नागपुर मनपा की बड़ी योजनाओं पर प्रशासनिक अड़चनों का ब्रेक, कई काम अटके
नागपुर महानगरपालिका के 2026-27 के 6,202.99 करोड़ रुपये के बजट पर अमल तीन महीने बाद भी अटका हुआ है।
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नागपुर महानगरपालिका (NMC) ने 2026-27 के लिए 6,202.99 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड सरप्लस बजट पेश किया था। स्थायी समिति की अध्यक्ष शिवानी दानी-वखारे ने यह बजट बिना कोई नया टैक्स लगाए रखा था। इसे शहर की सूरत बदलने वाला महत्वाकांक्षी खाका माना गया था। लेकिन अमल शुरू हुए अभी सिर्फ तीन महीने हुए हैं और मनपा की विकास की गाड़ी रुक सी गई है।
लालफीताशाही, सॉफ्टवेयर बदलने की दिक्कतें और बार-बार आए चुनाव व विधानमंडल से जुड़े अवरोधों की वजह से दर्जनों बड़ी कल्याणकारी और इंफ्रास्ट्रक्चर योजनाओं के सिर्फ कागज पर रह जाने का खतरा खड़ा हो गया है। वित्त वर्ष तेजी से खत्म होने की ओर बढ़ रहा है।
गड़बड़ी की शुरुआत प्रक्रिया में देरी से हुई। इस साल जनवरी में स्थानीय निकायों के चुनाव हुए, जिसके चलते बजट जून के आखिर में पेश हो सका, यानी करीब डेढ़ महीने की देरी से। नतीजा यह कि प्रशासकीय स्तर पर अमल 1 अगस्त से ही शुरू हो पाया।
इसके बाद फाइलों की प्रोसेसिंग और बिल पास करने के लिए प्रशासन ने डिजिटल "वर्क मॉड्यूल" सिस्टम शुरू किया, जिससे काम और धीमा पड़ गया। NMC के सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी ने साफ किया कि जो फाइलें पहले ही टेंडर या वर्क ऑर्डर के चरण में हैं, उन्हें पिछली तारीख से मंजूरी के लिए वापस नहीं भेजा जाएगा। यह मॉड्यूल सिर्फ उन फाइलों पर लागू है जो प्रारंभिक अनुमान या तकनीकी मंजूरी के चरण में हैं और प्रशासकीय मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।
अड़चन को और बढ़ाने वाली बात आचार संहिता है, जो 27 अक्टूबर तक लागू है। इस दौरान स्थायी समिति न नई प्रोजेक्ट फाइलों को मंजूरी दे सकती है, न टेंडर जारी कर सकती है। संहिता हटने के बाद दिवाली का त्योहार आएगा और फिर महाराष्ट्र विधानमंडल के 7 दिसंबर से शुरू होने वाले शीतकालीन सत्र की भारी तैयारियों में प्रशासन का वक्त जाएगा। इस तरह नागरिक परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए बहुत ही कम समय बचेगा।
इस समय संकट में पड़े बड़े प्रोजेक्टों में 135 सड़कों का 900 करोड़ रुपये का फेज 5 सीमेंट-कंक्रीट रोड प्रोजेक्ट, धरमपेठ और शंकर नगर में 31.98 करोड़ रुपये का हेल्दी स्ट्रीट कार्यक्रम, 1.8 लाख स्ट्रीटलाइट को LED में बदलने का काम और महल में सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर 125 करोड़ रुपये का टाउन हॉल शामिल हैं।
कई अहम सामाजिक कल्याण योजनाओं का भविष्य भी अधर में है। इनमें "महापौर माहेर योजना", 10 जोन में कामगारों के लिए "थिय्या" नाम के शेल्टर, "सावजी और बुनकर महोत्सव", 5,000 सोलर चूल्हे, 75 लड़कियों को मुफ्त साइकिल, पे-एंड-पार्क सुविधाएं, जत्तारोडी में डायग्नोस्टिक और डायलिसिस सेंटर, प्रमिला मेंढे इंटरनेशनल लैंग्वेज प्रोग्राम के तहत डिजिटल ई-लाइब्रेरी, 53 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पाचपावली में सिकल-सेल डे-केयर सेंटर शामिल हैं।
जो प्रोजेक्ट अधूरे रहेंगे, उनकी भारी देनदारी 2027-28 में जाएगी। तब मनपा को नई पहल की जगह पुरानी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में पैसा लगाना पड़ेगा। खर्च के आंकड़े पूछे जाने पर मुख्य लेखा एवं वित्त अधिकारी ने बताया कि बजट का खर्च सिर्फ दिसंबर में संकलित किया जाता है।
2027-28 के बजट की तैयारी भी दिसंबर में ही शुरू होगी। ऐसे में प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती है: अटके हुए काम पूरे करना और साथ ही आगे की योजना बनाना। इसी वजह से 6,202 करोड़ रुपये के प्रावधान के असल इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
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