मावल में सूखे जैसे हालात की जांच के लिए सरकारी समिति आएगी, विधायक शेलके की मांग पर फैसला
मंत्रालय की बैठक में तय हुआ कि समिति दो दिन के अंदर मावल तालुका का दौरा करेगी और धान की फसल के नुकसान का जायजा लेगी।
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वडगांव मावल: मावल तालुका के धान उगाने वाले किसानों पर आई मुसीबत को लेकर विधायक सुनील शेलके लगातार सरकार के पीछे लगे रहे, और अब इसका असर दिखने लगा है। तालुका में सूखे जैसे हालात को अपनी आंखों से देखने के लिए एक सरकारी समिति अगले दो दिन में मावल के दौरे पर आने वाली है।
यह फैसला मुंबई में मंत्रालय स्तर पर हुई बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता सूखा निवारण समिति के अध्यक्ष और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने की। मावल को सूखाग्रस्त घोषित करने की जो मांग उठ रही थी, उस लिहाज से इसे सरकार का एक अहम कदम माना जा रहा है। अब समिति की पड़ताल के बाद जो रिपोर्ट पेश होगी, उस पर तालुका के किसानों की नजरें टिकी हैं।
मावल को राज्य के बड़े धान उत्पादक इलाकों में गिना जाता है। यहां अच्छी बारिश होती है, मौसम माफिक रहता है और जमीन उपजाऊ है, इसीलिए धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। यहां के इंद्रायणी चावल की मांग राज्य ही नहीं, पूरे देश में है। तालुका के हजारों किसान अपनी कमाई के लिए धान पर ही निर्भर हैं, और हर साल 12 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में धान की रोपाई होती है। इसलिए धान को नुकसान होने का मतलब सिर्फ खेती का नुकसान नहीं है, गांवों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
इस बार बारिश ने खींच ली और मावल की धान की खेती पर बड़ा संकट आ गया। सीजन में जितनी बारिश की उम्मीद थी, उतनी हुई नहीं, तो कई इलाकों में फसल को जरूरी पानी नहीं मिला। नतीजा यह कि फसल झुलसने, पौधों की बढ़त रुकने और पैदावार घटने का डर पैदा हो गया है। कुछ जगहों पर धान की फसल सूख ही गई है और किसानों का भारी नुकसान हुआ है। तालुका के बांधों में पानी का भंडार तो है, लेकिन उसे सही वक्त पर और पूरी मात्रा में खेतों तक पहुंचाने का सवाल खड़ा हो गया है। धान को बढ़त के अहम पड़ावों पर बारिश की जरूरत होती है, और ठीक उसी दौरान बारिश गायब रही, इसलिए किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
मावल की पहचान ही धान के गढ़ की है, ऐसे में खुद इसी खेती पर संकट आने से किसान चिंता में हैं। रोपाई का खर्च, खाद, बीज, मजदूरी और खेती के बाकी खर्च से उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। अगर उम्मीद के मुताबिक पैदावार नहीं मिली, तो कर्ज कैसे चुकाएं और अगले सीजन की तैयारी कैसे करें, यह सवाल भी किसानों के सामने खड़ा है। इसी वजह से यह मांग जोर पकड़ रही है कि तालुका में फसल की असल हालत देखकर नुकसान का सही आकलन किया जाए और मावल को सूखाग्रस्त घोषित करने पर जल्द फैसला हो।
इसी पृष्ठभूमि में विधायक सुनील अण्णा शेलके ने कुछ दिन पहले मावल तालुका के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया था और बारिश की कमी से प्रभावित धान के खेत देखे थे। उन्होंने किसानों से बात करके उनकी दिक्कतें समझीं और तालुका के गंभीर हालात सरकार के सामने रखे। धान किसानों के नुकसान, बारिश की कमी और खेती के लिए पानी की उपलब्धता के मुद्दों पर वे सरकारी स्तर पर लगातार पीछे पड़े रहे। उनकी कोशिश यही रही कि किसानों को वक्त पर मदद मिले और सरकार हालात की गंभीरता देखते हुए जल्द फैसला ले।
इसी के बाद मंत्रालय की बैठक में मावल तालुका के सूखे जैसे हालात का जायजा लेने के लिए सरकारी समिति भेजने का फैसला हुआ। अगले दो दिन में यह समिति तालुका में आकर अलग-अलग इलाकों में फसल की स्थिति, बारिश का हाल, खेती के लिए पानी की उपलब्धता और हुए नुकसान को देखेगी। उसके बाद समिति सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर सूखे के हालात पर आगे का फैसला लेने का रास्ता खुल सकता है।
मावल अगर सूखाग्रस्त घोषित होता है, तो लागू सरकारी मानदंडों के हिसाब से प्रभावित किसानों को मदद और रियायतें मिलने की संभावना है। इसलिए जरूरी होगा कि समिति की जांच में असल नुकसान सही दर्ज हो, प्रभावित रकबे का सटीक आकलन हो और रिपोर्ट जल्द सरकार तक पहुंचे। मांग पूरी होने की दिशा में सरकार के कदम उठाने से किसानों में उम्मीद जगी है, लेकिन अंतिम फैसला और मदद का स्वरूप सरकार के आगे के आदेशों पर निर्भर करेगा। अब पूरे तालुका की नजर इस पर है कि समिति की रिपोर्ट में मावल के धान के नुकसान की गंभीरता कितनी झलकती है और किसानों को राहत देने के लिए सरकार क्या ठोस फैसले लेती है।
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