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नागपुर के वानाडोंगरी की 0.65 हेक्टेयर जमीन पर हाई कोर्ट ने ULC कार्यवाही रद्द की

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने वानाडोंगरी की 0.65 हेक्टेयर जमीन के मामले में ULC कार्यवाही को समाप्त और अप्रभावी घोषित किया।

नागपुर के वानाडोंगरी की 0.65 हेक्टेयर जमीन पर हाई कोर्ट ने ULC कार्यवाही रद्द की तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने वानाडोंगरी की एक जमीन के मामले में शहरी भूमि (अधिकतम सीमा और विनियमन) अधिनियम, 1976 के तहत चल रही ULC कार्यवाही को खत्म कर दिया है। अदालत ने इस कार्यवाही को समाप्त और अप्रभावी घोषित किया। मामला 0.65 हेक्टेयर, यानी करीब 69,965 वर्ग फुट जमीन का है।

यह याचिका रिता पचेरीवाला और श्यामसुंदर अग्रवाल ने दायर की थी। उनका कहना था कि ULC का मामला खत्म हो चुका है और जमीन पर उनका अधिकार कायम है। सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने यह अहम फैसला सुनाया।

जमीन वानाडोंगरी के सर्वे नंबर 53 की है, जिसका पुराना सर्वे नंबर 48/2 था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक यह जमीन भैया महादेव वालदे के नाम थी। मूल मालिक ने 29 सितंबर 1976 को ULC अधिनियम की धारा 6(1) के तहत रिटर्न दाखिल किया था। इसी के आधार पर ULC प्रकरण संख्या 2657/1976 दर्ज हुआ।

11 अक्टूबर 1987 को धारा 8 के तहत अधिसूचना जारी हुई। फिर 16 दिसंबर 1987 के आदेश से घोषणाकर्ता को कुल 15579.21 वर्ग मीटर जमीन में से 1500 वर्ग मीटर अपने पास रखने की इजाजत दी गई। इसके बाद 6 नवंबर 2007 को धारा 10(5) के तहत घोषणाकर्ता को अतिरिक्त जमीन सौंपने का नोटिस भेजा गया।

याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि जमीन का कब्जा कभी लिया ही नहीं गया और वे आज भी 0.65 हेक्टेयर जमीन पर काबिज हैं। उन्होंने यह भी बताया कि घोषणाकर्ता ने अपनी मिल्कियत से ज्यादा जमीन बेच दी थी। साल 1993 में घोषणाकर्ता ने 1.70 हेक्टेयर में से 0.81 हेक्टेयर जमीन सहकार कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड को विक्रय पत्र के जरिए बेची थी।

यह बात बताए बिना घोषणाकर्ता ने 17 नवंबर 1998 के पंजीकृत विक्रय पत्र से 1.00 हेक्टेयर जमीन याचिकाकर्ताओं को बेच दी। फिर 9 दिसंबर 1998 के एक और विक्रय पत्र से 0.46 हेक्टेयर जमीन भी याचिकाकर्ताओं को बेची गई। याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि घोषणाकर्ता ने अपनी मिल्कियत से ज्यादा जमीन बेची, इसलिए उनके पक्ष में बने विक्रय पत्र सिर्फ 0.65 हेक्टेयर जमीन तक ही वैध हैं।

सरकार की तरफ से जवाब में कहा गया कि पुराना सर्वे नंबर 48/2 अब नया सर्वे नंबर 53 है और यह 1.70 हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज है। भूमि अधिकार अभिलेख में यह जमीन महाराष्ट्र सरकार के नाम दर्ज है। सरकार का यह भी कहना था कि 17 नवंबर 1998 और 9 दिसंबर 1998 के विक्रय पत्र शून्य हैं, क्योंकि वे ऐसी जमीन के लिए बने थे जिसे अधिशेष भूमि घोषित किया जा चुका था, और उस वक्त ULC अधिनियम लागू था।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने साफ किया कि बोल्टास प्रकरण में यह तय हो चुका है कि अगर राज्य सरकार ने जमीन का कब्जा नहीं लिया है, तो कार्यवाही खत्म मानी जाएगी और आगे नहीं बढ़ सकती। अदालत ने यह भी कहा कि राज्य की ओर से रिकॉर्ड पर एक भी दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे पता चले कि कब्जा लिया गया था या घोषणाकर्ता ने सौंपा था। इसी आधार पर ULC कार्यवाही समाप्त और अप्रभावी घोषित की गई।

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