चारा उगाने के लिए सरकार देगी सब्सिडी, 4 हजार रुपये तक के बीज और पौधे मुफ्त; बच्चू कडू की मांग पर फैसला
सरकार ने 14 अक्टूबर के शासन निर्णय में 2026-27 के लिए चारा बीज और पौधे बांटने की शर्तों में ढील दी है।
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सूखे के हालात में जानवरों के लिए चारे की कमी न हो, इस मकसद से सरकार ने किसानों को चारा उगाने पर सब्सिडी देने का रास्ता खोला है। पूर्व विधायक बच्चू कडू ने सरकार से यही मांग की थी। इसी मांग के बाद सरकार ने 14 अक्टूबर को शासन निर्णय जारी किया है।
इस निर्णय के मुताबिक 2026-27 के लिए चारा बीज और पौधे बांटने की शर्तों में ढील दी गई है। मुख्यमंत्री ग्रामीण पशुधन उद्यमशीलता योजना के तहत अलग-अलग लाभार्थी को एक हेक्टेयर में चारा उगाने के लिए 4 हजार रुपये तक के चारा बीज और पौधे 100 प्रतिशत सब्सिडी पर दिए जाने का प्रावधान है।
पहले इस योजना का फायदा लेने के लिए किसान के पास कम से कम 3 से 4 जानवर होना जरूरी था। नए शासन निर्णय में 2026-27 के लिए यह शर्त ढीली कर दी गई है। यानी जो किसान जानवरों की तय संख्या पूरी नहीं कर पाते, वे भी अब योजना का फायदा ले सकेंगे।
किसानों के समूहों के लिए भी इंतजाम है। उन्हें 5 हेक्टेयर की सीमा में 20 हजार रुपये तक के चारा बीज और पौधे 100 प्रतिशत सब्सिडी पर मिलेंगे। इससे समूह मिलकर चारा उगा सकेंगे। हालांकि बताया गया है कि सार्वजनिक जमीन पर चारा उगाने वाले हर क्षेत्र को अलग से सब्सिडी देने के बारे में शासन निर्णय में साफ जिक्र नहीं है।
कडू की मांग थी कि सूखे से निपटने के लिए सिर्फ चारा छावनियों के भरोसे न रहा जाए। जिन किसानों के पास जमीन और पानी है, उन्हें चारा उगाने के लिए सीधे आर्थिक मदद दी जाए। चारा ज्यादा उगेगा तो जानवरों को हरा चारा मिल सकेगा। साथ ही गांवों में रोजगार के मौके भी बन सकते हैं। सरकार के इस फैसले से पशुपालक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
सूखे को देखते हुए सरकार ने चारा बीज बांटने के नियमों में एक और अहम छूट दी है। जिस किसान या किसान समूह के पास चारा उगाने के लिए पूरा पानी है, उसे एक से ज्यादा बार फायदा दिया जा सकेगा। शर्त यह है कि पहली बार योजना का फायदा लेने के इच्छुक दूसरे पात्र आवेदक मौजूद न हों।
इसके लिए पशुसंवर्धन विभाग के संबंधित उपायुक्त से यह पक्का कराना जरूरी होगा कि उस किसान या समूह के पास चारा उगाने के लिए पानी है। यह छूट सिर्फ 2026-27 के लिए लागू रहेगी। अब पात्र किसानों तक योजना का फायदा समय पर पहुंचाना और चारा उत्पादन कार्यक्रम को असरदार ढंग से लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
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