अमरावती में सोयाबीन कटाई के लिए मजदूर नहीं, देर हुई तो खेत में नुकसान का डर
सूखे से जूझकर बचाई गई सोयाबीन की फसल अब कटाई के मौसम में मजदूरों की कमी की वजह से अटक गई है।
इस साल बारिश ने लंबा ब्रेक लिया, इसलिए कई इलाकों में किसानों को सूखे की मार झेलनी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने सोयाबीन की फसल खड़ी की। अब कटाई के ऐन सीजन में किसानों के सामने मजदूरों की कमी का नया संकट आ गया है। मजदूर नहीं मिल रहे, इसलिए बलीराजा की चिंता बढ़ गई है।
पानी की कमी थी, खेती की लागत बढ़ती जा रही थी और हालात भी उलटे थे। इन सबके बीच फसल को बचाने के लिए किसानों ने काफी जद्दोजहद की। उपलब्ध पानी में फसल टिकाए रखने के लिए उन्हें अलग से खर्च करना पड़ा। उत्पादन वैसे भी कम रहने की आशंका है। ऊपर से कटाई के लिए मजदूर न मिलने से उनकी दिक्कत और बढ़ गई है।
कई खेतों में सोयाबीन कटाई के लिए तैयार हो चुका है। लेकिन मजदूर कम मिलने की वजह से कटाई समय पर नहीं हो पा रही। कटाई में देर हुई तो फलियां फट सकती हैं और दाने जमीन पर बिखर सकते हैं। इससे खड़ी फसल का सीधा नुकसान होने का खतरा खड़ा हो गया है। सूखे की वजह से पैदावार घटने की आशंका पहले से है, ऐसे में देरी से होने वाला नुकसान किसानों के लिए और गंभीर साबित होगा।
किसानों का कहना है कि साल भर मेहनत करके खड़ी की गई फसल हाथ में आने को है। वह सिर्फ मजदूरों की कमी की वजह से खेत में ही पड़ी रहकर बर्बाद न हो, इसके लिए प्रशासन को फौरन दखल देना चाहिए। किसान मांग कर रहे हैं कि कृषि विभाग गांव-गांव के हालात का जायजा ले और कटाई के लिए जरूरी मशीनें उपलब्ध कराए। उनकी उम्मीद बस इतनी है कि सूखे से उत्पादन भले घट जाए, पर तैयार फसल कटाई के अभाव में बर्बाद न हो।
एक तरफ बारिश न होने से उत्पादन पर असर पड़ा है। दूसरी तरफ खेती का खर्च बढ़ा है और अब कटाई के लिए मजदूर भी नहीं मिल रहे। इस तरह किसान तिहरी आर्थिक मुश्किल में फंस गया है। तैयार फसल वक्त पर खेत से बाहर नहीं निकली, तो साल भर की मेहनत पर पानी फिरने का डर है।
मजदूरों की कमी कितनी गंभीर है, इसे देखते हुए किसान चाहते हैं कि सरकार और कृषि विभाग फौरन हार्वेस्टर और कटाई की दूसरी मशीनें मुहैया कराएं। किसानों की मांग है कि जो मशीनें उपलब्ध हैं, वे उन्हें कम दाम पर मिलें। साथ ही गांव के हिसाब से कटाई की मशीनों का इंतजाम किया जाए और तैयार सोयाबीन को वक्त पर खेत से निकालने के लिए खास मुहिम चलाई जाए।