहत की हिफाजत के लिए अहम काम किया था। स्वास्थ्य सेवा में इस योगदान को देखते हुए उन्हें दिवाली पर अनुग्रह राशि मिलनी चाहिए।
झोडगे ने कहा, "कोरोना महामारी के दौरान लोगों की सेहत की रक्षा के लिए आशा वर्कर और समूह प्रवर्तकों ने अहम जिम्मेदारी निभाई। आरोग्य सेवा में इस योगदान को देखते हुए दिवाली के लिए 31 हजार रुपये अनुग्रह राशि दी जाए, यह एटक की मांग है। मांग मंजूर नहीं हुई तो 2 नवंबर से अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन किया जाएगा।"
आंदोलन में सविता गटलेवार के साथ किरण धोंगडे, प्रमिला बावणे, शकुंतला दाभेकर, वर्षा मोरे, सोनाली हजारे, स्वाती तळसे और छाया तोडसे शामिल थीं। अब आशा वर्करों के बोनस का सवाल गर्म हो गया है और सबकी नजर इस पर है कि महानगरपालिका प्रशासन क्या फैसला लेता है।
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