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07:36 IST

नागपुर में नाला दीवार का काम कागज पर पूरा, मौके पर अब शुरू होने का आरोप

धरमपेठ जोन के वार्ड 14 में 16.35 करोड़ के बजट वाले नाला प्रोजेक्ट को रिकॉर्ड में पूरा दिखाया गया, जबकि मौके पर काम अधूरा बताया गया है।

नागपुर में नाला दीवार का काम कागज पर पूरा, मौके पर अब शुरू होने का आरोप तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

नागपुर में सितंबर 2023 की बाढ़ का पानी लोगों के घरों में घुस गया था। खास तौर पर धरमपेठ जोन में काफी नुकसान हुआ। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने महानगरपालिका को निधि उपलब्ध कराई थी। जनहित याचिका की सुनवाई में हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया, तो नालों की सुरक्षा दीवार तुरंत बनाने का फैसला हुआ। फिर भी आरोप है कि हाई कोर्ट की नाराजगी के बावजूद काम टलता रहा।

विभागीय दस्तावेजों के मुताबिक धरमपेठ जोन के वार्ड 14 में बाढ़ नियंत्रण और नाला निर्माण के लिए 16.35 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हुआ था। 23 फरवरी 2024 को कार्य आदेश जारी हुआ। टेंडर प्रक्रिया में 19 प्रतिशत कम दर, यानी लगभग 13 करोड़ रुपये, पर यह काम 'अभि इंजीनियरिंग' नाम की एजेंसी को सौंपा गया।

विभागीय रिकॉर्ड में पूरे प्रोजेक्ट को 'वर्क कंप्लीटेड' यानी पूरा दिखाया जा चुका है। लेकिन मौके की जांच में पता चला कि रामगिरी झोपड़पट्टी विकासनगर में 480 मीटर लंबे नाले की सुरक्षा दीवार का काम सिर्फ 7 दिन पहले शुरू हुआ है। इसके अलावा सुरेंद्रगढ़ के फाल्के लेआउट और सिविल लाइंस में ड्रीम पार्क सोसायटी के पीछे नाला निर्माण अब तक पूरा नहीं हुआ।

पार्षद अभिजीत झा ने बताया कि कार्य आदेश 2024 में जारी हुआ था। उनके मुताबिक बाद में धरमपेठ जोन के कार्यकारी अभियंता रहे विजय गुरुवक्षानी और प्रमोद मोखाडे ने ठेकेदार को समय बढ़ाकर दे दिया, इसी वजह से काम अब तक नहीं हो पाया।

आरोप यह भी है कि गोंडवाना क्लब से जटाशंकर मंदिर के आगे रुद्र माता मंदिर और रामगिरी के पीछे के नाले तक 5 लाख रुपये की लागत से 112 मीटर लंबी 'डमी' सीवर लाइन बिछाई गई। एक साल बीतने के बाद भी इस लाइन में न सीवरेज का पानी बहता है, न बारिश का, फिर भी ठेकेदार का बिल पास कर दिया गया।

अंबाझरी थाने के पीछे नाला निर्माण का काम एमडी कंस्ट्रक्शन को सब-लेट किया गया था। निरीक्षण में वहां दीवार के फूलने (बल्ज होने) और शटरिंग प्लेटों में खामियों जैसी गंभीर तकनीकी कमियां मिलीं। प्रशासक काल में धरमपेठ जोन में जितने काम हुए, उस दौरान कार्यकारी अभियंता विजय गुरुवक्षानी थे।

कहा गया है कि प्रशासक काल में धरमपेठ जोन के कार्यकारी अभियंता रहे गुरुवक्षानी के कार्यकाल के सभी कामों की जांच जरूरी है। इसके कई उदाहरण बताए गए हैं और काफी समय से आपत्ति भी उठ रही है, फिर भी कार्रवाई नहीं हो रही। अब वे अधीक्षक अभियंता के तौर पर मुख्यालय में हैं, पर उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल बने हुए हैं। आरोप है कि जिन कामों को रिकॉर्ड में पूरा दिखाकर भुगतान मंजूर किया गया, वे जमीन पर कुछ दिन पहले ही शुरू हुए हैं या अब भी अधूरे हैं।

अधीक्षक अभियंता गुरुवक्षानी ने कहा कि फिलहाल उनके पास न सीमेंट रोड के काम हैं, न किसी प्रोजेक्ट के काम। उन्होंने कहा कि डीपीडीसी के काम की भी कोई जिम्मेदारी उन्हें नहीं दी गई है।

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