मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:20 IST

धाराशिव में कर्ज और खराब फसल से किसान ने दी जान, गांववाले लाश लेकर कलेक्टर दफ्तर पहुंचे

खानापुर के अल्पभूधारक किसान दयानंद संताराम राठोड ने गुरुवार को आत्महत्या की। शुक्रवार को गांववाले मृतदेह के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और परिवार के लिए मदद व सरकारी नौकरी मांगी।

धाराशिव में कर्ज और खराब फसल से किसान ने दी जान, गांववाले लाश लेकर कलेक्टर दफ्तर पहुंचे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

धाराशिव जिले में सूखा, खराब फसल और कर्ज के बढ़ते बोझ के बीच एक किसान की आत्महत्या का मामला सामने आया है। खानापुर के अल्पभूधारक किसान दयानंद संताराम राठोड ने गुरुवार को अपनी जान दे दी। इसके बाद नाराज किसान और गांववाले शुक्रवार को उनका मृतदेह लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और वहां धरना दिया। आंदोलन करने वालों ने मांग की है कि परिवार को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी दी जाए।

खानापुर (तालुका धाराशिव) के दयानंद राठोड अल्पभूधारक किसान थे और ऊसतोड कामगार के तौर पर भी काम करते थे। इस साल बारिश का कोई भरोसा नहीं रहा और मौसम भी खेती के खिलाफ रहा, जिससे उनके खेत की फसल को बड़ा नुकसान हुआ। खेती से जितनी कमाई की उम्मीद थी, उतनी हाथ नहीं आई और उनकी आर्थिक तंगी बढ़ती गई।

परिवार और गांववालों ने बताया कि घर का खर्च चलाने और कर्ज चुकाने का दबाव उन पर लगातार बना हुआ था। जानकारी के मुताबिक साखर कारखाने से जुड़ी देनदारी और दूसरे कर्जों का बोझ बढ़ने से वे पैसों की परेशानी में थे।

बताया जा रहा है कि गुरुवार को खेत में फसल की बुरी हालत देखकर लौटने के बाद राठोड ने यह आखिरी कदम उठा लिया। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है।

शुक्रवार सुबह खानापुर परिसर के किसान और गांववाले इकट्ठा हुए। वे मृत किसान का मृतदेह लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया।

आंदोलन करने वालों ने कहा कि सूखे और खराब फसल की वजह से मुसीबत में आए किसान परिवार को सरकार से फौरन मदद मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि प्रशासन इस मामले को तुरंत गंभीरता से ले और जरूरी प्रक्रिया पूरी करे।

किसानों की मुख्य मांग है कि मृत किसान के परिवार को भरपूर आर्थिक मदद दी जाए। साथ ही परिवार के किसी पढ़े-लिखे सदस्य को सरकारी सेवा में लिया जाए।

इसके अलावा आंदोलन करने वालों ने कहा कि प्रशासन फौरन पंचनामा करे और मामले की रिपोर्ट सरकार को भेजे। किसानों का कहना था कि परिवार को सरकार से मदद मिल सके, इसके लिए प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे।

आंदोलन करने वालों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं करता, वे आंदोलन वापस नहीं लेंगे। किसानों और गांववालों ने मांगों पर लिखित रिपोर्ट और पक्का आश्वासन देने की भी मांग रखी है।

इस घटना से धाराशिव जिले में बारिश की अनिश्चितता, खराब फसल और खेती से जुड़ी आर्थिक परेशानियों का सवाल फिर चर्चा में आ गया है। अब सबकी नजर इस पर है कि दयानंद राठोड के परिवार को सरकार से मदद मिलती है या नहीं और प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है।

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