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धरमपेठ जोन में स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र के काम पर पार्षद झा ने उठाए सवाल

पार्षद अभिजीत झा का कहना है कि सुरेंद्रगढ़ स्कूल की इमारत में दो साल में दरारें आ गईं और रवि नगर के स्वास्थ्य केंद्र की टाइल्स उद्घाटन के बाद टूटने लगीं।

धरमपेठ जोन में स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र के काम पर पार्षद झा ने उठाए सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

धरमपेठ जोन में हुए निर्माण कामों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जोन समिति सदस्य और पार्षद अभिजीत झा ने नगर निगम आयुक्त से शिकायत की है। उनका कहना है कि स्कूल की इमारत और स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण में भी गड़बड़ी सामने आ रही है। इससे पहले सितंबर 2023 के बाद बाढ़ राहत के नाम पर इसी जोन में हुए कामों में भ्रष्टाचार और धांधली की पोल खुल चुकी है। अब नगर निगम में धांधली का एक और मामला उजागर हो रहा है।

झा के मुताबिक वार्ड 13 में सुरेंद्रगढ़ स्कूल की इमारत पर 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए। लेकिन महज 2 साल के भीतर इमारत में दरारें पड़ गईं और सीपेज की समस्या भी सामने आने लगी। दस्तावेजों के हवाले से उन्होंने यह बात कही।

रवि नगर का शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचएससी) भी सवालों में है। इसका उद्घाटन 10 जून को हुआ था। इमारत 19 लाख रुपये की लागत से बनी है, मगर आरोप है कि उद्घाटन के तुरंत बाद से ही वहां की टाइल्स टूटने लगी हैं।

झा ने कामों के दोहराव का भी मुद्दा उठाया है। उनके अनुसार जिला योजना विकास समिति (डीपीडीसी) और बाढ़ नियंत्रण निधि के तहत मंजूर कामों में भारी डुप्लीकेशन हो रहा है। मिसाल के तौर पर आजाद नगर में दीपक ढांडे से बिस्मिल्ला किराना तक 150 मीटर नाले की दीवार के लिए डीपीडीसी के तहत 25 लाख रुपये का वर्क ऑर्डर ठेकेदार पवन गजभिये और कमलेश चौहान को दिया गया था। वही काम बाढ़ नियंत्रण योजना के तहत भी मंजूर दिखाया गया।

इन तमाम कामों को धरमपेठ जोन के तत्कालीन कार्यकारी अभियंता विजय गुरूबक्षानी के कार्यकाल में अंजाम दिया गया। अब उन्हें अधीक्षक अभियंता का अतिरिक्त कार्यभार देकर जोन से मुख्यालय ले आया गया है। शायद उन्हें बचाने के लिए ही ऐसा किया गया। उनके विवादित कार्यकाल को देखते हुए ही मुख्यालय आने के बाद उन्हें कोई मुख्य जिम्मेदारी नहीं दी गई है।

लापरवाही का आलम यह है कि नगर निगम आयुक्त की बुलाई समीक्षा बैठकों में धरमपेठ जोन के डिप्टी इंजीनियर तीन बार बुलावा भेजने के बाद भी नहीं पहुंचे। बैठकों में सहायक आयुक्त और कार्यकारी अभियंता मौजूद थे, पर संबंधित डिप्टी इंजीनियर गायब रहे। आरोप है कि सत्ता पक्ष के भारी दबाव की वजह से शिकायतों के बावजूद न कोई विभागीय जांच हो रही है और न ही कार्रवाई।

एक और मामला जोन सभापति का है। उन पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पत्र जारी करने और निधि आवंटित करने की कोशिश का आरोप है। इस बारे में निगम सचिव को पत्र लिखा जा रहा है।

शहर के बुनियादी विकास में भी ढिलाई दिख रही है। सीपी क्लब से मदर डेयरी तक की सड़क 2023 में मंजूर हुई थी। साइट विजिट भी हो चुकी है और केंद्र सरकार से निधि भी मिल गई है। इसके बावजूद सड़क का काम पिछले 6 महीनों से अटका पड़ा है। झा ने इन सब मामलों की जांच की मांग उठाई है।

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