नागपुर में नाग नदी प्रोजेक्ट अटका, 289.19 करोड़ के सीवर टेंडर पर JICA की आपत्ति
नागपुर महानगरपालिका के सेंट्रल जोन के सीवर टेंडर में आई कंपनी की क्षमता को जापान की JICA ने नहीं माना, जिससे प्रोजेक्ट की रफ्तार थम गई है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
नागपुर महानगरपालिका ने शहर के सेंट्रल जोन में सीवर नेटवर्क बनाने और उसके पुनर्वास के लिए 289.19 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला था। अब इस टेंडर पर अड़चन खड़ी हो गई है। जानकारी सामने आई है कि टेंडर में शामिल हुई कंपनी की क्षमता को जापान की वित्तीय सहायता एजेंसी JICA ने मंजूर नहीं किया।
यह काम पैकेज सीपी-4 के तहत होना है। इसका मकसद शहर के सीवेज ढांचे को आधुनिक बनाना और उसका विस्तार करना है, ताकि दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता बढ़े। पूरे काम को 30 महीने में खत्म करने का लक्ष्य रखा गया था।
यह योजना सिटी का शहरी बुनियादी ढांचा मजबूत करने और स्वच्छता के मानक सुधारने की महानगरपालिका की बड़ी पहल का हिस्सा है। उम्मीद थी कि काम पूरा होने पर अपग्रेडेड सीवर सिस्टम से शहर की सीवेज संभालने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।
योजना के मुताबिक महानगरपालिका ने टेंडर मंगवाए और तकनीकी मंजूरी के लिए उन्हें वित्तीय मदद देने वाली जापान की कंपनी जीका को भेजा। लेकिन टेंडर में आई कंपनी की क्षमता को सिरे से खारिज कर दिया गया। सूत्रों ने बताया कि ऐसे में अब कुछ समय के लिए परियोजना पर ग्रहण लग गया है।
नाग नदी पुनरुज्जीवन परियोजना की घोषणा को एक दशक से ज्यादा हो चुका है। जानकारों की मानें तो अब तक असली काम शुरू ही नहीं हो पाया। सर्वे के नाम पर टाटा कंसलटेंसी की ओर से कुछ सर्वे किए जा रहे हैं, पर योजना की गाड़ी सर्वे से आगे नहीं बढ़ रही।
शहर में कद्दावर नेता का होना, पूरी योजना का उनके अधीन होना और वित्तीय मंजूरी मिल जाना, इन सबके बाद भी योजना कछुआ चाल से चल रही है, जो किसी आश्चर्य से कम नहीं। संभव है कि इस योजना के पूरा होने के लिए दशकों तक इंतजार करना पड़े।
हैरानी की बात यह भी है कि हजारों करोड़ की इस योजना के लिए हाल ही में महानगरपालिका को सिर्फ 68 करोड़ रुपये मिले हैं।
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