ब्रह्मपुरी के चांदगांव में बाघ का चार साल के बच्चे पर हमला, चाचा के शोर से बची जान
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ब्रह्मपुरी तालुका के चांदगांव में मंगलवार शाम बाघ के शावक ने चार साल के मयंक वलके पर हमला कर दिया। चाचा के शोर मचाने पर वह भाग गया।
ब्रह्मपुरी तालुका के चांदगांव में मंगलवार, 27 अक्टूबर की शाम करीब साढ़े छह बजे एक चार साल के बच्चे पर बाघ ने हमला कर दिया। बच्चा इस हमले में जख्मी हुआ है और उसे इलाज के लिए ब्रह्मपुरी के ख्रिस्तानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। खबर के मुताबिक हमला पट्टेदार बाघ के शावक ने किया।
घटना कैसे हुई, इसका ब्योरा यह है। रोहित वलके गांव में अपनी बुआ के घर जा रहे थे और उनके पीछे चार साल का मयंक अशोक वलके भी चल रहा था। बुआ के घर की सीढ़ी के पास पहुंचते ही घात लगाकर बैठे बाघ के शावक ने मयंक पर झपट्टा मारा। परिवार की जानकारी के मुताबिक बच्चा सीढ़ी के पास पहुंचा ही था कि बाघ ने झपट्टा मार दिया।
मयंक की चीख सुनकर रोहित ने पलटकर देखा तो बाघ बच्चे पर हमला कर रहा था। उन्होंने फौरन जोर-जोर से शोर मचाया। शोर सुनकर बाघ वहां से भाग गया। चाचा की इसी हिम्मत से बच्चे की जान बच गई और एक बड़ा हादसा टल गया। फिर भी इस वारदात से इलाके के लोगों में गुस्सा भी है और डर भी।
गांव वालों का कहना है कि दो दिन पहले ही इसी इलाके में एक बकरी पर भी बाघ ने हमला किया था। यानी पहले बकरी और अब सीधे आबादी के पास चार साल के बच्चे पर हमला हुआ है। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से लोग वन विभाग के कामकाज पर और बचाव के इंतजाम न होने पर सवाल उठा रहे हैं। गुस्साए लोग पूछ रहे हैं कि बाघ की हलचल की जानकारी होने के बाद भी खतरा टालने के लिए प्रशासन ने कौन से ठोस कदम उठाए।
हादसे की खबर मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे और जख्मी बच्चे का हाल पूछा। आरएफओ कन्नमवार ने भी अस्पताल जाकर बच्चे की तबीयत की जानकारी ली। पुलिस की तरफ से भी मामले की जांच चल रही है। लेकिन लोगों की नाराजगी इस बात पर है कि हादसे के बाद अस्पताल जाकर हालचाल पूछने से ज्यादा जरूरी है कि ऐसी जानलेवा घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए पहले से असरदार और सख्त इंतजाम किए जाएं।
यह इलाका वन विभाग के क्षेत्र क्रमांक 123 में आता है और लोगों का कहना है कि यहां बाघ की हर हलचल पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। गांव से सटे इलाकों में नियमित गश्त हो, जरूरी जगहों पर कैमरा ट्रैप लगें, वन्यजीवों का पीछा किया जाए और लोगों को समय-समय पर सावधान करने वाले संदेश दिए जाएं, यह मांग जोर पकड़ रही है। खासकर छोटे बच्चों, महिलाओं और खेत में या गांव के बाहर आने-जाने वालों की सुरक्षा के लिए चांदगांव के लोग चाहते हैं कि वन विभाग अब गंभीरता से ठोस कार्ययोजना बनाए।
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