आईएमडी की स्टडी: महाराष्ट्र के अंदरूनी इलाके गर्म और सूखे, कोकण में बारिश का दायरा बढ़ा
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की नई स्टडी में महाराष्ट्र के मौसम में दो उलटे लंबे बदलाव दिखे हैं। मराठवाड़ा और विदर्भ गर्म हो रहे हैं, जबकि कोंकण में भारी बारिश वाला इलाका फैल रहा है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई : भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की एक नई स्टडी में सामने आया है कि महाराष्ट्र के मौसम में दो उलटे किस्म के लंबे बदलाव एक साथ चल रहे हैं। राज्य के अंदरूनी हिस्सों के कुछ इलाके ज्यादा गर्म और सूखे होते जा रहे हैं। दूसरी तरफ कोंकण के समंदर किनारे वाले हिस्से में भारी बारिश वाले मौसमी इलाके का दायरा बढ़ रहा है। स्टडी के मुताबिक बारिश और तापमान का यह बदलता मिजाज खेती, पानी के इंतजाम और मौसम से जुड़ी आफतों की तैयारी के सामने चुनौतियां बढ़ा रहा है।
यह चेतावनी ऐसे वक्त आई है जब महाराष्ट्र के लिए इस बार का मानसून पहले ही मुश्किल रहा। 26 सितंबर तक राज्य की 358 तहसीलों में से 305 तहसीलों में सूखा घोषित किया गया। मौसम भर की बारिश औसत से 19 फीसदी कम रही। यह साल एल निनो का था और देश भर में बारिश 12.6 फीसदी घट गई। आम तौर पर एल निनो का नैऋत्य मानसून पर बुरा असर पड़ता है।
स्टडी पिछले सात दशकों के मौसम के आंकड़ों पर टिकी है। इसमें 1961 से 1990 और 1991 से 2020, यानी लगातार 30-30 साल के दो दौर लेकर देखा गया कि भारत के मौसमी इलाकों में क्या फर्क आया।
जहां राज्य के अंदरूनी हिस्सों में मौसम गर्म और सूखा हो रहा है, वहीं पश्चिमी किनारे की तस्वीर अलग है। स्टडी के मुताबिक कोंकण, गोवा, तटीय कर्नाटक और केरल में उष्णकटिबंधीय मानसून वाले इलाके का दायरा बढ़ रहा है। इन जगहों पर मौसम में बारिश बहुत ज्यादा होती है। बड़े पैमाने पर देखें तो रिसर्चरों को यह भी मिला कि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश कम हो रही है, जबकि दक्षिण भारत में बढ़ रही है।
तापमान और बारिश का पैटर्न देखकर तय करने में मदद मिल सकती है कि किसी इलाके में कौन सी फसल ठीक रहेगी, बुआई कब करनी चाहिए और सिंचाई के लिए कितना पानी लगेगा। जहां तापमान ज्यादा और बारिश कम है, वहां मौजूद पानी को बचाना और सूखे से निपटने के लिए तैयार रहना और जरूरी होगा।
महाराष्ट्र के हिसाब से स्टडी कहती है कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों के लिए अलग नीतियां बनानी होंगी। मराठवाड़ा और पश्चिम विदर्भ में गर्मी और सूखे से लड़ने की ताकत बढ़ानी होगी और फसलों की योजना सुधारनी होगी। मौसमी बारिश की कमी के साथ-साथ अतिवृष्टि जैसे बारिश से जुड़े दूसरे खतरों की तैयारी भी रखनी पड़ेगी। स्टडी ने इस पर भी जोर दिया है कि खेती और पानी की सुरक्षा के फैसले सिर्फ पूरे राज्य या किसी बड़े इलाके के औसत आंकड़ों पर नहीं टिकने चाहिए, क्योंकि पड़ोस के इलाकों में भी मौसम का रंग बदल सकता है।
आंकड़ों में देखें तो 1 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच राज्य में कुल 804.4 mm बारिश हुई, जबकि औसत 994.5 mm है। यानी 19 फीसदी की कमी रही। मराठवाड़ा में यह कमी 39 फीसदी रही, जो सबसे ज्यादा है। इसमें छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी, बीड, हिंगोली, नांदेड और लातूर शामिल हैं। कोंकण में आईएमडी ने 22 से 26 अक्टूबर के लिए मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ में येलो अलर्ट दिया है, जहां गर्म और उमस भरे मौसम के बीच दोपहर में गरज के साथ बारिश हो सकती है।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।